भगत सिंह पर चंद्रशेखर आजाद क्यों करते थे गुस्सा? जानें उनसे जुड़े अज्ञात तथ्य

9/28/2019 11:17:18 AM

देहरादून: भारत माता के सबसे लाडले पुत्र और उसे अंग्रेजों की गुलामी से मुक्ति दिलाने के लिए 23 बरस की छोटी सी उम्र में फांसी के फंदे पर झूलने वाले अमर शहीद भगत सिंह का आज जन्मदिन है। 27 सितंबर 1907 को अविभाजित पंजाब के लायलपुर (अब पाकिस्तान) में जन्मे भगत सिंह बहुत छोटी उम्र से ही आजादी की लड़ाई में शामिल हो गए और उनकी लोकप्रियता से भयभीत ब्रिटिश हुक्मरान ने 23 मार्च 1931 को 23 बरस के भगत को फांसी पर लटका दिया था। आइए जानते हैं भगत सिंह से जुड़े ऐसे कुछ तथ्यों के बारें में।

 

  • जलियावाला बाग हत्याकांड के समय भगत सिंह की उम्र सिर्फ 12 साल थी। इस घटना ने भगत सिंह को हमेशा के लिए क्रांतिकारी बना दिया।
     
  • जलियांवाला कांड के बाद जब वह 12 साल के थे, भगत सिंह 40 किलोमीटर पैदल गए थे। वहां से मिट्टी लेकर आए थ। रोज उसकी पूजा करते थ।
     
  • भगत सिंह शादी नहीं करना चाहते थे। जब उनके माता-पिता उनकी शादी की योजना बना रहे थे, वह इस बात से नाराज होकर घर छोड़कर कानपुर भाग गए थे। भगत सिंह तब कहा था अब तो आजादी ही मेरी दुल्हन बनेगी।
     
  • कॉलेज के दिनो में भगत सिंह एक अच्छे अभिनेता भी थे। उन्होने बहुत से नाटकों में हिस्सा लिया। भगत सिंह को कुश्ती का बहुत शौक था।
     
  • भगत सिंह ने अपने कॉलेज के दिनो में ‘National Youth Organisation‘  की स्थापना की थी।
     
  • भगत सिंह ने देश में हिन्दू-मुस्लिम दंगों से दु:खी होकर स्वयं को नास्तिक घोषित कर दिया था।
     
  • आजादी को लेकर भगत सिंह इतने जनूनी थे कि उन्होंने अंग्रेजों को चकमा देने के लिए उन्होंने अपना वेश बदल लिया था। भगत सिंह ने अपना वेश बदलने के लिए अपने बाल कटवा औरर दाढ़ी को भी साफ करवा लिया था।
     
  • भगत सिंह राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की अहिंसा की नीतियों से सहमत नहीं थे। उन्हें मानना था कि ब्रिटिश सरकार के खिलाफ बिना हथियार उठाए आजादी मिलना नामुमकिन है।
     
  • भगत सिंह और उनके साथियों ने जब सेंट्रल असेंबली में बम फेंके थे, वो निचले स्तर के विस्फोटक से बनाए गए थे। क्योंकि भगत सिंह का मकसद किसी को असेंबली में किसी को मारना नहीं, बल्कि अपना संदेश देना चाहते थे।
     
  • भगत सिंह ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ देशवासियों में जोश फूंकने के लिए च्इंकलाब जिंदाबाद जैसे नारे देश को दिए थे।
     
  • भगत सिंह और उसके साथियों को फांसी की सजा इसलिए सुनाई गई क्योकिं उन्होनें नेशनल असेम्बली में बम गिराया था।
     
  • भगत सिंह को फिल्में देखना और रसगुल्ले खाना बेहद पसंद था। उन्हें चार्ली चैप्लिन की फिल्में बहुत पसंद थी। भगत सिंह को जब भी समय मिलता वह अपने दोस्त राजगुरु और यशपाल के साथ फिल्म देखने चले जाते थे। आपको बता दें कि भगत सिंह कि इस आदत पर चंद्रशेखर आजाद बहुत गुस्सा होते थे।
     
  • भगत सिंह की शहादत के इतने सालों बाद भी उनके जूते, घड़ी और शर्ट को आज भी सुरक्षित रखा गया है।
     
  • आदेश के मुताबिक भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को 24 मार्च 1931 के दिन सुबह 8 बजे फांसी देना तय हुआ था, लेकिन अंग्रेजों ने भगत सिंह और अन्य क्रांतिकारियों की बढ़ती लोकप्रियता और 24 मार्च को होने वाले संभावित विद्रोह के कारण 23 मार्च को ही भगत सिंह और अन्य को फांसी दे दी।अंग्रेजों ने 23 मार्च 1931 को ही इन तीनों को देर शाम करीब सात बजे फांसी लगा दी। अंग्रेजों ने फांसी देने के बाद शव रिश्तेदारों को न देकर रातों रात ले जाकर व्यास नदी के किनारे जला दिए गए।
     
  • भगत सिंह की चिता एक बार नही बल्कि दो बार मुखाग्नि दी गई।  पहले अंग्रेजों ने उन्हें फांसी के बाद गुपचुप तरीके से उनके शव को जलाने की कोशिश की। लेकिन हंगामा होने के बाद अंग्रेज वहां से भग खड़ें हुए। जिसके बाद उनके परिजनों ने पूरे रीति-रिवाज के साथ रावी नदी के तट पर उनका अंतिम संस्कार किया।
     
  • भगत सिंह की अंतिम इच्छा थी कि उन्हें फांसी देकर नहीं बल्कि गोली मार कर मौत दी जाए, लेकिन, ब्रिटिश सरकार ने भगत सिंह की इस इच्छा को मानने से मना कर दिया।

Edited By

Anil dev

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