मृत्यु के समय ये 4 चीजें दिला सकती हैं नरक से छुटकारा, जानें गरुड़ पुराण की मान्यता
punjabkesari.in Thursday, Mar 05, 2026 - 06:56 PM (IST)
Garuda Purana Secrets: सनातन धर्म में 'गरुड़ पुराण' को मृत्यु और उसके बाद की यात्रा का सबसे प्रामाणिक मार्गदर्शक माना गया है। भगवान विष्णु और उनके वाहन पक्षीराज गरुड़ के संवाद पर आधारित यह ग्रंथ बताता है कि मनुष्य के कर्म ही उसके परलोक का मार्ग तय करते हैं। हालांकि, शास्त्रों में कुछ ऐसी विशेष वस्तुओं का उल्लेख भी है, जो यदि मृत्यु के समय व्यक्ति के सानिध्य में हों, तो वे आत्मा की राह सुगम बना देती हैं। मान्यता है कि मृत्यु के अंतिम क्षणों में इन पवित्र वस्तुओं की उपस्थिति से जीव को नरक के दुखों से मुक्ति और शुभ लोकों की प्राप्ति होती है।
1. गंगाजल: पापों का शमन और स्वर्ग की प्राप्ति
मृत्यु के समय मुख में गंगाजल डालना मोक्ष का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, मां गंगा भगवान विष्णु के चरणों से निकली हैं, इसलिए उनका जल परम पावन और पाप-नाशक है। माना जाता है कि जो व्यक्ति गंगाजल ग्रहण कर अपने प्राण त्यागता है, उसके जीवन भर के पाप धुल जाते हैं। ऐसी आत्मा को स्वर्ग लोक में स्थान प्राप्त होता है और परलोक की यात्रा शांत एवं बाधा रहित होती है।
2. तुलसी दल: यमदूतों के भय से मुक्ति
सनातन परंपरा में तुलसी को केवल पौधा नहीं, बल्कि साक्षात देवी का स्वरूप माना गया है। गरुड़ पुराण के अनुसार, जिस व्यक्ति के प्राण त्यागते समय शरीर के पास या मुख में तुलसी के पत्ते (तुलसी दल) होते हैं, उसकी आत्मा को यमलोक की कठोर यातनाएं नहीं सहनी पड़तीं। यही कारण है कि हिंदू धर्म में अंत समय में व्यक्ति को तुलसी के पौधे के पास लिटाने और उसके माथे या मुख पर तुलसी पत्र रखने की परंपरा सदियों से चली आ रही है।
3. कुशा घास: शुद्धता और शांति का प्रतीक
धार्मिक अनुष्ठानों और पवित्र कार्यों में कुशा घास का स्थान सर्वोपरि है। गरुड़ पुराण के अनुसार, कुशा की उत्पत्ति भगवान विष्णु के रोम से हुई है, इसलिए इसे अत्यंत पवित्र और ऊर्जावान माना गया है। ऐसी मान्यता है कि मृत्यु के अंतिम क्षणों में यदि व्यक्ति को कुशा की चटाई (आसन) पर लिटाया जाए, तो यह उसकी आत्मा को शांति प्रदान करती है।
4. काले तिल: नकारात्मक शक्तियों से सुरक्षा
तिल को अत्यंत पवित्र माना गया है और इसका सीधा संबंध भगवान विष्णु से जोड़ा जाता है। गरुड़ पुराण में उल्लेख है कि मृत्यु के समय काले तिल पास में रखने या इनका दान करने से आत्मा की सुरक्षा सुनिश्चित होती है। काले तिल नकारात्मक शक्तियों को मृत देह और आत्मा के पास आने से रोकते हैं। अंत समय में तिल का दान करने से यमलोक की यात्रा सुगम हो जाती है।
