Chandra Grahan Alert : चंद्रग्रहण में गर्भवती महिलाएं रखें खास ध्यान, इन कामों से रहें दूर
punjabkesari.in Thursday, Feb 26, 2026 - 04:12 PM (IST)
शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ
Chandra Grahan Alert : साल 2026 की शुरुआत एक बड़ी खगोलीय घटना के साथ हो रही है। 3 मार्च 2026 को लगने वाला पूर्ण चंद्र ग्रहण न केवल वैज्ञानिकों के लिए कौतूहल का विषय है, बल्कि ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यह विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं के लिए बेहद संवेदनशील समय माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं और आयुर्वेद के अनुसार, ग्रहण के दौरान निकलने वाली नकारात्मक किरणें गर्भ में पल रहे शिशु के स्वास्थ्य पर प्रभाव डाल सकती हैं। आइए जानते हैं कि इस चंद्र ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं को किन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए और किन कार्यों से दूरी बनानी चाहिए।
चंद्र ग्रहण 2026
नुकीली और धारदार वस्तुओं का प्रयोग न करें
यह सबसे महत्वपूर्ण नियम माना जाता है। ग्रहण काल के दौरान गर्भवती महिलाओं को चाकू, कैंची, सुई, ब्लेड या कटर जैसी नुकीली वस्तुओं का उपयोग बिल्कुल नहीं करना चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से शिशु के अंगों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। इस दौरान सिलाई-कढ़ाई या सब्जी काटना भी वर्जित है।
ग्रहण देखने से बचें
चंद्र ग्रहण कितना भी सुंदर क्यों न दिखे, गर्भवती महिलाओं को इसे सीधी आंखों से या बाहर निकलकर देखने से बचना चाहिए। ग्रहण की किरणों का सीधा संपर्क शिशु के मानसिक और शारीरिक विकास के लिए उचित नहीं माना जाता। कोशिश करें कि इस दौरान घर की खिड़कियों पर मोटे पर्दे डाल दें ताकि ग्रहण की रोशनी अंदर न आए।
भोजन और जल का सेवन
शास्त्रों के अनुसार ग्रहण काल में भोजन करना वर्जित है। हालांकि, गर्भवती महिलाओं की सेहत को देखते हुए इसमें कुछ छूट दी गई है: यदि बहुत आवश्यक हो, तो ही तरल पदार्थों का सेवन करें। खाने-पीने की सभी वस्तुओं में ग्रहण शुरू होने से पहले ही तुलसी के पत्ते डाल दें। माना जाता है कि तुलसी के पत्ते भोजन को अशुद्ध होने से बचाते हैं।
सोने की मुद्रा
गर्भवती महिलाओं को ग्रहण के दौरान सोने की मनाही होती है। यदि थकान महसूस हो, तो सीधे बैठकर आराम करें। मान्यता है कि ग्रहण के समय हाथ-पैर मोड़कर बैठने या सोने से शिशु के अंगों में खिंचाव या टेढ़ापन आ सकता है। हालांकि, यह पूरी तरह धार्मिक मान्यता पर आधारित है।
ग्रहण के दौरान क्या करें ?
मंत्र जाप: इस समय ॐ नमो भगवते वासुदेवाय या संतान गोपाल मंत्र' का मानसिक जाप करना अत्यंत शुभ होता है।
धार्मिक पुस्तकें: रामायण, गीता या हनुमान चालीसा का पाठ करें। इससे माता और शिशु दोनों को सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।
गेरू का प्रयोग: पेट पर गेरूका लेप लगाने की परंपरा है। माना जाता है कि गेरू एक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है और ग्रहण की किरणों को गर्भ तक पहुंचने से रोकता है।
