विश्व शांति के लिए उज्जैन में पहली बार होगा भस्मलिंगार्चन, सोमवार को भस्म से होगा बाबा का अलौकिक शृंगार

punjabkesari.in Sunday, Jan 04, 2026 - 09:20 AM (IST)

Ujjain Mahakal Mandir : अवंतिका नगरी में साल 2026 की शुरुआत आस्था और अध्यात्म के चरम के साथ हुई है। इसी कड़ी में सोमवार, 5 जनवरी 2026 को धर्मनगरी उज्जैन में एक दुर्लभ और भव्य आयोजन होने जा रहा है। अखिल भारतीय श्री स्वामी समर्थ गुरुपीठ के मार्गदर्शन में पहली बार 'श्री भस्मलिंगार्चन समारोह' का आयोजन किया गया है, जिसका उद्देश्य मानव जाति का कल्याण, विश्व शांति और आने वाले संकटों का निवारण है।

क्या है भस्मलिंगार्चन?
भस्मलिंगार्चन वह विशेष आध्यात्मिक प्रक्रिया है जिसमें भगवान शिव (महाकाल) का पूर्ण रूप से भस्म (विभूति) से शृंगार और पूजन किया जाता है। शास्त्रों में भस्म को शुद्धि और वैराग्य का प्रतीक माना गया है। काल के अधिपति महाकाल पर भस्म का अर्पण यह दर्शाता है कि वे मृत्यु पर विजय प्राप्त करने वाले हैं। इस विशेष अनुष्ठान में हजारों की संख्या में 'सेवेकरी' और श्रद्धालु शामिल होंगे।

आयोजन का समय और स्थान
यह भव्य समारोह उज्जैन के बड़नगर रोड स्थित पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी के परिसर में आयोजित किया जा रहा है।

दिनांक: 5 जनवरी 2026 (सोमवार)

समय: सुबह 8:00 बजे से 10:30 बजे तक

मुख्य आकर्षण: भस्म से शिवलिंग का भव्य शृंगार और सामूहिक प्रार्थना।

मानव कल्याण के लिए विशेष अनुष्ठान
आयोजकों के अनुसार, इस अनुष्ठान का मुख्य केंद्र बिंदु 'लोक-कल्याण' है। गुरु माउली के सानिध्य में होने वाले इस कार्यक्रम में देश भर से श्रद्धालु जुट रहे हैं। मान्यता है कि सोमवार के दिन दक्षिणाभिमुख ज्योतिर्लिंग क्षेत्र में किया गया भस्म पूजन अकाल मृत्यु के भय को मिटाता है और साधक के जीवन में सुख-समृद्धि लाता है।

उज्जैन में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब
नए साल के पहले सप्ताह और कड़ाके की ठंड के बावजूद उज्जैन 'हाउसफुल' है। नए साल के पहले दिन करीब 4 लाख से अधिक भक्तों ने दर्शन किए थे, और अब सोमवार के इस विशेष आयोजन के लिए भी भारी भीड़ उमड़ रही है। भीड़ प्रबंधन के लिए पुलिस बल तैनात है और वीआईपी प्रोटोकॉल की जगह सामान्य दर्शनार्थियों की सुविधा पर जोर दिया जा रहा है।

क्यों खास है यह सोमवार ?
हिंदू धर्म में सोमवार भगवान शिव को समर्पित है। इस सोमवार को भस्मलिंगार्चन के साथ-साथ श्रद्धालु बाबा महाकाल की दिव्य भस्म आरती का लाभ भी उठा सकेंगे। मंदिर परिसर में 'जय महाकाल' के उद्घोष के साथ आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हो रहा है।

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Content Editor

Sarita Thapa

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