बैटरी खत्म होने का टेंशन खत्म! अब गूगल प्ले स्टोर देगा चेतावनी, देखें कैसे करेगा काम
punjabkesari.in Monday, Mar 09, 2026 - 05:46 PM (IST)
नेशनल डेस्क: स्मार्टफोन यूजर्स की सबसे बड़ी परेशानियों में से एक है फोन की बैटरी का जल्दी खत्म होना। अक्सर इसके पीछे ऐसे एप्स होते हैं जो हम डाउनलोड कर लेते हैं, लेकिन वे बैकग्राउंड में लगातार चलते रहते हैं और बैटरी तेजी से खर्च कर देते हैं। इस समस्या को देखते हुए गूगल अब ऐसे एप्स पर सख्ती करने जा रहा है। गूगल जल्द ही प्ले स्टोर पर उन एप्स के पेज पर चेतावनी लेबल दिखाएगा जो जरूरत से ज्यादा बैटरी खपत करते हैं। इसका मकसद यूजर्स को पहले से जानकारी देना है ताकि वे सोच-समझकर एप डाउनलोड करें।
बैकग्राउंड में एक्टिव रहने वाले एप्स को चिन्हित किया जाएगा
गूगल उन एप्स की पहचान करेगा जो फोन की स्क्रीन बंद होने के बाद भी लंबे समय तक बैकग्राउंड में सक्रिय रहते हैं। अगर कोई एप जरूरत से ज्यादा बैटरी खर्च करता पाया गया, तो उसे प्ले स्टोर पर एक खास चेतावनी लेबल के साथ दिखाया जाएगा।
‘वेक लॉक’ तकनीक से होगी पहचान
ऐसे एप्स को पहचानने के लिए गूगल वेक लॉक (Wake Lock) मैकेनिज्म का इस्तेमाल करेगा। यह तकनीक फोन की स्क्रीन बंद होने के बाद भी CPU को चालू रखती है। कुछ जरूरी काम जैसे म्यूजिक प्ले करना या लोकेशन ट्रैक करना इसी तकनीक से चलते हैं। लेकिन यदि कोई एप जरूरत से ज्यादा समय तक इसका इस्तेमाल करता है, तो वह बैटरी जल्दी खत्म कर सकता है।
बैटरी खपत का लेबल कैसे तय होगा
गूगल के अनुसार, अगर कोई एप पिछले 28 दिनों में स्क्रीन ऑफ होने के बाद भी 5 प्रतिशत से ज्यादा समय तक बैकग्राउंड में एक्टिव रहता है, तो उसे ‘खराब बर्ताव’ वाली कैटेगरी में रखा जाएगा। ऐसे एप्स पर प्ले स्टोर में चेतावनी दिखाई जाएगी, जिससे यूजर्स पहले ही जान सकें कि यह एप बैकग्राउंड में बैटरी ज्यादा खर्च करता है।
सिर्फ चेतावनी ही नहीं, मिल सकती है सजा
गूगल सिर्फ चेतावनी देने तक ही सीमित नहीं रहेगा। जिन एप्स की बैटरी खपत बहुत ज्यादा होगी, उन्हें प्ले स्टोर की सिफारिशों से हटाया भी जा सकता है। इसका मतलब है कि ऐसे एप्स अब कम दिखाई देंगे और डाउनलोड होने की संभावना भी कम हो जाएगी।
यूजर्स और डेवलपर्स के लिए फायदे
इस कदम से एंड्रॉयड यूजर्स को कई फायदे मिलेंगे: वे ऐसे एप्स डाउनलोड करने से बच सकेंगे जो फोन की बैटरी जल्दी खत्म करते हैं। डेवलपर्स पर दबाव बनेगा कि वे अपने एप्स को बेहतर तरीके से ऑप्टिमाइज करें। इससे यूजर्स को बेहतर बैटरी लाइफ और स्मूद परफॉर्मेंस मिलेगी।
