Sawan Somwar Vrat Dates 2026: 30 जुलाई से शुरू होगा सावन, नोट कर लें सोमवार व्रत की तारीखें और शुभ योग
punjabkesari.in Friday, Jul 17, 2026 - 03:22 PM (IST)
Sawan Somwar Vrat Dates 2026: हिंदू धर्म में सबसे पवित्र माने जाने वाले महीनों में से एक 'सावन' का इंतजार शिव भक्तों को बेसब्री से रहता है। वर्ष 2026 में शिव उपासना का यह पावन महीना 30 जुलाई से शुरू होने जा रहा है, जो 28 अगस्त को सावन पूर्णिमा के साथ समाप्त होगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन के महीने में भगवान भोलेनाथ की विधि-विधान से पूजा और जलाभिषेक करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

क्यों खास है सावन का महीना?
पौराणिक कथा के अनुसार राक्षसों एवं देवताओं के मध्य हुए समुद्र मंथन में जो 14 रत्न निकले थे उनमें विष भी था जिसे न देवता लेना चाहते थे और न राक्षस। भगवान भोले नाथ भंडारी ने उस विष को सावन के महीने में सोमवार के दिन अपने कंठ में धारण कर सृष्टि एवं मानव जाति की रक्षा की। विष की उष्णता को शांत करने के लिए देवताओं ने उनका जलाभिषेक किया, तभी से सावन में शिव जी को जल अर्पित करने की परंपरा चली आ रही है।
सावन सोमवार व्रत की तारीखें
सावन के महीने में सोमवार के व्रत का विशेष महत्व बताया गया है। इस साल सावन में कुल चार सोमवार आएंगे:
पहला सावन सोमवार: 3 अगस्त 2026
दूसरा सावन सोमवार: 10 अगस्त 2026
तीसरा सावन सोमवार: 17 अगस्त 2026
चौथा और अंतिम सोमवार: 24 अगस्त 2026
पहले सोमवार पर बन रहा है दुर्लभ संयोग
सावन माह का पहला सोमवार 3 अगस्त को है। जो विशेष रूप से फलदायी रहने वाला है। इस रोज उत्तरभाद्रपदा और रेवती नक्षत्र के साथ सुकर्मा और धृति योग का अद्भुत संयोग बनने जा रहा है। ज्योतिष विद्वानों के अनुसार, इन शुभ योगों में किए गए रुद्राभिषेक और महामृत्युंजय मंत्र के जाप का पुण्य अन्य दिनों से कई गुना अधिक प्राप्त होता है।

सावन सोमवार के दिन करें ये काम
सुबह-सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि कर स्वच्छ कपड़े पहनें।
आसपास कोई मंदिर है तो वहां जाकर भोलेनाथ के शिवलिंग पर जल व दूध अर्पित करें।
भोलेनाथ के सामने आंखें बंद कर शांति से बैठें और व्रत का संकल्प लें।
दिन में दो बार सुबह और शाम को भगवान शंकर व मां पार्वती की अर्चना जरूर करें।
भगवान शंकर के सामने तिल के तेल का दीया प्रज्ज्वलित करें और फल व फूल अर्पित करें।
ॐ नमः शिवाय मंत्र का उच्चारण करते हुए भगवान शंकर को सुपारी, पंचामृत, नारियल व बेल की पत्तियां चढ़ाएं।
सावन सोमवार व्रत कथा का पाठ करें और दूसरों को भी व्रत कथा सुनाएं। पूजा का प्रसाद वितरण करें और शाम को पूजा कर व्रत खोलें।
बिल्वपत्र भोले नाथ पर सदैव उल्टा रखकर अर्पित करें।
शिव जी के साथ पार्वती जी पूजा अवश्य करें तभी पूर्ण फल मिलेगा।
पूजन करते वक्त रूद्राक्ष की माला अवश्य धारण करें।

