सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित समिति के सर्वे में चौंकाने वाला खुलासा, 9 फीसदी छात्रों ने मन में आत्महत्या के विचार आने की बात स्वीकारी

punjabkesari.in Wednesday, Sep 30, 2026 - 10:21 AM (IST)

नई दिल्ली (एजैंसी): उच्च शिक्षण संस्थानों के करीब 15 प्रतिशत छात्रों ने स्वीकार किया है कि पिछले 6 महीनों में वे ऐसे दौर से गुजरे, जब उन्होंने खुद को बेहद परेशान या तनावग्रस्त महसूस किया, जबकि 9 प्रतिशत छात्रों ने मन में आत्महत्या के विचार आने की बात कही। छात्रों में आत्महत्या के बढ़ते मामलों के विश्लेषण के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित समिति के राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण में यह जानकारी सामने आई है। 

ऐसी संभावना है कि ये निष्कर्ष उच्च शिक्षण संस्थानों (एच.ई.आई.) में छात्रों की मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं को दूर करने और आत्महत्याओं को रोकने के लिए गठित राष्ट्रीय कार्यबल (एन.टी.एफ.) की अंतिम रिपोर्ट का हिस्सा होंगे। यह रिपोर्ट 31 अक्तूबर तक सौंपे जाने की संभावना है। इस सर्वेक्षण को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आई.आई.टी.) दिल्ली और आई.आई.टी. मुंबई में 2 छात्रों की मौत के बाद छात्र आत्महत्या को लेकर बहस फिर तेज हो गई है और व्यापक प्रतिक्रिया देखने को मिली है।  

सर्वे में शामिल हुए 2.43 लाख से अधिक छात्र
एन.टी.एफ. द्वारा किए गए छात्र सर्वेक्षण में 2.43 लाख से अधिक छात्रों ने हिस्सा लिया, जिनमें से 67 प्रतिशत छात्र अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओ.बी.सी.) श्रेणी से थे। 

सर्वे में राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा-स्नातक (नीट-यू.जी.) और राष्ट्रीय संयुक्त प्रवेश परीक्षा (जे.ई.ई.) रैंक के आधार पर जाति की पहचान तथा दाखिले, अंक निर्धारण, भाषा की दिक्कत और शिक्षकों के ध्यान देने के स्तर पर भेदभाव तथा जातिगत अपमान जैसी बातें भी सामने आई हैं।

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Content Writer

Niyati Bhandari

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