Pre Diabetes: किन लोगों को रहता है प्री डायबिटीज का खतरा, शरीर पर दिखे ये लक्षण तो हो जाए अलर्ट

punjabkesari.in Friday, Feb 27, 2026 - 12:26 PM (IST)

नेशनल डेस्क: डायबिटीज रातों-रात नहीं होती, बल्कि हमारा शरीर हमें काफी पहले से आगाह करने लगता है। इसी 'वॉर्निंग सिग्नल' को मेडिकल भाषा में प्री-डायबिटीज कहते हैं। इसका सीधा सा मतलब है कि आपके खून में शुगर का स्तर खतरे के निशान से ऊपर जा चुका है, लेकिन अभी भी आपके पास वक्त है कि आप इसे टाइप-2 डायबिटीज बनने से रोक सकें। अगर इसे नजरअंदाज किया गया, तो यह न केवल शुगर की बीमारी बल्कि दिल, गुर्दे और नसों को भी बुरी तरह नुकसान पहुँचा सकता है।

कैसे पहचानें शरीर की इस चुपचाप दस्तक को?

प्री-डायबिटीज को अक्सर लोग सामान्य थकान समझकर टाल देते हैं, लेकिन शरीर कुछ खास बदलावों से अपनी तकलीफ बयान करता है। अगर आपको अचानक बार-बार प्यास लगने लगी है या रात में कई बार बाथरूम जाना पड़ रहा है, तो सतर्क हो जाइए। कई बार भूख भी सामान्य से ज्यादा लगने लगती है और शरीर हर वक्त थका-थका सा रहता है।

त्वचा पर दिखने वाले बदलाव इसके सबसे बड़े संकेत हो सकते हैं। अगर आपकी गर्दन, बगलों या कोहनी के पास की त्वचा काली और मखमली दिखने लगी है (जैसे वहां मैल जमा हो), तो यह इंसुलिन की गड़बड़ी का साफ संकेत है। इसके अलावा, शरीर पर अचानक छोटे-छोटे मस्से या 'स्किन टैग्स' का निकलना और हाथ-पैरों में अजीब सी झनझनाहट महसूस होना भी इसी खतरे की ओर इशारा करता है।

आखिर किन्हें है सबसे ज्यादा खतरा?

प्री-डायबिटीज हर किसी को अपनी चपेट में नहीं लेती, लेकिन कुछ आदतों वाले लोग इसके रडार पर सबसे पहले होते हैं। जिनका वजन जरूरत से ज्यादा है या जिनकी कमर का घेरा बढ़ता जा रहा है, उन्हें खास ख्याल रखने की जरूरत है। खराब खानपान, जैसे कि ज्यादा मीठा खाना या कोल्ड ड्रिंक्स का शौक, इस खतरे को दोगुना कर देता है।

आलसी जीवनशैली और 35 की उम्र पार कर चुके लोगों में इसका रिस्क बढ़ जाता है। साथ ही, जिन महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान शुगर की समस्या रही हो या जो लोग नींद की कमी से जूझ रहे हैं, उन्हें भी अपनी जांच करानी चाहिए।

लापरवाही की क्या कीमत चुकानी पड़ सकती है?

प्री-डायबिटीज को सिर्फ 'हल्की शुगर' समझना भारी भूल हो सकती है। अगर इसे काबू नहीं किया गया, तो यह शरीर के अंदरूनी अंगों को खोखला करना शुरू कर देती है। इससे हाई ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल का बढ़ना और स्ट्रोक जैसी जानलेवा स्थितियां पैदा हो सकती हैं। यह आपकी आंखों की रोशनी को कमजोर कर सकती है, किडनी को खराब कर सकती है और यहां तक कि घावों के भरने की रफ्तार को भी धीमा कर देती है। अच्छी बात यह है कि सही डाइट और एक्टिव लाइफस्टाइल से इस पूरी प्रक्रिया को पलटा जा सकता है।


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Content Editor

Anu Malhotra

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