पितृ पक्ष में शादी की शॉपिंग करना शुभ है या अशुभ? जानें क्या कहते हैं धार्मिक नियम
punjabkesari.in Saturday, Sep 12, 2026 - 08:01 AM (IST)
Wedding Shopping in Pitru Paksha : पितृ पक्ष 27 सितंबर 2026 से शुरू हो रहे हैं, ये पितरों को याद करने का समय होता है। घर में शादी ब्याह का माहौल हो, तो महीनों पहले से ही कपड़ों, गहनों और घरेलू सामान की खरीदारी शुरू हो जाती है। ऐसे में यद् शादी की तैयारियों के बीच पितृ पक्ष आ जाए, तो अक्सर लोगों के मन में संशय पैदा हो जाता है कि इस दौरान खरीदारी जारी रखनी चाहिए या रोक देनी चाहिए। तो आइए जानते हैं कि पितृ पक्ष में शादी की खरीदारी को लेकर क्या है विशेष नियम।

पितृ पक्ष में खरीदारी को लेकर क्या कहता है धर्मशास्त्र?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितृ पक्ष के 16 दिन हमारे पूर्वजों को याद करने, उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और तर्पण-श्राद्ध करने के लिए समर्पित होते हैं। पितृ पक्ष को वैराग्य और संयम की अवधि माना गया है। इसलिए इस दौरान सगाई, शादी, मुंडन या गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य और नया वाहन या मकान खरीदना वर्जित माना जाता है। जहां तक शादी के लिए कपड़ों, सोने-चांदी के आभूषणों या अन्य सामान की खरीदारी का सवाल है, तो पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार इस दौरान नए वस्त्र और आभूषण खरीदने से बचना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि पितृ पक्ष में खरीदी गई नई वस्तुएं पूर्वजों के प्रति ध्यान भटकाती हैं।
क्या खरीदारी पर पूरी तरह रोक है?
यदि शादी की तिथि पितृ पक्ष के तुरंत बाद है और सामान खरीदना अत्यंत आवश्यक है, तो खरीदारी की जा सकती है। इसे पितरों की प्रसन्नता और उनके आशीर्वाद के रूप में देखा जाना चाहिए कि वे परिवार को नए जीवन की शुरुआत के लिए समृद्ध कर रहे हैं। पितृ पक्ष के दौरान पड़ने वाले शुभ योगों में खरीदारी करना दोषमुक्त माना जाता है। पितृ पक्ष के दौरान खरीदी गई किसी भी वस्तु का उपयोग पितृ पक्ष समाप्त होने और शारदीय नवरात्रि शुरू होने के बाद ही करना चाहिए।
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