अक्टूबर में किस दिन रखा जाएगा पहला प्रदोष व्रत, नोट कर लें सही तारीख और संपूर्ण पूजा विधि
punjabkesari.in Wednesday, Sep 30, 2026 - 04:54 PM (IST)
October First Pradosh Vrat 2026 : हिंदू धर्म में देवों के देव महादेव की पूजा के लिए उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए प्रदोष व्रत बहुत खास माना जाता है। हर महीने की त्रयोदशी तिथि को यह व्रत रखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्रदोष काल में भगवान भोलेनाथ प्रसन्न मुद्रा में कैलाश पर्वत पर नृत्य करते हैं और अपने भक्तों की हर मनोकामना पूरी करते हैं। इस दिन सच्चे मन से शिवजी की पूजा करने और व्रत रखने से जीवन में आने वाली सारी परेशानियों से छुटकारा मिलता है और शुभ फलों का प्राप्ति होती है। तो आइए जानते हैं प्रदोष व्रत के शुभ मुहूर्त और पूजा विधि के बारे में-
अश्विन माह प्रदोष व्रत शुभ मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार, अश्विन माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 7 अक्टूबर की रात 11 बजकर 16 मिनट से शुरू होगी और इसका समापन 8 अक्टूबर की रात 10 बजकर 15 मिनट पर होगी। प्रदोष काल को ध्यान में रखते हुए व्रत 8 अक्टूबर, गुरुवार को रखा जाएगा। 8 अक्टूबर को भगवान शिव की पूजा के लिए प्रदोष काल का शुभ समय शाम 5 बजकर 59 मिनट से रात 8 बजकर 27 मिनट तक रहेगा।

अश्विन माह प्रदोष व्रत पूजा विधि
प्रदोष व्रत वाले दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र पहनें। इसके बाद हाथ में जल लेकर "ॐ नमः शिवाय" जपते हुए व्रत का संकल्प लें।
दिनभर सात्विक रहें और मन ही मन भगवान शिव का ध्यान करते रहें। शाम को पूजा से पहले एक बार फिर स्नान करें या हाथ-पैर धोकर साफ कपड़े पहनें।
शाम के समय पूजा स्थान पर बैठें। तांबे या पीतल के लोटे में शुद्ध जल लें और उसमें थोड़ा सा कच्चा दूध, गंगाजल मिलाकर शिवलिंग पर अर्पित करें।
भगवान शिव को चंदन का तिलक लगाएं। इसके बाद अक्षत, बेलपत्र, धतूरा, मदार के फूल और भस्म चढ़ाएं। गुरु प्रदोष होने के कारण इस दिन महादेव को पीले फूल और चने की दाल-गुड़ का भोग लगाएं।
उसके बाद धूप-दीप जलाएं और प्रदोष व्रत की कथा सुनें या पढ़ें। इसके बाद "ॐ नमः शिवाय" मंत्र या महामृत्युंजय मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें।
पूजा के अंत में कपूर से भगवान शिव और माता पार्वती की आरती करें। पूजा में हुई किसी भी भूल-चूक के लिए क्षमा मांगें और प्रसाद बांटें।
शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ
