Paush Purnima 2026: क्या पौष पूर्णिमा पर लगेगा चंद्र ग्रहण? जानें साल के पहले Chandra Grahan की पूरी जानकारी
punjabkesari.in Friday, Jan 02, 2026 - 10:57 AM (IST)
Paush Purnima 2026: हिंदू पंचांग में पूर्णिमा तिथि का विशेष धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व होता है। जब भी पूर्णिमा आती है, लोगों के मन में सबसे पहला प्रश्न यही होता है कि क्या इस दिन चंद्र ग्रहण लगेगा या नहीं। वर्ष 2026 में पौष पूर्णिमा 3 जनवरी को मनाई जाएगी। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि क्या इस दिन चंद्र ग्रहण है और अगर नहीं, तो साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण कब लगेगा।

क्या पौष पूर्णिमा 2026 पर चंद्र ग्रहण लगेगा?
शास्त्रों और खगोलीय गणनाओं के अनुसार 3 जनवरी 2026, पौष पूर्णिमा के दिन कोई भी चंद्र ग्रहण नहीं लग रहा है इसलिए इस दिन गंगा स्नान, नदी स्नान निसंकोच किया जा सकता है। दान, पूजा, व्रत और धार्मिक अनुष्ठान पूर्ण रूप से शुभ हैं। माता शाकंभरी जयंती और पौष पूर्णिमा के सभी पुण्य कर्म बिना किसी बाधा के किए जा सकते हैं। यह स्पष्ट समझना जरूरी है कि चंद्र ग्रहण हमेशा पूर्णिमा पर ही लगता है लेकिन हर पूर्णिमा पर ग्रहण हो, यह आवश्यक नहीं।
चंद्र ग्रहण क्यों माना जाता है अशुभ? (धार्मिक + वैज्ञानिक दृष्टि)
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण काल में नकारात्मक ऊर्जा सक्रिय हो जाती है इसलिए शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं। वहीं वैज्ञानिक दृष्टि से देखें तो चंद्र ग्रहण एक खगोलीय घटना है, जिसमें पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है। भारत में ग्रहण दिखाई देने पर ही सूतक काल मान्य होता है। मंदिरों के कपाट बंद किए जाते हैं।
साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण कब लगेगा? (Chandra Grahan 2026 Date)
वर्ष 2026 का पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च 2026 को लगेगा, जो होली (होलिका दहन) के दिन होगा। यह पूर्ण चंद्र ग्रहण (खग्रास) होगा और भारत में दिखाई देगा, इसलिए इसका सूतक काल मान्य रहेगा।

3 मार्च 2026 चंद्र ग्रहण का समय (भारत – नई दिल्ली अनुसार)
चंद्र ग्रहण प्रारंभ (चंद्रोदय के साथ): 06:26 पी.एम
चंद्र ग्रहण समाप्त: 06:46 पी.एम
कुल अवधि: लगभग 20 मिनट
सूतक काल प्रारंभ: सुबह 09:39 ए.एम
सूतक समाप्त: 06:46 पी.एम
पौष पूर्णिमा 2026 (3 जनवरी) पूरी तरह शुभ है, कोई ग्रहण नहीं है। स्नान-दान, पूजा और धार्मिक कार्य निडर होकर करें। साल का पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च 2026 को लगेगा, जो भारत में दिखाई देगा। धर्म और विज्ञान दोनों को समझकर ही सही निर्णय लेना ही सनातन परंपरा की सच्ची पहचान है।

