कर्मियों की छुट्टी कर AI को बनाया स्टोर का बॉस, मचा बवाल तो कंपनी ने पकड़ लिए कान, कहा- गलती हो गई...इंसान ही अच्छे
punjabkesari.in Wednesday, Aug 05, 2026 - 05:43 PM (IST)
Washington: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI को लेकर लगातार यह दावा किया जा रहा है कि आने वाले समय में यह इंसानों के कई काम संभाल सकता है। लेकिन अगर किसी पूरे कारोबार की कमान ही AI को सौंप दी जाए तो क्या वह उसे सफलतापूर्वक चला पाएगा? इसी सवाल का जवाब तलाशने के लिए अमेरिकी AI कंपनी Anthropic ने एक अनोखा प्रयोग किया। कंपनी ने अपने सैन फ्रांसिस्को ऑफिस में एक छोटे से ऑटोमेटेड स्टोर की जिम्मेदारी Claude मॉडल पर आधारित AI एजेंट को सौंप दी। इस AI एजेंट का नाम रखा गया ‘Claudius’। उसे स्टोर में सामान चुनने, सप्लायर तलाशने, स्टॉक संभालने, कीमत तय करने और ग्राहकों से बातचीत तक की जिम्मेदारी दी गई।
प्रयोग की शुरुआत में Claudius ने कई काम ठीक तरीके से किए। उसने नए सप्लायर तलाशे और ग्राहकों की पसंद के हिसाब से अलग-अलग उत्पाद स्टोर में उपलब्ध कराने की कोशिश की। लेकिन कुछ समय बाद उसकी कारोबारी समझ की सीमाएं सामने आने लगीं। एक कर्मचारी ने मजाक में टंगस्टन क्यूब खरीदने की इच्छा जताई। AI ने इस बात को गंभीरता से ले लिया और स्टोर के लिए बड़ी संख्या में टंगस्टन क्यूब मंगाने की कोशिश शुरू कर दी। यही नहीं, Claudius ने कुछ उत्पादों की कीमत उनकी खरीद लागत से भी कम रख दी। यानी बिक्री होने के बावजूद स्टोर को फायदा होने के बजाय नुकसान उठाना पड़ा।
ग्राहकों को खुश करने में मुनाफा भूला AI
Claudius की सबसे बड़ी समस्या यह सामने आई कि वह ग्राहकों को खुश करने और कारोबार के मुनाफे के बीच सही संतुलन नहीं बना पाया। कई मौकों पर ग्राहकों के दबाव में AI ने अतिरिक्त छूट देने की पेशकश कर दी। कुछ मामलों में उसने सामान मुफ्त में देने तक की बात कह दी। कारोबारी नजरिए से यह फैसला स्टोर के लिए नुकसानदेह था। यानी AI ग्राहक की मांग को समझ तो रहा था, लेकिन हर बार यह नहीं समझ पा रहा था कि ग्राहक को खुश करने के साथ-साथ कंपनी का मुनाफा बचाना भी जरूरी है।
प्रयोग के दौरान Claudius की एक और अजीब गलती सामने आई। AI ने भुगतान के लिए एक ऐसे Venmo अकाउंट की जानकारी दे दी, जो वास्तव में मौजूद ही नहीं था। यह घटना इस बात का उदाहरण बनी कि AI कभी-कभी आत्मविश्वास के साथ ऐसी जानकारी भी दे सकता है, जिसका वास्तविक दुनिया में कोई अस्तित्व नहीं होता। कारोबारी माहौल में ऐसी गलती गंभीर समस्या पैदा कर सकती है। प्रयोग का सबसे दिलचस्प हिस्सा तब सामने आया जब Claudius ने खुद को एक वास्तविक स्टोर कर्मचारी की तरह पेश करना शुरू कर दिया। उसने दावा किया कि वह ग्राहकों तक सामान पहुंचाएगा और इसके लिए नीली जैकेट और लाल टाई पहनेगा। जब कर्मचारियों ने उसे याद दिलाया कि वह एक AI मॉडल है और उसका कोई भौतिक शरीर नहीं है, तो बातचीत और भी अजीब हो गई। Anthropic ने इस घटना को AI के एक तरह के ‘identity crisis’ के रूप में दर्ज किया।
कंपनी ने मानी गलती
प्रयोग के पहले चरण के नतीजों ने खुद Anthropic को भी सोचने पर मजबूर कर दिया। कंपनी ने माना कि अगर उस समय उसे अपना स्टोर चलाने के लिए किसी व्यक्ति या सिस्टम को चुनना होता, तो वह Claudius को मैनेजर के रूप में नहीं चुनती। हालांकि, कंपनी ने यह भी माना कि AI की कई गलतियां सिर्फ AI की क्षमता की समस्या नहीं थीं। बेहतर टूल्स, स्पष्ट निर्देश, मजबूत सिस्टम डिजाइन और मानवीय निगरानी से उसके प्रदर्शन में सुधार किया जा सकता है।
दूसरे चरण में बदला AI का प्रदर्शन
कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। Anthropic ने बाद में Project Vend का दूसरा चरण शुरू किया। इसमें ज्यादा सक्षम Claude मॉडल के साथ बेहतर इन्वेंटरी और ग्राहक-ट्रैकिंग टूल्स का इस्तेमाल किया गया। इस बार AI एजेंट ने पहले चरण के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया और स्टोर मुनाफे में भी गया। इससे यह संकेत मिला कि AI को सिर्फ जिम्मेदारी सौंप देना पर्याप्त नहीं है। उसे सही डेटा, बेहतर टूल्स, स्पष्ट सीमाएं और लगातार निगरानी देना भी उतना ही जरूरी है।Project Vend का सबसे बड़ा सबक यह नहीं है कि AI कारोबार नहीं चला सकता।
असली सबक यह है कि AI को पूरी आजादी देकर काम कराने और उसे सही सिस्टम व मानवीय निगरानी के साथ काम कराने में जमीन-आसमान का अंतर है। AI तेजी से डेटा का विश्लेषण कर सकता है, ग्राहकों से बातचीत कर सकता है, सप्लायर खोज सकता है और कई प्रक्रियाओं को ऑटोमेट कर सकता है। लेकिन कारोबार में सिर्फ डेटा और जवाब देना ही काफी नहीं होता।मुनाफा, ग्राहक व्यवहार, जोखिम, बदलती परिस्थितियां और लंबे समय की कारोबारी रणनीति जैसे मामलों में AI को अभी भी मजबूत सिस्टम और इंसानी निगरानी की जरूरत पड़ती है।
