Dhundiraj Chaturthi 2026 : आज एक छोटी सी गलती बप्पा को कर सकती है नाराज, जानें क्या न करें ?
punjabkesari.in Saturday, Feb 21, 2026 - 11:45 AM (IST)
शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ
Dhundiraj Chaturthi 2026 : सनातन धर्म में भगवान गणेश को प्रथम पूज्य माना गया है। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत हो या जीवन के संकटों का निवारण, विघ्नहर्ता श्री गणेश का स्मरण सबसे पहले किया जाता है। माघ मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को ढुंढिराज चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है। आज 21 फरवरी को यह व्रत रखा जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ढुंढिराज गणेश की आराधना उन लोगों के लिए विशेष फलदायी है जो जीवन में सही मार्ग की खोज कर रहे हैं। चाहे वह ज्ञान की खोज हो, करियर की राह हो या मोक्ष का मार्ग बप्पा अपने भक्तों का मार्गदर्शन करते हैं। इस दिन व्रत रखने और विधि-विधान से पूजन करने पर बुद्धि, समृद्धि और सुख की प्राप्ति होती है।
बप्पा को भोग लगाने की सही विधि और नियम
गणेश जी को लम्बोदर कहा जाता है क्योंकि उन्हें भोजन अत्यंत प्रिय है लेकिन उन्हें भोग लगाने का एक व्यवस्थित तरीका है, जिससे वे शीघ्र प्रसन्न होते हैं।
प्रिय भोग: मोदक और लड्डू
बप्पा को मोदक सबसे अधिक प्रिय हैं। शास्त्रों के अनुसार, मोदक 'ज्ञान' का प्रतीक है। यदि मोदक उपलब्ध न हों, तो शुद्ध घी से बने बेसन या मोतीचूर के लड्डू का भोग लगाएं।
लड्डू
गणपति बप्पा को लड्डू बहुत प्रिय माने जाते हैं। खासतौर पर बेसन या बूंदी से बने लड्डू उनका पसंदीदा भोग माने जाते हैं। प्रेम और भक्ति से अर्पित किए गए लड्डू भगवान को अति प्रिय होते हैं।
दूर्वा घास
गणेश जी की पूजा में दूर्वा का विशेष महत्व है। मान्यता है कि 21 दूर्वा अर्पित करने से भगवान शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्त की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।
नारियल
नारियल को पवित्रता और शुभता का प्रतीक माना जाता है। किसी भी मांगलिक कार्य की तरह गणेश पूजा में भी नारियल चढ़ाना शुभ फलदायी माना जाता है।
गुड़ और चना
यदि आप सरल और सात्विक भोग लगाना चाहते हैं, तो गुड़ और चना भी अर्पित कर सकते हैं। यह साधारण होते हुए भी बेहद पवित्र माना जाता है और बप्पा को प्रिय है।
भोग लगाने का सही तरीका:
भोग हमेशा शुद्ध घी में और स्नानादि के बाद पवित्र मन से बनाना चाहिए।
संभव हो तो भोग लगाने के लिए पीतल या तांबे के बर्तनों का उपयोग करें। मिट्टी के पात्र भी उत्तम माने जाते हैं।
भोग अर्पण करने से पहले पात्र के चारों ओर जल का घेरा बनाएं और शुद्धिकरण करें।
बिना दूर्वा के बप्पा का भोग अधूरा माना जाता है। भोग की थाली में हमेशा ताजी दूर्वा रखें।
भोग लगाते समय इस मंत्र का जाप करें:
नैवेद्यं गृह्यतां देव भक्तिं मे ह्यचलां कुरु। ईप्सितं मे वरं देहि परत्र च शुभां गतिम्॥
आज के दिन भूलकर भी न करें ये गलतियां
चंद्र दर्शन से बचें
चतुर्थी तिथि पर चंद्रमा को देखना वर्जित माना गया है। पौराणिक कथा के अनुसार, जब चंद्रमा ने गणेश जी के स्वरूप का उपहास किया था, तब बप्पा ने उन्हें श्राप दिया था कि जो भी इस दिन चांद देखेगा, उस पर झूठा कलंक लगेगा। यदि गलती से चांद दिख जाए, तो 'स्यमंतक मणि' की कथा सुननी चाहिए।
तुलसी दल का प्रयोग वर्जित
भगवान गणेश की पूजा में तुलसी का प्रयोग वर्जित है। पौराणिक कथा के अनुसार, गणेश जी ने तुलसी देवी के विवाह प्रस्ताव को ठुकरा दिया था, जिसके बाद तुलसी ने उन्हें श्राप दिया और बप्पा ने उन्हें अपनी पूजा से बाहर कर दिया। बप्पा को केवल दुर्वा ही प्रिय है।
क्रोध और विवाद से दूरी
गणेश जी शांति और धैर्य के प्रतीक हैं। आज के दिन घर में क्लेश करना, अपशब्द बोलना या किसी का अपमान करना बप्पा को अत्यंत अप्रिय है। यदि आप व्रत रख रहे हैं, तो मन को शांत रखें।
