Nautapa 2026: मई में शुरू होगा नौतपा, रोहिणी नक्षत्र में सूर्य बरसाएंगे आग, जानें मानसून को लेकर क्या है ज्योतिषीय संकेत
punjabkesari.in Wednesday, May 06, 2026 - 01:02 AM (IST)
Nautapa 2026 Start Date: जेठ के महीने में जब सूर्य की तपिश अपने चरम पर होती है, तब प्रकृति हमें एक कड़े इम्तिहान के लिए तैयार करती है। साल 2026 में भी धरती 'नौतपा' की भीषण गर्मी से तपने के लिए तैयार है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, इस वर्ष 25 मई से नौतपा की शुरुआत होने जा रही है, जो अगले 9 दिनों तक यानी 2 जून तक रहेगी। जिससे आम जनजीवन प्रभावित होगा।

नौतपा के दौरान जितनी अधिक गर्मी पड़ती है, वर्षा के योग उतने बढ़िया बनते हैं। नवतपा की तपिश से विद्वान आने वाली बारिश की अटकले लगाते हैं।
ज्येष्ठ महीने का भारतीय संस्कृति और ज्योतिष शास्त्र में बहुत महत्व है। इसी महीने में बड़े मंगलवार भी आते हैं। इसी महीने सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते हैं और नौतपा शुरू हो जाता है, जिसकी अपनी एक अलग महत्ता है। वैसे तो नौतपा का पूरा सर्कल यानी गोचर 15 दिन का होता है लेकिन इसे नौतपा इसलिए कहा जाता है क्योंकि इन 9 दिन में धरती में प्रचंड गर्मी पड़ती है और देश के अनेक भागों में लू व धूल भरी आंधी चलती है। धरती का तापमान तेजी से बढ़ जाता है और गर्मी अपने पूरे तेवर दिखाना शुरू कर देती है।
वर्ष 2026 में गर्मी का प्रकोप झुलसा देगा। ये अच्छी वर्षा की तरफ इशारा करता है। कुछ स्थानों पर वेग से आंधी आने के भी योग हैं। अन्य दिनों में रिमझिम-रिमझिम पानी की बूंदों से मौसम काफी सुहाना रहेगा। किसानों के लिए ऐसा मौसम किसी बहार से कम नहीं होगा। अच्छे खाद्यान्न उत्पादन के योग हैं।

नौतपा के दौरान करें ये काम
जल दान- धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दान का महत्व हर धर्म में बताया गया है, लेकिन नौतपा के दौरान जल का दान विशेष रूप से फलदायी माना जाता है। इस अवधि में तेज धूप और लू के कारण लोगों को अधिक प्यास लगती है। ऐसे में जरूरतमंदों को पानी पिलाना एक बड़ा पुण्य कार्य माना गया है। राह चलते लोगों को ठंडा पानी पिलाना, सार्वजनिक स्थानों पर पानी की व्यवस्था करना, प्यासे को पानी देने से कभी इन्कार न करना। ये सभी कार्य मानवीय सेवा के साथ-साथ धार्मिक दृष्टि से भी शुभ माने जाते हैं।
मेंहदी लगाना- नौतपा के दिनों में महिलाओं द्वारा हाथ-पैरों में मेंहदी लगाने की परंपरा भी लंबे समय से चली आ रही है। मान्यता है कि मेंहदी की तासीर ठंडी होती है, जो शरीर को गर्मी से राहत देती है। पुरानी परंपराओं के अनुसार मेंहदी शरीर के तापमान को संतुलित करने में मदद करती है। तेज धूप और लू के असर को कम करने में सहायक होती है। इससे त्वचा को ठंडक और आराम मिलता है।

