चीन में AI और बेरोजगारी का डबल अटैक! करोड़ों लोग छोड़ रहे नौकरी, गिग इकॉनमी बनी सहारा, बदलती रोजगार व्यवस्था ने बढ़ाई चिंता
punjabkesari.in Wednesday, Jul 08, 2026 - 06:13 PM (IST)
इंटरनेशनल डेस्क : चीन में कमजोर होते रोजगार बाजार, बढ़ती बेरोजगारी, रिकॉर्ड संख्या में स्नातकों की उपलब्धता और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते प्रभाव के कारण बड़ी संख्या में लोग स्थायी नौकरियां छोड़कर गिग इकॉनमी (अस्थायी या कॉन्ट्रैक्ट आधारित रोजगार) की ओर रुख कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव चीन की अर्थव्यवस्था और सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था के लिए दीर्घकालिक चुनौती बन सकता है।
टेक सेक्टर की नौकरी गंवाने के बाद टैक्सी चलाने को मजबूर
30 वर्षीय बाओ झांग ने इस वर्ष एक चीनी राइड-हेलिंग ऐप के लिए गाड़ी चलाना शुरू किया, जब उनकी सॉफ्टवेयर टेस्टर की नौकरी चली गई। उनका कहना है कि कमजोर जॉब मार्केट के कारण टेक सेक्टर में दोबारा नौकरी मिलने की उम्मीद बेहद कम है।
बाओ झांग ने कहा, "जो लोग पहले टैक्सी लेते थे, अब वही खुद टैक्सी चलाने को मजबूर हैं।" वह बीजिंग में सुबह 7 बजे से लेकर आधी रात तक काम करते हैं। वाहन का किराया और चार्जिंग का खर्च निकालने के बाद उनकी मासिक आय लगभग 6,000 युआन (885 डॉलर) रह जाती है।
320 मिलियन तक पहुंच सकती है फ्लेक्सिबल वर्कर्स की संख्या
थिंक टैंक 'चाइना न्यू एम्प्लॉयमेंट फॉर्म्स रिसर्च सेंटर' के अनुसार, इस वर्ष चीन में फ्लेक्सिबल एम्प्लॉयमेंट (बिना स्थायी फुल-टाइम कॉन्ट्रैक्ट वाली नौकरियां) करने वालों की संख्या 320 मिलियन तक पहुंच सकती है, जबकि 2025 में यह संख्या 280 मिलियन थी। यह संख्या लगभग अमेरिका की कुल आबादी के बराबर है और चीन की कुल कार्यशील आबादी का लगभग 44 प्रतिशत है।
गिग इकॉनमी बनी रोजगार का सहारा
विशेषज्ञों का कहना है कि चीन में गिग इकॉनमी रोजगार के लिए एक महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच बन गई है। प्रॉपर्टी संकट के कारण निर्माण क्षेत्र में नौकरियां लगातार कम हो रही हैं, जबकि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में ऑटोमेशन, लागत में कटौती, टैरिफ, अतिरिक्त उत्पादन क्षमता और कीमतों की प्रतिस्पर्धा के चलते कर्मचारियों की छंटनी बढ़ रही है।
अब शिक्षित युवा और व्हाइट-कॉलर कर्मचारी भी प्रभावित
गिग इकॉनमी में अब केवल ग्रामीण प्रवासी मजदूर ही नहीं, बल्कि बड़ी संख्या में शिक्षित युवा और व्हाइट-कॉलर कर्मचारी भी शामिल हो रहे हैं। घरेलू मांग में कमी और AI के बढ़ते इस्तेमाल के कारण इन वर्गों के लिए भी रोजगार के अवसर सीमित होते जा रहे हैं।
हांगकांग पॉलिटेक्निक यूनिवर्सिटी में कल्चरल एंथ्रोपोलॉजी के विशेषज्ञ यांग झान ने कहा, "यह अनुपात बहुत अधिक है। अब यह केवल गांवों से आए मजदूरों तक सीमित नहीं है, बल्कि मिडिल क्लास और यूनिवर्सिटी ग्रेजुएट्स तक भी फैल चुका है।" उन्होंने कहा कि चीन मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को अपग्रेड कर रहा है, जिससे बड़ी संख्या में रोजगार देने वाले कई उद्योग धीरे-धीरे समाप्त हो रहे हैं। इसके अलावा AI का प्रभाव भी रोजगार पर पड़ रहा है। चीन के मानव संसाधन मंत्रालय और स्टेट काउंसिल इंफॉर्मेशन ऑफिस ने इस विषय पर टिप्पणी के अनुरोध का तत्काल कोई जवाब नहीं दिया।
