Shravan 2026 Guide: शुरु हुआ सावन की भक्ति का सफर, भोले बाबा की कृपा और आध्यात्मिक ऊर्जा के संगम में ऐसे जगाएं अपना शिवत्व, जानें शुभ तिथियां और महत्व
punjabkesari.in Friday, Jul 31, 2026 - 10:31 AM (IST)
Shravan 2026 Guide: भारतीय संस्कृति में पर्वों की विविधता ही इसकी प्राणवायु है, जहां वर्ष का हर दिन किसी न किसी व्रत या उत्सव से जुड़ा होता है। इसी पावन शृंखला में श्रावण मास का स्थान सर्वोपरि है, जिसे आध्यात्मिक विकास, आत्म-अनुशासन और आंतरिक शुद्धि का स्वर्णिम काल माना गया है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यह वही मास है जब मार्कंडेय ऋषि ने अपनी तपस्या से शिव की कृपा पाई और महादेव ने हलाहल विष पीकर सृष्टि की रक्षा की थी। प्रकृति के सौंदर्य और शिव भक्ति के इस अनूठे मेल में, सावन केवल एक महीना नहीं बल्कि स्वयं को शिवत्व से जोड़ने का एक माध्यम है।

पर्वों की विविधता ही भारतीय संस्कृति का प्राणतत्व है। वर्ष का प्रत्येक दिन किसी न किसी पर्व, उपवास और व्रत से जुड़ा हुआ है। पर्वों की इसी पावन शृंखला में हमारे आध्यात्मिक शास्त्रों में श्रावण मास का भी महत्वपूर्ण स्थान है। सनातन धर्म के अनुयायियों के लिए श्रावण मास धार्मिक, आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत पावन माना गया है। प्रकृति का कण-कण इस श्रावण मास में सौंदर्य, नव उल्लास और ऊर्जा से परिपूरित होता है।
श्रावण मास आध्यात्मिक विकास, आत्म अनुशासन और आंतरिक शुद्धि का समय है। पौराणिक ग्रन्थों में श्रावण का महीना विशेष रूप से भगवान शिव की आराधना को समर्पित है। मार्कंडेय ऋषि ने इसी मास में दीर्घायु के लिए घोर तप करके भगवान शिव की कृपा प्राप्त की थी।
समुद्र मंथन की घटना भी इसी मास में हुई थी जब समुद्र मंथन से निकले हलाहल विष को भगवान शंकर ने अपने कंठ में समाहित कर देवताओं की रक्षा की थी इसलिए भगवान शिव को ‘नीलकंठ’ भी कहा जाता है।
शिव के उपासक कांवड़ यात्रा के द्वारा गंगाजल भगवान शिव को अर्पित करते हैं। बच्चे, युवा, यहां तक कि महिलाएं भी बड़ी दूर-दूर से पैदल चलकर इस पावन श्रावण मास में शिव को जल अर्पित करते हैं। इस अवसर पर रुद्राभिषेक के माध्यम से शिवत्व की साधना विशेष रूप से कल्याणकारी मानी गई है। जहां रुद्राभिषेक होता है, वहां प्रकृति भी कल्याणकारी बन जाती है।
इस संसार में सकारात्मक और नकारात्मक दोनों प्रकार की शक्तियां विद्यमान हैं। श्रावण मास के सात्विक वातावरण में शिव आराधना मनुष्य को शरीर, मन और आत्मा से पुष्टता प्रदान करती है।
यह अवसर आध्यात्मिक शुद्ध भक्ति और रूपांतरण का है। यह आस्था, भक्ति और श्रद्धा की ही शक्ति है जो भक्तों को नई ऊर्जा प्रदान करके शिवत्व की ओर खींच कर ले जाती है। हमारे वैदिक ग्रन्थों में भी श्रावण मास को आध्यात्मिक ज्ञान के श्रवण, चिंतन, मनन का समय माना गया है। प्राचीन काल में वर्षा ऋतु के दौरान ऋषियों के आश्रमों में रहकर लोग शास्त्रों के गूढ़ रहस्य को इस महीने में आत्मसात किया करते थे।
श्रावण का यह पावन महीना भक्ति, अनुष्ठानों, सांस्कृतिक उत्सवों के मिश्रण के साथ-साथ गहन आध्यात्मिक अनुभूति की स्वर्णिम अवधि है। यह मास आत्म अनुशासन और उपासना के माध्यम से शिवत्व से जुड़ने का समय है।
सावन महीने की तिथियां
सावन महीने की शुरुआत 30 जुलाई 2026 (गुरुवार) से होगी और इसका समापन 28 अगस्त, 2026 (शुक्रवार) को श्रावण पूर्णिमा के दिन होगा। हालांकि, सावन की प्रतिपदा तिथि 29 जुलाई की रात से शुरू हो जाएगी, लेकिन हिंदू पंचांग में सूर्योदय के समय की तिथि (उदयातिथि) को मान्यता दी जाती है इसलिए सावन का पहला दिन 30 जुलाई माना जाएगा।
इसी दिन से श्रद्धालु व्रत और भगवान शिव की विशेष पूजा शुरू करेंगे। 28 अगस्त को सावन पूर्णिमा के साथ-साथ रक्षाबंधन का पर्व भी मनाया जाएगा।

कितने सावन सोमवार होंगे इस बार?
सावन महीने में आने वाले सोमवार भगवान शिव को समर्पित होते हैं। इस दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु सावन सोमवार व्रत रखते हैं और शिव मंदिरों में जाकर जलाभिषेक व पूजा करते हैं। अबकी बार 4 सावन सोमवार पड़ेंगे:
3 अगस्त : पहला सावन सोमवार
10 अगस्त : दूसरा सावन सोमवार
17 अगस्त : तीसरा सावन सोमवार
24 अगस्त : चौथा सावन सोमवार
श्रद्धा और विधि-विधान से सावन सोमवार का व्रत रखने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं, सुख-समृद्धि आती है और वैवाहिक जीवन में खुशहाली बनी रहती है।

मंगला गौरी व्रत
सावन का महीना भगवान शिव के साथ-साथ माता पार्वती की पूजा के लिए भी बेहद शुभ माना जाता है। इस महीने के हर मंगलवार को विवाहित महिलाएं मंगला गौरी व्रत रखती हैं। यह व्रत पति की लंबी उम्र, परिवार की सुख-समृद्धि और दांपत्य जीवन में प्रेम व सौहार्द की कामना के लिए किया जाता है।
मंगला गौरी व्रत इन तारीखों पर पड़ेंगे
4 अगस्त, 11 अगस्त, 18 अगस्त, 25 अगस्त। मान्यता है कि पूरे विश्वास और श्रद्धा से यह व्रत करने पर वैवाहिक जीवन में प्रेम, विश्वास और खुशहाली बनी रहती है।

शुरू होगी कांवड़ यात्रा
सावन महीने की शुरुआत के साथ ही देश की सबसे बड़ी धार्मिक यात्राओं में से एक कांवड़ यात्रा भी शुरू हो जाती है। इस दौरान लाखों शिवभक्त, जिन्हें कांवड़िया कहा जाता है, हरिद्वार, गंगोत्री और सुल्तानगंज जैसे पवित्र स्थानों से गंगाजल लेकर पैदल यात्रा करते हैं। इसके बाद वे भगवान शिव के मंदिरों में पहुंचकर शिवलिंग का जलाभिषेक करते हैं।

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Content Writer
Niyati Bhandari