अब 1 मिनट में पता चलेगा पानी साफ है या नहीं, स्मार्टफोन करेगा टेस्ट...वैज्ञानिकों ने किया बड़ा आविष्कार

punjabkesari.in Thursday, Apr 16, 2026 - 12:02 PM (IST)

नेशनल डेस्क: दुनिया के कई हिस्सों में आज भी लोग ऐसे पानी के स्रोतों पर निर्भर हैं, जिनकी शुद्धता को लेकर पूरी तरह भरोसा नहीं किया जा सकता। ऐसे में पानी की जांच बेहद जरूरी हो जाती है, लेकिन पारंपरिक तरीके अक्सर जटिल, महंगे और समय लेने वाले होते हैं। अब वैज्ञानिकों ने एक नई तकनीक विकसित की है, जिससे स्मार्टफोन की मदद से कुछ ही सेकंड में पानी की गुणवत्ता का पता लगाया जा सकता है।

कैसे काम करती है यह तकनीक?
इस नई प्रणाली में एक विशेष प्रकार की टेस्ट स्ट्रिप का उपयोग किया जाता है। जब इस स्ट्रिप पर पानी की एक बूंद डाली जाती है, तो यह उसमें मौजूद अशुद्धियों के संकेतों पर प्रतिक्रिया देती है। खास तौर पर यह यूरोबिलिन नामक पदार्थ की पहचान करती है, जो आमतौर पर मानव या पशुओं के अपशिष्ट से जुड़ा होता है। यदि पानी में यह तत्व पाया जाता है, तो यह दूषित होने का स्पष्ट संकेत माना जाता है।


स्मार्टफोन से कैसे होती है पहचान?
इस सिस्टम में स्मार्टफोन के साथ एक छोटा सा अटैचमेंट जोड़ा जाता है जिसमें LED लाइट होती है। जैसे ही टेस्ट स्ट्रिप पर रिएक्शन होता है उसमें हल्की चमक पैदा होती है। फोन का कैमरा इस चमक को कैप्चर करता है और तुरंत उसका विश्लेषण करके बता देता है कि पानी सुरक्षित है या नहीं। इस पूरे प्रोसेस को ड्रॉप एंड डिटेक्ट कहा जाता है क्योंकि इसमें सिर्फ एक बूंद पानी की जरूरत होती है।


पुराने तरीकों से कितना अलग है?
अब तक पानी की जांच के लिए प्रयोगशालाओं, रसायनों और विशेषज्ञों की आवश्यकता होती थी, और परिणाम आने में कई घंटे या कभी-कभी पूरा दिन लग जाता था। इसके विपरीत, यह नई तकनीक तेज, सरल और उपयोग में आसान है। इसे नदी के पानी और वेस्टवॉटर प्लांट के नमूनों पर भी परखा गया है, जहां इसने विश्वसनीय परिणाम दिए हैं।


कहां होगा सबसे ज्यादा फायदा?
यह तकनीक खासतौर पर उन क्षेत्रों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है, जहां लैब सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। ग्रामीण इलाकों, आपदा प्रभावित क्षेत्रों और विकासशील देशों में लोग खुद ही तुरंत पानी की जांच कर सकेंगे और सुरक्षित पानी का उपयोग सुनिश्चित कर पाएंगे।


भविष्य में क्या बदलाव हो सकते हैं?
यह खोज दिखाती है कि कैसे स्मार्टफोन और नई तकनीक मिलकर बड़े बदलाव ला सकते हैं। आने वाले समय में इसी तरह के सिस्टम अन्य प्रदूषकों की पहचान के लिए भी विकसित किए जा सकते हैं जिससे पानी की जांच और भी आसान और सुलभ हो जाएगी।


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Content Editor

Mansa Devi

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