सोशल सिक्योरिटी सिस्टम पर बढ़ सकती है चुनौती
विशेषज्ञों का कहना है कि गिग नौकरियों में सोशल इंश्योरेंस में योगदान देना अनिवार्य नहीं होता। ऐसे में इस तरह के रोजगार बढ़ने से पहले से दबाव झेल रही चीन की सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था के सामने दीर्घकालिक चुनौती खड़ी हो सकती है।
2035 तक पेंशन फंड खत्म होने की आशंका
चाइनीज़ एकेडमी ऑफ सोशल साइंसेज की वर्ष 2019 की रिपोर्ट में चेतावनी दी गई थी कि बढ़ती बुजुर्ग आबादी के कारण 2035 तक राष्ट्रीय पेंशन फंड समाप्त हो सकता है। वहीं, 2024 के अपडेट में कहा गया कि सेवानिवृत्ति की आयु बढ़ाने से यह संकट आठ से नौ वर्ष तक टल सकता है।
सरकारी सलाहकारों ने सुझाए समाधान
सरकार के एक सलाहकार ने कहा कि गिग सेक्टर में आय और रोजगार दोनों अस्थिर होते हैं, इसलिए इस समस्या का समाधान आसान नहीं होगा। उन्होंने सुझाव दिया कि बेहतर रोजगार पैदा करने के लिए औपचारिक सेवा क्षेत्र (Formal Service Sector) को अधिक समर्थन दिया जाना चाहिए।
एक अन्य सरकारी सलाहकार ने कहा कि गिग वर्कर्स, जिनमें बड़ी संख्या ग्रामीण प्रवासी मजदूरों की है, पर अतिरिक्त टैक्स लगाना उचित नहीं होगा। उनके अनुसार, बच्चों के जन्म पर सब्सिडी जैसी योजनाएं दीर्घकालिक समाधान हो सकती हैं।
सोशल इंश्योरेंस से दूरी बना रहे गिग वर्कर्स
रॉयटर्स द्वारा बातचीत किए गए 12 फ्लेक्सिबल वर्कर्स में केवल दो ने बताया कि वे स्वेच्छा से सोशल इंश्योरेंस में योगदान दे रहे हैं। दो अन्य ने कहा कि वे गिग कार्य के साथ-साथ अपनी पार्ट-टाइम स्थायी नौकरी के माध्यम से भुगतान करते हैं, जबकि बाकी लोगों ने बताया कि वे स्वयं बचत करना बेहतर समझते हैं।
स्वास्थ्य और भविष्य दोनों चिंता का विषय
लंबे समय तक ट्रैफिक में वाहन चलाने के कारण बाओ झांग को टखनों और घुटनों में लगातार दर्द रहता है, लेकिन उन्होंने मेडिकल इंश्योरेंस नहीं लिया है। उनका कहना है कि पेंशन अभी बहुत दूर की बात है और भविष्य में मिलने वाली राशि भी बहुत कम होगी।
अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है असर
HSBC एशिया के अर्थशास्त्री फ्रेडरिक न्यूमैन ने कहा कि गिग नौकरियों में वह वेतन और सामाजिक सुरक्षा नहीं मिलती जिसकी अधिकांश चीनी नागरिक अपेक्षा करते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि इसका असर उपभोक्ता खर्च और आर्थिक विकास दोनों पर पड़ सकता है। न्यूमैन ने कहा, "एक पूरी नई पीढ़ी ऐसी सुरक्षा और भरोसे के बिना बड़ी हो रही है, जिसका लाभ उनके माता-पिता लंबे समय तक उठाते रहे हैं।"
सोशल सिक्योरिटी योजनाओं में भागीदारी अब भी कम
दिसंबर 2025 की सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, 2024 के अंत तक शहरी कर्मचारी पेंशन योजना में केवल 7.06 करोड़ फ्लेक्सिबल वर्कर्स शामिल थे। यह योजना सेवानिवृत्ति के बुनियादी लाभों के अलावा अतिरिक्त सुविधाएं भी प्रदान करती है। अधिकांश प्रवासी श्रमिक केवल बेसिक पेंशन योजना में सीमित योगदान करते हैं, जिसमें मासिक भुगतान 163 युआन तक कम हो सकता है।
पेकिंग यूनिवर्सिटी द्वारा 30,000 डिलीवरी वर्कर्स पर किए गए एक सर्वेक्षण में पाया गया कि 10 प्रतिशत से भी कम कर्मचारी अनिवार्य सोशल सिक्योरिटी योगदान का समर्थन करते हैं, क्योंकि इसके लिए उनकी आय का लगभग 10 प्रतिशत हिस्सा देना पड़ता है।
