रांधण छठ पर क्यों नहीं जलता चूल्हा, जानिए इस अनोखी परंपरा के पीछे की धार्मिक मान्यता
punjabkesari.in Wednesday, Sep 02, 2026 - 11:45 AM (IST)
Why Stove Not Lit Randhan Chhath : रांधण छठ भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की छठी तिथि को मनाया जाता है। रांधण छठ का पर्व खासतौर पर गुजरात और पश्चिमी भारत में लोकप्रिय है। रांधण छठ का पर्व माता शीतला को समर्पित है। यह त्योहार शीतला सातम से ठीक एक दिन पहले दिन पड़ता है। इस पर्व पर महिलाएं परिवार की सुख समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना से पूजा करती हैं। इस दिन घरों में चूल्हा नहीं जलाया जाता है और बासी भोजन करने की एक अनोखी परंपरा है, जिसके पीछे गहरे और धार्मिक कारण छिपे हैं। तो आइए जानते हैं कि इस दिन ठंडा भोजन और चूल्हा न जलाने का धार्मिक रहस्य
ठंडा भोजन और चूल्हा न जलाने का धार्मिक रहस्य
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रांधण छठ के अगले दिन यानी शीतला सातम को शीतला माता घर-घर भम्रण करती हैं और चूल्हे में आराम करती हैं। माना शीतला को शांति और शीतलता प्रिय है। यदि सातम के दिन चूल्हा जालाया जाए, तो उससे उत्पन्न होने वाली अग्नि और ताप से माता नाराज हो सकती हैं। इसीलिए रांधण छठ की रात को ही सारा भोजन पका लिया जाता है और सातम के दिन चूल्हा पूरी तरह ठंडा रखा जाता है।
रांधण छठ के दिन क्या किया जाता है?
रांधण छठ वाले दिन महिलाएं रसोई की अच्छी तरह सफाई करती हैं और पूरे अगले दिन के लिए तरह-तरह के पकवान जैसे थेपला, पूरी, खाकरा, मिष्ठान और सब्जियां तैयार कर लेती हैं। रात को खाना बनाने के बाद रसोई और चूल्हे की सफाई की जाती है। इसके बाद चूल्हे पर छाछ या जल छिड़ककर उसे ठंडा किया जाता है और उसकी पूजा की जाती है।
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