बेरोजगारी दर में 10.3 प्रतिशत की वृद्धि, पुरुषों से ज्यादा है बेरोजगार महिलाओं की संख्या

2021-09-12T17:25:53.933

नेशनल डैस्क: एक सर्वे में दावा किया गया है कि पिछले साल अक्टूबर-दिसंबर में बेरोजगारी की दर में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एन.एस.ओ.) द्वारा आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण के मुताबिक, सभी उम्र के लिए भारत की बेरोजगारी दर अक्टूबर-दिसंबर 2020 में बढ़कर 10.3 प्रतिशत हो गई, जबकि इससे एक साल पहले इसी महीने में यह 7.9 प्रतिशत थी। सर्वेक्षण के अनुसार, शहरी क्षेत्रों में सभी उम्र के लिए श्रम बल की भागीदारी दर में भी वृद्धि देखी गई। अक्टूबर-दिसंबर 2020 में महिला बेरोजगारी दर 13.1 प्रतिशत रही, जो इससे एक साल पहले की अवधि में 9.8 प्रतिशत थी। शहरी पुरुषों के लिए यह अक्टूबर-दिसंबर 2020 में 9.5 प्रतिशत, अक्टूबर-दिसंबर 2019 में 7.3 प्रतिशत और जुलाई-सितंबर 2020 में 12.6 प्रतिशत थी।

 

कब शुरू हुआ आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण
बेरोजगारी दर को श्रम बल में बेरोजगार व्यक्तियों के प्रतिशत के रूप में परिभाषित किया गया है, वहीं श्रम बल जनसंख्या के उस हिस्से को दर्शाता है जो वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन के लिए आर्थिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए श्रम की आपूर्ति करता है। आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण 2017 में शुरू किया गया था। क्वार्टर सर्वे श्रम बल संकेतकों जैसे बेरोजगारी दर, श्रमिक जनसंख्या अनुपात, श्रम बल भागीदारी दर, रोजगार में व्यापक स्थिति के आधार पर श्रमिकों का वितरण और वर्तमान साप्ताहिक स्थिति में काम के उद्योग आदि में एक अंतर्दृष्टि देता है। दिसंबर 2018, मार्च 2019, जून 2019, सितंबर 2019, दिसंबर 2019, मार्च 2020, जून 2020 और सितंबर 2020 को समाप्त तिमाही के लिए आवधिक सर्वेक्षण के आठ बुलेटिन पहले ही जारी किए जा चुके हैं।

 

20 करोड़ लोगों के बेरोजगार होने की आशंका
इससे पहले संयुक्त राष्ट्र (यू.एन.) की रिपोर्ट में दावा किया गया था कि कोरोना वायरस महामारी के कारण अप्रत्याशित तबाही से अगले साल 20 करोड़ लोगों के बेरोजगार होने की आशंका है। अभी 10.8 करोड़ कामगार गरीब या अत्यंत गरीब की श्रेणी में पहुंच गए हैं। संयुक्त राष्ट्र की श्रम एजेंसी अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक संगठन (आई.एल.ओ.) ने विश्व रोजगार और सामाजिक परिदृश्य: रुझान 2021 की रिपोर्ट में कहा है कि कोविड-19 महामारी से श्रम बाजार में पैदा संकट खत्म नहीं हुआ है। नुकसान की भरपाई के लिए रोजगार वृद्धि कम से कम 2023 तक नाकाफी होगी।


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Content Writer

Seema Sharma

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