मोदी सरकार का बड़ा फैसला, अब जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में कोई भी खरीद सकता है जमीन

punjabkesari.in Tuesday, Oct 27, 2020 - 09:08 PM (IST)

जम्मू: आप जम्मू कश्मीर में घर बनाने के इच्छुक हैं तो आपके लिए यह खबर अहम हो सकती है। केन्द्र सरकार ने भारत के नागरिकों के लिए जम्मू कश्मीर के दरवाजें खोल दिये हैं। संविधान के अनुच्छेद 370 और ३५ए के निरस्त होने के एक साल बाद केंद्र सरकार ने कई कानूनों में संशोधन करके जम्मू-कश्मीर के बाहर के लोगों के लिए केंद्र शासित प्रदेश में जमीन खरीदने का मार्ग प्रशस्त कर दिया। इस संबंध में जारी एक राजपत्र अधिसूचना में, केंद्र ने केंद्र शासित प्रदेश में भूमि से संबंधित जम्मू-कश्मीर विकास अधिनियम की धारा १७ से "राज्य के स्थायी निवासी" वाक्यांश को हटा दिया है।

गौरतलब है कि पिछले साल अगस्त में अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद 35-ए को निरस्त करने से पहले, गैर-निवासी जम्मू-कश्मीर में कोई अचल संपत्ति नहीं खरीद सकते थे। हालांकि, ताजा बदलावों ने गैर-निवासियों के लिए केंद्र शासित प्रदेश में जमीन खरीदने का मार्ग प्रशस्त कर दिया है। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने संवाददाताओं से कहा कि इन संशोधनों में गैर-कृषकों को कृषि भूमि देने की अनुमति नहीं दी गई है।
 

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केन्द्र सरकार के आदेश के अनुसार भारत का कोई भी नागरिक जम्मू कश्मीर में बिना पीआरसी या फिर डोमिसाइल के भी जमीन खरीद सकता है। हांलाकि यह आदेश सिर्फ आवासीय भूमि के लिए है और कृषि भूमि पर लागू नहीं होता है। 5 अगस्त 2019 को भारत सरकार ने संसद में बिल पास कर धारा 370 और अनुच्छेद 35 ए को हटा दिया था और राज्य का बाइफिरकेशन कर दिया था। धारा 370 हटाने के दौरान कश्मीर के प्रमुख नेताओं को हिरासत में ले लिया गया था। हालांकि, कानून में कई छूट दी गई हैं जिसके तहत शैक्षणिक या स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं की स्थापना सहित गैर-कृषि उद्देश्यों के लिए कृषि भूमि दी जा सकती है। पूर्व महाधिवक्ता मोहम्मद इशाक कादरी ने कहा कि इन संशोधनों ने जम्मू-कश्मीर के बाहर के लोगों के लिए यहां भूमि खरीदने के लिए दरवाजे खोल दिए हैं। उन्होंने कहा,"बाहरी लोगों के यहां जमीन खरीदने पर कोई कानूनी रोक नहीं है।" नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने कहा कि संशोधन "अस्वीकार्य" है।

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क्या थी धारा370
धारा 370 जम्मू कश्मीर को एक विशेष दर्जा देती थी। जम्मू कश्मीर का अपना संविधान था। जम्मू कश्मीर का झंडा भी अपनाथा। केन्द्र से पारित कोई भीकानून जम्मू कश्मीर की विधानसभा में मंजूरी के बाद भी राज्य में लागू किया जाता था। जम्मू कश्मीर में इंडियन पिनल कोड नहीं बल्कि रनबीर पिनलकोड के तहत मामले दर्ज किये और सुलझाए जाते थे। जम्मू कश्मीर में भारत के बाहरी राज्यों को जमीन लेने या नौकरी पाने का अधिकार नहीं था। गृहमंत्री अमित शाह ने संसद में कहा था कि हालात सामान्य होनेपर जम्मूकश्मीर को उसका विशेष दर्जा वापस कर दिया जाएगा और लोग किसी तरह की अफवाहों पर यकीन न करें।
 


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Monika Jamwal

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