Garud Puran: क्या सच में मौत के बाद भी 13 दिन आत्मा घर में रहती है? जानिए गरुड़ पुराण में तेरहवीं का रहस्य
punjabkesari.in Thursday, Apr 23, 2026 - 10:07 AM (IST)
Garud Puran: हिंदू धर्म के प्रमुख 18 महापुराणों में से एक गरुड़ पुराण माना जाता है, जिसमें जीवन, मृत्यु, कर्म और आत्मा की यात्रा से जुड़ी गहरी बातें बताई गई हैं। इस पुराण में बताया गया है कि मृत्यु के बाद आत्मा क्या अनुभव करती है, यमलोक की यात्रा कैसी होती है और कर्मों के अनुसार क्या परिणाम मिलते हैं।
Garud Puran भगवान विष्णु और उनके वाहन गरुड़ के बीच संवाद के रूप में वर्णित है। मान्यताओं के अनुसार, किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसकी आत्मा शरीर छोड़कर एक नई यात्रा पर निकलती है। इस यात्रा में आत्मा अपने कर्मों के आधार पर आगे का मार्ग तय करती है। कहा जाता है कि यमदूत आत्मा को यमलोक तक ले जाते हैं, जहां उसके अच्छे और बुरे कर्मों का लेखा-जोखा किया जाता है।
मृत्यु के बाद 13 दिन का क्या है रहस्य
गरुड़ पुराण में बताया गया है कि मृत्यु के बाद के पहले 13 दिन बहुत अहम होते हैं। मान्यता है कि इन 13 दिनों के दौरान आत्मा अपने घर और परिवार के आस-पास ही रहती है। आत्मा शरीर तो छोड़ देती है लेकिन वह अपने परिजनों की भावनाओं को महसूस करती है, लेकिन उनसे सीधे जुड़ नहीं पाती। धीरे-धीरे वह सांसारिक मोह से मुक्त होने की प्रक्रिया में चली जाती है।

तेरहवीं संस्कार का है कारण
मृत्यु के 13वें दिन किया जाने वाला तेरहवीं संस्कार आत्मा की अंतिम विदाई का प्रतीक माना जाता है। इस दिन विशेष पूजा और विधि द्वारा कर्मकांड किए जाते हैं ताकि आत्मा को शांति मिले और वह अपनी आगे की यात्रा के लिए तैयार हो सके।
क्यों किया जाता है पिंडदान ?
हिंदू मान्यताओं के अनुसार पिंडदान एक बड़ा धार्मिक कर्म है। इसे आत्मा को आगे की यात्रा के लिए ऊर्जा और सहारा देने वाला माना जाता है। ऐसा विश्वास है कि इससे आत्मा को परलोक में आगे बढ़ने में आसानी होती है।
