Chandra Grahan 2026: 3 मार्च को साल का पहला चंद्र ग्रहण, भारत में सिर्फ 25 मिनट दिखेगा, जानें सूतक काल और समय

punjabkesari.in Monday, Feb 23, 2026 - 07:21 AM (IST)

Chandra Grahan 2026: साल 2026 का पहला और सबसे लंबी अवधि तक चलने वाला चंद्र ग्रहण 3 मार्च, मंगलवार को लगेगा। ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस दिन चंद्रमा सिंह राशि में संचार करेंगे। यह ग्रहण भारत में आंशिक रूप से दिखाई देगा, इसलिए देश में सूतक काल मान्य रहेगा। आइए जानते हैं चंद्र ग्रहण का सटीक समय, भारत में दृश्यता और सूतक से जुड़े नियम।

PunjabKesari Chandra Grahan 2026

चंद्र ग्रहण 2026 का समय
ग्रहण प्रारंभ:
दोपहर 3:20 बजे
खग्रास (पूर्ण चरण) प्रारंभ: शाम 4:34 बजे
ग्रहण समाप्ति: शाम 6:47 बजे

खग्रास वह स्थिति होती है जब चंद्रमा पूर्ण रूप से पृथ्वी की छाया में आ जाता है। इस बार ग्रहण की कुल अवधि लगभग 3 घंटे 27 मिनट रहेगी।

भारत में कब और कितनी देर दिखेगा चंद्र ग्रहण?
भारत में चंद्रोदय 3 मार्च को शाम 6:22 बजे होगा। चूंकि ग्रहण का समापन 6:47 बजे है, इसलिए भारत में यह ग्रहण लगभग 25 मिनट तक ही दिखाई देगा।

हालांकि चंद्रोदय का समय अलग-अलग शहरों में कुछ मिनटों का अंतर लिए हो सकता है। राजधानी दिल्ली में चंद्रोदय लगभग 6:22 बजे होगा, इसलिए वहां ग्रहण सीमित समय के लिए दृश्य रहेगा।

PunjabKesari Chandra Grahan 2026

सूतक काल कब से शुरू होगा?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चंद्र ग्रहण का सूतक ग्रहण लगने से 9 घंटे पहले शुरू हो जाता है।
सूतक प्रारंभ: सुबह 6:20 बजे (3 मार्च 2026)
सूतक समाप्ति: ग्रहण समाप्ति के साथ, शाम 6:47 बजे
चूंकि यह ग्रहण भारत में दिखाई देगा, इसलिए सूतक काल मान्य रहेगा।

सूतक काल में क्या न करें?
शास्त्रों के अनुसार सूतक के दौरान कुछ कार्य वर्जित माने जाते हैं:
कोई भी शुभ या मांगलिक कार्य न करें।
मंदिर में स्थापित भगवान की मूर्तियों को स्पर्श न करें।
भोजन न पकाएं और न ही ग्रहण करें (विशेषकर सूतक लगने के बाद)।
बाल और नाखून काटने से बचें।
गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।

क्या करें?
श्री हरि विष्णु और भगवान शिव का ध्यान करें।
मंत्र जाप, विशेषकर गायत्री मंत्र का जप करें।
ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान कर दान-पुण्य करें।
घर में गंगाजल का छिड़काव करें।

धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ग्रहण काल को संवेदनशील समय माना जाता है। चंद्रमा मन और भावनाओं का कारक है, इसलिए इस दौरान मानसिक संतुलन बनाए रखना और सकारात्मक सोच रखना आवश्यक माना जाता है। ग्रहण के बाद स्नान और दान करने से नकारात्मक प्रभाव कम होते हैं।

PunjabKesari Chandra Grahan 2026

शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ


सबसे ज्यादा पढ़े गए

Content Writer

Niyati Bhandari

Related News