शादी से पहले ‘परफेक्ट'' दिखने की चाहत बन न जाए आफत, युवाओं की सेहत पर भारी पड़ रहा खतरनाक ट्रेंड

punjabkesari.in Sunday, Apr 05, 2026 - 12:00 PM (IST)

नेशनल डेस्क: शादी के दिन सबसे सुंदर दिखने की लालसा अब युवाओं को एक ऐसे जोखिम भरे रास्ते पर ले जा रही है, जहां सेहत की कीमत पर 'इंस्टेंट ग्लो' और 'जीरो फिगर' खरीदा जा रहा है। दिल्ली की 28 वर्षीय नेहा (परिवर्तित नाम) इसका सटीक उदाहरण हैं, जिनकी शादी में मात्र दो महीने शेष हैं। जिम और योग जैसे पारंपरिक तरीकों को छोड़, नेहा ने 6-8 हफ्तों में वजन घटाने के लिए 'इन्क्रीटिन बेस्ड थेरेपी' का सहारा लिया है। यह कहानी अकेले नेहा की नहीं है; महानगरों के हजारों युवा अब 'वेडिंग वेट लॉस' के लिए दवाइयों और इंजेक्शनों के जाल में फंस रहे हैं। 

महानगरों में 40% बढ़ा 'वेडिंग वेट लॉस' पैकेज का क्रेज 

ताजा आंकड़ों के अनुसार दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे शहरों में कॉस्मेटिक क्लीनिकों द्वारा दिए जाने वाले 'वेडिंग वेट लॉस' पैकेज की मांग में 40 प्रतिशत का उछाल आया है। सोशल मीडिया पर 'परफेक्ट' दिखने के दबाव ने युवाओं को महीनों की मेहनत की जगह 'क्विक फिक्स' कल्चर की ओर धकेल दिया है। 

'द लैंसेट' और 'न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन' (NEJM) की रिपोर्ट्स बताती हैं कि मूल रूप से टाइप-2 डायबिटीज के इलाज के लिए बनी GLP-1 दवाओं का इस्तेमाल अब गैर-कानूनी और गैर-जरूरी तरीके से वजन घटाने के लिए किया जा रहा है। 

'क्विक फिक्स' के पीछे का कड़वा सच

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि बिना डॉक्टरी परामर्श के ली जा रही ये थेरेपी शरीर को स्थायी नुकसान पहुंचा सकती हैं: 

'ओजेम्पिक फेस' (Ozempic Face): तेजी से वजन घटने के कारण चेहरे का प्राकृतिक फैट खत्म हो जाता है, जिससे त्वचा लटक जाती है। दूल्हा-दुल्हन शादी की चमक के बजाय समय से पहले बूढ़े और थके हुए नजर आने लगते हैं। 

पाचन तंत्र पर हमला: इन दवाओं से गंभीर कब्ज, उल्टी, पेट दर्द और अग्न्याशय (Pancreas) में सूजन की समस्या हो सकती है। 

रिबाउंड वेट गेन: जैसे ही दवा बंद की जाती है, वजन पहले से भी ज्यादा तेजी से वापस लौटता है, जो मेटाबॉलिज्म को पूरी तरह बिगाड़ देता है। 

अंगों की विफलता: फैट बर्निंग सप्लीमेंट्स और स्टेरॉयड का अनियंत्रित उपयोग किडनी फेलियर और लिवर डैमेज का कारण बन सकता है। 

बाजार का गणित और मनोवैज्ञानिक दबाव 

एक सर्वे के अनुसार, 70% भावी दूल्हा-दुल्हन मानते हैं कि सोशल मीडिया पर परफेक्ट दिखने का दबाव उन्हें इन जोखिम भरे ट्रीटमेंट्स की ओर ले जाता है। यह केवल एक स्वास्थ्य समस्या नहीं, बल्कि 2030 तक 80 अरब डॉलर तक पहुंचने वाला एक विशाल वैश्विक बाजार बन चुका है। 

विशेषज्ञ की राय: "यह कॉस्मेटिक नहीं, क्लिनिकल दवा है" 

जयपुर के एसएमएस अस्पताल के प्रसिद्ध एंडोक्रायोनोलॉजिस्ट डॉ. बलराम शर्मा के अनुसार: 

"यह एक बेहद खतरनाक ट्रेंड है। सेमाग्लूटाइड और टाइरेपाटाइड जैसे फॉर्मूले वाली ये दवाएं बहुत शक्तिशाली हैं। इन्हें केवल विशेष क्लिनिकल स्थितियों में ही विशेषज्ञों की सलाह पर दिया जाना चाहिए। कॉस्मेटिक उद्देश्यों के लिए इनका स्वयं उपयोग करना मांसपेशियों की कमजोरी, दस्त, कब्ज और आंखों की समस्याओं को बुलावा देना है। जीवनशैली में सुधार ही स्थायी समाधान है।"


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Ramanjot

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