Pancreas cancer: खतरे की घंटी हो सकते शरीर के ये लक्षण... न करें नजरअंदाज, हो सकता है ''खतरनाक'' कैंसर
punjabkesari.in Tuesday, Apr 07, 2026 - 12:20 PM (IST)
Pancreas cancer: अक्सर हम पेट दर्द या गैस जैसी समस्याओं को मामूली मानकर टाल देते हैं, लेकिन यही लापरवाही कभी-कभी भारी पड़ सकती है। अग्न्याशय यानी पेनक्रियाज का कैंसर दुनिया के सबसे घातक रोगों में से एक है क्योंकि यह शरीर के भीतर बहुत ही शांति से पनपता है। पेट के ठीक पीछे मौजूद यह छोटा सा अंग हमारे पाचन और ब्लड शुगर को कंट्रोल करने का काम करता है, पर जब इसमें कैंसर की शुरुआत होती है, तो इसके लक्षण इतने साधारण होते हैं कि इंसान को भनक तक नहीं लगती।
क्यों है यह इतना चुनौतीपूर्ण?
पैनक्रियास जर्नल में पब्लिश और अमेरिकन कैंसर सोसाइटी व नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट के अनुसार, इस बीमारी का सबसे बड़ा खतरा इसका 'लुका-छिपी' वाला स्वभाव है। शुरुआत में व्यक्ति को बस थोड़ा सा पेट दर्द, पीठ में खिंचाव या कम खाना खाने पर ही पेट भरा-भरा सा महसूस होता है। लोग इसे अक्सर तनाव या बदहजमी समझकर घरेलू नुस्खों में वक्त बर्बाद कर देते हैं, जबकि असल में बीमारी अंदर ही अंदर जड़ें जमा रही होती है।
खतरे की घंटी हो सकते शरीर के इन इशारों को समझें
अगर आपको मतली महसूस हो रही है या पाचन तंत्र बार-बार बिगड़ रहा है, तो सतर्क हो जाइए। इस कैंसर का एक बड़ा संकेत पीलिया भी है, जिसमें आंखों और त्वचा का रंग पीला होने लगता है। ऐसा तब होता है जब ट्यूमर की वजह से पित्त की नली रुक जाती है। इसके अलावा, अगर पेशाब का रंग बहुत गहरा हो जाए या मल का रंग हल्का दिखाई दे और शरीर में खुजली होने लगे, तो यह खतरे की घंटी हो सकती है।
वजन का घटना और अन्य बदलाव
बिना किसी डाइट या एक्सरसाइज के अचानक वजन गिरना एक गंभीर चेतावनी है। जब पेनक्रियाज ठीक से काम नहीं करता, तो शरीर भोजन से जरूरी पोषक तत्व नहीं सोख पाता, जिससे कमजोरी बढ़ने लगती है। कुछ मामलों में मल का चिपचिपा या तैलीय होना और अचानक से शुगर लेवल का बढ़ जाना भी इसी बीमारी की ओर इशारा करता है।
सावधान रहने में ही भलाई
हर समय थकान रहना और भूख की कमी को हल्के में न लें। हालांकि ये लक्षण सामान्य बीमारियों में भी दिखते हैं, लेकिन इनका लगातार बने रहना चिंता का विषय है। डॉक्टरों के अनुसार, धूम्रपान करने वाले लोगों, मोटापे से ग्रस्त व्यक्तियों और जिनके परिवार में इस बीमारी का इतिहास रहा है, उन्हें अपनी सेहत को लेकर अधिक सजग रहना चाहिए। समय पर पहचान ही इस बीमारी से बचने का एकमात्र प्रभावी रास्ता है।
