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Fact Check: कोरोना को लेकर WHO ने 3 दिन में 3 बयानों से फैलाई सनसनी, अब सामने आया सच (Video)

2020-08-01T15:43:58.973

इंटरनेशनल डेस्कः कोरोना वायरस महामारी फैलने को लेकर वैज्ञानिकों द्वारा नित नए दावे किए जा रहे हैं। पूरी दुनिया के लोगों की नजरें कोरोना से संबंधित हर खबर पर टिकी रहती हैं। इस बीच विश्व स्वास्थय संगठन (WHO) द्वारा हैरान करने वाला दावा सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। WHO का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है जिसमें  महामारी विशेषज्ञ डॉ. मारिया वेन ने कहा ने कहा था, दुनिया में कोरोना मामले बढ़ने की वजह एसिम्प्टोमैटिक यानि बिना लक्षण वाले मरीज नहीं हैं । कोरोना तकनीकी प्रमुख डा. मारिया वान केरखोव इस बयान वाले वीडियो  को यूट्यूब 50,000  से ज्यादा बार देखा जा चुका है ।  

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WHO के इस बयान के बाद पूरी दुनिया के वैज्ञानिकों के अलावा लोगों में भी सनसनी फैल गई थी । लेकिन फैक्ट चैक करने पर इस वीडियो का सच सामने आ गया। वायरल क्लिप 9 जून को WHO द्वारा आयोजित एक प्रेस ब्रीफिंग का हिस्सा है। पूरी ब्रीफिंग देखने पर पता चला कि WHO ने अपने इस बयान पर स्पष्टीकरण दिया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 24 घंटे के अंदर अपने उस बयान पर सफाई दी जिसमें उसने कहा था कि बिना लक्षण वाले मरीज से कोरोना वायरस नहीं फैलता। ऐसे मामले दुर्लभ हैं। दुनियाभर में वैज्ञानिकों ने इस बात पर सवाल उठाए तो  WHO की महामारी विशेषज्ञ डॉ. मारिया वेन ने  सफाई देते हुए कहा, यह एक गलतफहमी थी।

3 दिन में 3 बयान जिनसे फैली सनसनी
8 जून को WHO  की महामारी विशेषज्ञ डॉ. मारिया वेन ने कहा, एसिम्प्टोमैटिक मरीजों से भी संक्रमण फैल सकता है, लेकिन दुनिया में जिस तरह मामले बढ़ रहे हैं उसकी वजह ये मरीज नहीं हैं। उन्होंने कहा कि खासकर युवाओं और दूसरे स्वस्थ लोगों में इस संक्रमण के लक्षण नजर नहीं आते या बहुत हल्के होते हैं। अभी हमारा फोकस केवल लक्षण वाले मरीजों पर है।


9 जून को डॉ. मारिया वेन ने कहा, मैंने 'बेहद दुर्लभ' शब्द का इस्तेमाल किया, वह एक गलतफहमी थी। अभी हमारे पास इसका कोई जवाब नहीं है। मैं उस समय प्रेस कॉन्फ्रेंस में सवालों का जवाब दे रही थी। मैं वह बताने की कोशिश कर रही थी जो समझ पा रही थी। मैंने ऐसा हालिया सामने आईं रिसर्च के आधार पर बोला था।

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10 जून को WHO  के डायरेक्टर जनरल टेड्रोस अधानोम ने पूरे मामले पर सफाई  देते हुए कहा, अभी इस पर और रिसर्च की जाने की जरूरत है। कोरोना का वायरस नया है। संगठन इससे हर समय कुछ न कुछ सीख रहा है। वायरस से जुड़ी जटिल चीजों को समझना आसान नहीं है लेकिन यह हमारी ड्यूटी है। हम हमेशा बेहतर कर सकते हैं।


WHO पर दुनियाभर के नामी वैज्ञानिकों ने उठाए सवाल 
डॉ. एंथनी फौसीः अमेरिका के जाने माने संक्रमण रोग विशेषज्ञ डॉ. एंथनी फौसी ने इस मामले में कहा कि डब्ल्यूएचओ गलत था। वह अपने बयान से पलटा क्योंकि उसके बाद अपनी बात को साबित करने का कोई प्रमाण या मामले नहीं थे। डॉ. एंथनी के मुताबिक, हमारे पास प्रमाण हैं कि कोरोना के कुल मरीजों में 25 से 45 फीसदी ऐसे हैं जिनमें लक्षण नहीं दिखते हैं। ये स्वस्थ लोगों को संक्रमित कर सकते हैं। 

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प्रो. लियाम स्मिथः लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसिन के महामारी रोग विशेषज्ञ प्रो. लियाम स्मिथ का कहना है कि यह बात विज्ञान को लेकर मेरी समझ के विपरीत है। ऐसे मरीज जिनमें लक्षण नहीं दिखते उनसे भी दूसरों में संक्रमण फैल सकता है।

 
डॉ. कीथ नेलः ब्रिटेन यूनिवर्सिटी के महामारी विशेषज्ञ डॉ. कीथ नेल का कहना है, एसिम्प्टोमैटिक मरीजों से कोरोना फैलता है या नहीं यह बड़ा सवाल है जिसका स्पष्टतौर पर जवाब नहीं है। लेकिन जिन्हें लक्षणों का पता चल जाता है वो तो संक्रमण फैलने के लिए जिम्मेदार हैं। उन्हें तत्काल जांच की जरूरत है।


Tanuja

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