Pitru Paksha Pushkar Dham : पितरों की मुक्ति का पावन धाम है पुष्कर, जानें 7 कुल और 5 पीढ़ियों के पिंडदान का रहस्य

punjabkesari.in Sunday, Sep 27, 2026 - 12:00 PM (IST)

Pitru Paksha Pushkar Dham : देशभर में कई तीर्थस्थल पितृ कर्म के लिए प्रसिद्ध हैं, लेकिन राजस्थान का पुष्कर इस दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। मान्यता है कि यहां श्रद्धालु अपने सात कुलों और पांच पीढिय़ों तक के पूर्वजों के निमित्त श्राद्ध कर्म कर सकते हैं।

Pitru Paksha Pushkar Dham

ब्रह्मा की नगरी पुष्कर
तीर्थ गुरु पुष्कर धार्मिक, ऐतिहासिक और आध्यात्मिक दृष्टि से भारत के प्रमुख तीर्थस्थलों में शामिल है। इसकी सबसे बड़ी विशेषताओं में यहां स्थित जगत पिता भगवान ब्रह्मा का मंदिर है। उन्हें सृष्टि का रचयिता माना जाता है और पुष्कर स्थित उनका मंदिर देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए प्रमुख आस्था केंद्र है।पुष्कर की धार्मिक महत्ता केवल ब्रह्मा मंदिर तक सीमित नहीं है, यहां स्थित पवित्र पुष्कर सरोवर के किनारे लंबे समय से पितरों के निमित्त तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध कर्म किए जाते हैं। मान्यता है कि श्रद्धा के साथ किए गए इन कर्मों से पितरों को शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

Pitru Paksha Pushkar Dham

पुष्कर के तीर्थ पुरोहितों के पास देश के अलग-अलग क्षेत्रों से आने वाले परिवारों और उनके पूर्वजों से संबंधित पोथियां भी सुरक्षित रखने की परम्परा है। इनमें परिवार और पूर्वजों के नाम एवं अन्य विवरण दर्ज किए जाते हैं। अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े तीर्थ पुरोहित श्रद्धालुओं की पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान और पितृ शांति के अनुष्ठान करवाते हैं। पुष्कर में सात कुल और पांच पीढिय़ों तक के पूर्वजों के निमित्त पिंडदान व श्राद्ध करने की मान्यता है। इसी वजह से पितृ कर्म के लिए इसे विशेष तीर्थ माना जाता है।

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धार्मिक कथाओं के अनुसार, भगवान श्रीराम भी पुष्कर आए थे और उन्होंने अपने पिता महाराज दशरथ सहित पूर्वजों के निमित्त श्राद्ध कर्म किया था। मान्यता है कि इसके बाद राजा दशरथ ने उन्हें आशीर्वाद दिया। पुष्कर सरोवर 52 घाटों से घिरा हुआ है। इन घाटों पर श्रद्धालु स्नान, पूजा, तर्पण और पिंडदान जैसे धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। मान्यता है कि सरोवर में स्नान करने से आध्यात्मिक शुद्धता प्राप्त होती है। पितृ पक्ष के दौरान इन घाटों पर विशेष चहल-पहल रहती है। मंत्रोच्चार और वैदिक कर्मकांड के बीच होने वाले तर्पण और श्राद्ध से पूरे क्षेत्र का वातावरण भक्तिमय नजर आता है।

गया कुंड का भी महत्व
पुष्कर में स्थित गया कुंड का भी पितृ कर्म की दृष्टि से विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि जो श्रद्धालु बिहार के गया जाकर अपने पितरों का श्राद्ध नहीं कर पाता, वह पुष्कर के गया कुंड में यह धार्मिक कर्म कर सकता है। इसी विश्वास के चलते पितृ पक्ष में देश के विभिन्न हिस्सों से लोग पुष्कर पहुंचते हैं और अपने पूर्वजों के निमित्त तर्पण एवं पिंडदान करते हैं। पितृ पक्ष से जुड़ी मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में शुभ कार्यों से परहेज किया जाता है और पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने पर विशेष ध्यान दिया जाता है।

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Content Editor

Sarita Thapa

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