Mahalaxmi Vrat Udyapan : 3 अक्टूबर को महालक्ष्मी व्रत का समापन, जानें उद्यापन की संपूर्ण विधि और पूजा के नियम

punjabkesari.in Thursday, Oct 01, 2026 - 09:01 AM (IST)

Mahalaxmi Vrat Udyapan : भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से शुरू होने वाले 16 दिवसीय महालक्ष्मी व्रत का समापन अब करीब आ चुका है। इस साल 3 अक्टूबर 2026 को महालक्ष्मी व्रत का अंतिम दिन है और इसी दिन व्रत का  उद्यापन किया जाएगा। माना जाता है कि जो व्यक्ति 16 दिनों तक मां लक्ष्मी का यह व्रत रखते हैं और अंतिम दिन पूरे विधि-विधान से उद्यापन करते हैं, उनके जीवन में  धन-धान्य, वैभव और खुशहाली की कमी नहीं होती है। यदि आपने भी यह व्रत रखा है, तो बिना उद्यापन के इस व्रत का पूरा फल प्राप्त नहीं होता। तो आइए जानते हैं महालक्ष्मी व्रत के उद्यापन की सही विधि और इस दिन पालन  किए जाने वाले नियम के बारे में-

Mahalaxmi Vrat Udyapan

उद्यापन पूजा विधि
3 अक्टूबर को महालक्ष्मी व्रत के अंतिम दिन पर सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे वस्त्र धारण करें।

घर के मंदिर के उत्तर-पूर्व दिशा में चौकी बिछाएं और उस पर लाल कपड़ा बिछाकर मां लक्ष्मी की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें। 

उसके बाद चौकी पर चावल की धेरी बनाकर जल से भरा कलश रखें। कलश के मुख पर आम के पत्ते और कलावा बंधा नारियल रखें। 

आपने व्रत के पहले दिन जो 16 गांठों वाला पवित्र डोरा अपनी कलाई पर बांधा था या पूजा में रखा था, उसे मां लक्ष्मी के सामने रखें और उस पर रोली-अक्षत अर्पित करें।

मां लक्ष्मी को कमल का फूल, लाल वस्त्र और शृंगार सामग्री चढ़ाएं। भोग में चावल की खीर, पूरियां और फल अर्पित करें।

एक छोटे हवन कुंड या उपले की अग्नि पर "ॐ महालक्ष्म्यै नमः" मंत्र का जाप करते हुए 108 बार आहूति दें। हवन के अंत में खीर और पूरियों की अंतिम आहूति दें।

उद्यापन के दिन 16 सुहागिन महिलाओं को बुलाकर उन्हें सम्मानपूर्वक भोजन कराएं और 16 शृंगार की वस्तुएं, फल व दक्षिणा देकर उनका आशीर्वाद लें। यदि 16 सुहागिनें न मिल सकें, तो आप 16 कन्याओं को भी भोजन करा सकते हैं या उनके नाम का दान मंदिर में निकाल सकते हैं।

Mahalaxmi Vrat Udyapan

उद्यापन के दिन रखें इन विशेष नियमों का ध्यान
इस दिन घर में शांति और प्रसन्नता का माहौल रखें। किसी पर भी गुस्सा न करें।

घर में पूरी तरह सात्विक भोजन ही बनाएं। लहसुन-प्याज का प्रयोग बिल्कुल न करें।

पूजा और हवन समाप्त होने के बाद जब तक सुहागिनों या कन्याओं को दान-दक्षिणा न दे दी जाए, तब तक स्वयं अन्न ग्रहण न करें।

पूजा संपन्न होने के बाद 16 गांठों वाले डोरे को अपनी तिजोरी या धन रखने के स्थान पर सुरक्षित रख दें। इससे साल भर धन का आगमन बना रहता है।

Mahalaxmi Vrat Udyapan

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Content Editor

Sarita Thapa

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