Motivational Story : ज्ञान का दीया या घमंड की आग? जानिए क्यों बिना विनम्रता के हर विद्या अधूरी है

punjabkesari.in Thursday, Mar 26, 2026 - 06:04 PM (IST)

Motivational Story : गंगा के किनारे एक ऋषि का आश्रम था, जहां अनेक शिष्य शिक्षा ग्रहण करते थे। उनमें से उनके दो प्रिय शिष्यों ने अपनी प्रतिभा के कारण बहुत ही कम समय में विद्वत्ता प्राप्त कर ली थी। कुछ ही समय में विद्वत्ता के घमंड में दोनों अभिमानी और ईर्ष्यालु बन गए। वे खुद को दूसरे से बड़ा दिखाने की ताक में रहते थे। एक दिन ऋषि गंगा स्नान करके लौटे तो उन्होंने देखा कि दोनों शिष्य आपस में झगड़ रहे हैं। वे दोनों एक-दूसरे को आश्रम की सफाई का आदेश दे रहे थे।

ऋषि ने उनसे झगड़ने का कारण पूछा, तो पहले शिष्य ने कहा, 'गुरुजी, मैं इससे हर विद्या और कला में श्रेष्ठ हूं। इसे मेरी हर बात माननी चाहिए। मैं इससे आश्रम की सफाई के लिए कह रहा हूं, पर यह मान ही नहीं रहा है। दूसरे शिष्य ने तुरंत जवाब दिया, 'गुरुजी, मैं क्यों आश्रम की सफाई करूं? मैं भी इससे किसी मामले में कम नहीं हूं।'

झगड़ा बढ़ते देख ऋषि ने कहा, 'तुम दोनों ठीक कह रहे हो। अब तुम दोनों इतने विद्वान और श्रेष्ठ हो कि सफाई जैसा छोटा काम तुम दोनों को शोभा नहीं देता। आज से आश्रम की सफाई मैं किया करूंगा।' यह कहते हुए ऋषि ने झाड़ू उठा लिया। गुरु को हाथ में झाड़ू उठाते देख दोनों शिष्यों को जैसे होश आया। उन्होंने तत्काल गुरु के हाथों से झाड़ू ली और अपने व्यवहार के लिए माफी मांगने लगे।

ऋषि बोले, 'पुत्रो, ज्ञान और कला प्राप्त कर उसमें निपुण होना बहुत अच्छी बात है, पर घमंड चाहे विद्या का हो या धन का, इंसान को ले डूबता है। अतः अहंकार से दूर रहना चाहिए।' ऋषि की बात से सहमत दोनों शिष्यों ने एक-दूसरे को गले लगाते हुए अहंकार त्यागने का वचन दिया।

शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ
 

 


सबसे ज्यादा पढ़े गए

Content Editor

Sarita Thapa

Related News