Bhadrapad Amavasya 2026: भाद्रपद अमावस्या पर घर बैठे करें पितरों का तर्पण, जानें पितृ दोष से मुक्ति पाने का आसान नियम
punjabkesari.in Friday, Sep 11, 2026 - 01:23 AM (IST)
Bhadrapad Amavasya 2026: सनातन धर्म में भाद्रपद अमावस्या का विशेष महत्व माना गया है। साल 2026 में यह पावन तिथि 11 सितंबर को पड़ रही है, जिसे कुशाग्रहणी अमावस्या और पिठोरी अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन पितरों को प्रसन्न करने के लिए किया गया तर्पण व्यक्ति को पितृ दोष से मुक्ति दिलाता है और जीवन में आ रही तमाम परेशानियों व रुकावटों का अंत करता है। यदि आप भी भाद्रपद अमावस्या पर अपने घर में ही विधि-विधान से पितरों का तर्पण करना चाहते हैं, तो इस विधि से करें-

पिता का तर्पण
दूध, तिल और जौ मिला हुआ जल लेकर, अपने गोत्र का नाम लेते हुए “गोत्रे अस्मतपिता (पिता का नाम) शर्मा वसुरूपत तृप्यतमिदं तिलोदकम गंगा जलं वा तस्मै स्वधा नमः, तस्मै स्वधा नमः, तस्मै स्वधा नमः”
मंत्र का 3 बार उच्चारण करते हुए पिता को जलांजलि दें।
पितामह का तर्पण
उपरोक्त बताई गई सामग्री को जल में मिलाकर अपने गोत्र का नाम लेते हुए “गोत्रे अस्मत्पितामह (पितामाह का नाम) शर्मा वसुरूपत तृप्यतमिदं तिलोदकम गंगा जलं वा तस्मै स्वधा नमः, तस्मै स्वधा नमः, तस्मै स्वधा नमः”
मंत्र बोलते हुए 3 बार पितामाह को जलांजलि दें।

माता का तर्पण
हाथ में जल लेकर अपने गोत्र का नाम लेते हुए “गोत्रे अस्मन्माता (माता का नाम) देवी वसुरूपास्त तृप्यतमिदं तिलोदकम
गंगा जलं वा तस्मै स्वधा नमः, तस्मै स्वधा नमः, तस्मै स्वधा नमः”
मंत्र बोल कर 16 बार पूर्व दिशा में, 7 बार उत्तर दिशा में तथा 14 बार दक्षिण दिशा में जलांजलि दें।
दादी का तर्पण
उपरोक्त बताई गई विधि को दोहराते हुए अपने गौत्र का नाम लें और “गोत्रे पितामा (दादी का नाम) देवी वसुरूपास्त तृप्यतमिदं तिलोदकम गंगा जलं वा तस्मै स्वधा नमः, तस्मै स्वधा नमः, तस्मै स्वधा नमः”
मंत्र बोल कर जितनी बार हो सके जाप करते हुए जलांजलि दें।

