राधाष्टमी पर क्यों चढ़ाते हैं राधा रानी को 16 श्रृंगार? जानें इसके पीछे की धार्मिक मान्यता
punjabkesari.in Friday, Sep 11, 2026 - 11:00 AM (IST)
Radhashtami 2026 : हिंदू धर्म में राधाष्टमी का बहुत खास महत्व है। हर साल भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को राधाष्टमी का पावन पर्व मनाया जाता है। इस साल राधाष्टमी का पर्व 19 सितंबर, 2026 को मनाया जाएगा। इस विशेष दिन पर ब रसाने और पूरे ब्रजमंडल में श्री राधा रानी का भव्य अभिषेक किया जाता है और उन्हें 16 श्रृंगार अर्पित किए जाते हैं। माना जाता है कि राधा रानी को 16 श्रृंगार चढ़ाने के पूछे गहरा रहस्य और धार्मिक महत्व है। तो आइए जानते हैं राधा रानी को 16 श्रृंगार चढ़ाने की प्रमुख मान्यताएं के बारे में-
राधाष्टमी पर 16 श्रृंगार चढ़ाने की प्रमुख मान्यताएं
पूर्णता और सौभाग्य का प्रतीक
सनातन धर्म में 16 श्रृंगार को नारी के अखंड सौभाग्य, रूप और पूर्णता का प्रतीक माना गया है। राधा जी साक्षात मां लक्ष्मी का ही स्वरूप हैं। उन्हें 16 श्रृंगार अर्पित करने से वे प्रसन्न होकर साधक को सुख, समृद्धि और अखंड सौभाग्य का वरदान देती हैं।
श्री कृष्ण की प्रसन्नता
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, राधा रानी का रूप और उनका श्रृंगार भगवान श्री कृष्ण को अत्यंत प्रिय है। मान्यता है कि जब राधा जी पूर्ण श्रृंगार में होती हैं, तो श्री कृष्ण अति आनंदित होते हैं। इसलिए भक्त श्री कृष्ण की विशेष कृपा पाने के लिए राधाष्टमी पर राधा रानी का पूर्ण श्रृंगार करते हैं।
16 कलाओं का प्रतिनिधित्व
चंद्रमा की 16 कलाएं होती हैं और भगवान श्री कृष्ण को भी 16 कलाओं से पूर्ण माना जाता है। राधा रानी को 16 श्रृंगार अर्पित करना उनकी दिव्य 16 कलाओं और संपूर्णता को नमन करने का एक भावुक तरीका है।
भक्ति और समर्पण का भाव
16 श्रृंगार केवल शारीरिक रूप-सज्जा नहीं, बल्कि जीवात्मा का परमात्मा के प्रति समर्पण दर्शाते हैं। बिंदी, सिंदूर, काजल, हार, पायल, मेहंदी, और चूड़ियों जैसी हर सामग्री प्रेम और भक्ति के अलग-अलग रंगों को उजागर करती है।
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