Heart Attack Prevention: क्या पहली बार आने वाले हार्ट अटैक को रोका जा सकता है? नई स्टडी में ''इवोलोक्यूमैब'' दवा ने दिखाए चौंकाने वाले नतीजे

punjabkesari.in Wednesday, Apr 08, 2026 - 12:03 PM (IST)

नई दिल्ली: दुनिया भर में दिल की बीमारियां जानलेवा बनी हुई हैं, और अक्सर लोग तब सचेत होते हैं जब शरीर में ब्लॉकेज या हार्ट अटैक जैसी गंभीर स्थिति बन जाती है। लेकिन अब एक नई मेडिकल रिसर्च ने उम्मीद की किरण दिखाई है कि अगर सही समय पर इलाज शुरू हो, तो पहली बार होने वाले हार्ट अटैक को भी रोका जा सकता है। हाल ही में हुई एक रिसर्च के अनुसार, इवोलोक्यूमैब (Evolocumab) नामक दवा हाई-रिस्क वाले मरीजों में पहले हार्ट अटैक के खतरे को काफी हद तक कम कर सकती है।

क्या कहती है नई रिसर्च?
मैसाचुसेट्स जनरल ब्रिगहम (अमेरिका) द्वारा की गई यह स्टडी मेडिकल जर्नल JAMA में प्रकाशित हुई है। इस रिसर्च में पाया गया कि जिन मरीजों को डायबिटीज है और जिनका रिस्क लेवल हाई है, उनमें यह दवा दिल के गंभीर रोगों को पनपने से पहले ही रोक सकती है। खास बात यह है कि यह दवा उन लोगों पर भी असरदार साबित हुई है, जिनमें आर्टरीज (धमनियों) की बीमारी के शुरुआती लक्षण नहीं दिख रहे थे।

क्यों जरूरी है 'बैड कोलेस्ट्रॉल' पर लगाम?
हमारे दिल की सेहत इस बात पर निर्भर करती है कि हमारी धमनियां कितनी साफ हैं।

प्लाक (Plaque): समय के साथ धमनियों में 'गंदगी' जमा होने लगती है जिसे एथेरोस्क्लेरोसिस कहते हैं।

LDL का रोल: इस जमाव का मुख्य विलेन 'बैड कोलेस्ट्रॉल' (LDL) है।

रुकावट: जब यह जमाव बढ़ता है, तो खून का बहाव रुक जाता है, जिससे सीधा हार्ट अटैक या स्ट्रोक होता है।

स्टैटिन से कितनी अलग है इवोलोक्यूमैब?
आमतौर पर डॉक्टर कोलेस्ट्रॉल कम करने के लिए स्टैटिन (Statins) दवा देते हैं। लेकिन हाई-रिस्क मरीजों में कभी-कभी स्टैटिन अकेले काफी नहीं होती। यहीं पर इवोलोक्यूमैब काम आती है। यह एक PCSK9 इनहिबिटर है, जो स्टैटिन के मुकाबले एलडीएल कोलेस्ट्रॉल को 60% तक कम करने की क्षमता रखती है।

स्टडी के बड़े नतीजे: 31% कम हुआ खतरा
इस स्टडी में 3,655 ऐसे डायबिटीज मरीजों को शामिल किया गया था जो हाई-रिस्क पर थे। परिणामों में पाया गया कि:

कोलेस्ट्रॉल में गिरावट: दवा शुरू करने के एक साल के भीतर मरीजों का एलडीएल कोलेस्ट्रॉल करीब 51% तक गिर गया।

लॉन्ग टर्म फायदा: पांच साल के फॉलो-अप के बाद यह देखा गया कि दवा लेने वालों में हार्ट अटैक, स्ट्रोक या दिल से जुड़ी मौत का खतरा 31% तक कम हो गया।

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी नवीनतम शोध और विशेषज्ञों के मतों पर आधारित है परंतु प्रत्येक व्यक्ति की शारीरिक स्थिति भिन्न होती है। इसे व्यक्तिगत मेडिकल सलाह न मानें। किसी भी स्वास्थ्य संबंधी समस्या के लिए हमेशा अपने डॉक्टर की राय को प्राथमिकता दें।


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Content Editor

Anu Malhotra

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