पितृ पक्ष में महालक्ष्मी व्रत: स्वर्ग से धरती पर उतरे ऐरावत की कथा और 16 श्रृंगार की गुप्त विधि, दीपावली से पहले घर में भरें धन के भंडार!

punjabkesari.in Wednesday, Sep 30, 2026 - 11:40 AM (IST)

Pitru Paksha Mahalakshmi Vrat Katha: ज्योतिषशास्त्र एवं धर्मशास्त्रों के पंचांग अनुसार, आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को प्रदोष काल में महालक्ष्मी व्रत और गजलक्ष्मी पूजन का विशेष विधान है। इस पावन अवसर पर हाथी पर सवार देवी गजलक्ष्मी की पूजा-अर्चना की जाती है, जिससे साधक को देवी की अक्षय कृपा, सुख और समृद्धि प्राप्त होती है।

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Story of Airavat Elephant महाभारत कालीन पौराणिक कथा: जब अर्जुन स्वर्ग से लाए ऐरावत
महालक्ष्मी व्रत का पौराणिक महत्व महाभारत काल से चला आ रहा है। कथा के अनुसार, हस्तिनापुर की महारानी गांधारी ने नगर की सभी स्त्रियों को महालक्ष्मी पूजन के लिए आमंत्रित किया, लेकिन देवी कुंती को छोड़ दिया। कौरवों ने बहुत सी मिट्टी लाकर एक सुंदर हाथी बनाया और उसे महल के मध्य स्थापित किया।

जब अन्य स्त्रियां गांधारी के महल जाने लगीं, तो देवी कुंती अत्यंत उदास हो गईं। यह देख अर्जुन ने अपनी माता से कहा कि वे लक्ष्मी पूजन की तैयारी करें, वे उनके लिए साक्षात जीवित हाथी लाएंगे। इसके बाद अर्जुन स्वर्गलोक जाकर अपने पिता इंद्र से दिव्य ऐरावत हाथी ले आए। कुंती ने सप्रेम पूजन किया। जब गांधारी और कौरवों को पता चला कि कुंती के यहां स्वयं ऐरावत पधारे हैं, तो उन्होंने कुंती से क्षमा मांगी और गजलक्ष्मी के ऐरावत का पूजन किया।

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गजलक्ष्मी पूजन की प्रामाणिक विधि
प्रातः स्नान व संकल्प: सुबह स्नान करने से पूर्व हरी दूर्वा को अपने पूरे शरीर पर घिसें और स्नान के पश्चात व्रत का संकल्प लें।
चौकी स्थापना: संध्या के समय लकड़ी की चौकी पर श्वेत रेशमी कपड़ा बिछाकर देवी गजलक्ष्मी यंत्र स्थापित करें।
अखंड ज्योति व अभिषेक: कलश पर अखंड ज्योति स्थापित करें और यंत्र को पंचामृत से स्नान कराकर सोलह प्रकार (षोडशोपचार) से पूजन करें।
भोग व दिशा नियम: देवी को सफेद दूध की बर्फी, मेवा, मिठाई और मीठे रोट का भोग लगाएं। पूजन के समय देवी का मुख उत्तर दिशा में तथा व्रतियों का मुख पश्चिम दिशा की ओर होना चाहिए।

6 बोल की पवित्र कथा
महालक्ष्मी व्रत में 16 पकवानों का भोग लगाया जाता है और सोलह बोल की कथा को 16 बार कहने का विधान है। कथा के बाद चावल या गेहूं छोड़े जाते हैं।

सोलह बोल की कथा के मूल बोल:
"अमोती दमो तीरानी, पोला पर ऊचो सो परपाटन गांव जहां के राजा मगर सेन दमयंती रानी, कहे कहानी। सुनो हो महालक्ष्मी देवी रानी, हम से कहते तुम से सुनते सोलह बोल की कहानी॥"

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16 श्रृंगार का दान और पीला कलावा
पूजा सामग्री: चंदन, ताल, पत्र, पुष्पमाला, अक्षत, दूर्वा, लाल सूत, सुपारी और नारियल रखें।
16 गांठे: पीले कलावे में 16 गांठें लगाकर लक्ष्मी जी को अर्पित करें।
श्रृंगार दान: पूजन के पश्चात 16 वस्तुएं (चुनरी, सिंदूर, लिपस्टिक, रिबन, कंघी, शीशा, बिछिया, नथ, फल, मिठाई, मेवा, लौंग, इलायची, वस्त्र, रुमाल, श्रीफल आदि) किसी ब्राह्मणी (विप्र पत्नी) को दान करें। दान के बाद वही 16 गांठों वाला पीला कलावा ब्राह्मणी द्वारा घर के सभी सदस्यों की कलाई पर बंधवाया जाता है।

दीपावली के लिए मां लक्ष्मी को आमंत्रण व सिद्ध मंत्र
चंद्रमा के निकलने पर तारों को अर्घ्य दें। इसके पश्चात उत्तर दिशा की ओर मुंह करके पति-पत्नी एक-दूसरे का हाथ थामकर देवी महालक्ष्मी को आगामी दीपावली पर अपने घर आने के लिए तीन बार आग्रह करें।

सिद्ध गजलक्ष्मी मंत्र:
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं गजलक्ष्म्यै नमः॥

Pitru Paksha Mahalakshmi Vrat

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Content Writer

Niyati Bhandari

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