Jitiya Vrat Ke Upay : जितिया व्रत पर माताएं कर लें ये 4 आसान उपाय, संतान के जीवन में आएंगे सुख-समृद्धि के शुभ संकेत

punjabkesari.in Sunday, Sep 27, 2026 - 11:03 AM (IST)

Jitiya Vrat Ke Upay : हर माता-पिता की इच्छा होती है कि उनकी संतान भविष्य में तरक्की करें और सदैव स्वस्थ रहे। ऐसे में कई बार संतान की खुशहाली और बेहतर भविष्य के लिए की गई छोटी-सी धार्मिक साधना भी माता-पिता के लिए बेहद खास बन जाती है। आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखे जाने वाला जितिया या जीवित्पुत्रिका व्रत भी ऐसी ही साधना का समय माना जाता है, जिसमें माताएं अपने संतान की लंबी आयु,अच्छे स्वास्थ्य और सुखी जीवन की कामना के लिए व्रत करती है। ऐसे में इस साल यह व्रत 3 अक्टूबर को रखा जाएगा। लेकिन क्या आप जानते हैं कि केवल जितिया व्रत ही नहीं बल्कि इस दिन के अवसर पर किए जाने वाले उपाय भी संतान के लिए बेहद ही शुभ माने जाते हैं। तो आइए जानते हैं कि इस दिन किए जाने वाले उपायों के बारे में-

Jitiya Vrat Ke Upay

सबसे पहले उपाय की बात करें तो अक्सर आपने सुना होगा कि बच्चों की नज़र बहुत जल्दी लग जाती है, ऐसे में एक उपाय के अनुसार बताया गया है कि अगर किसी बच्चे को बार-बार नज़र लगती है और वह बीमार भी जल्दी हो जाता है तो जितिया व्रत के दिन एक लाल रंग के कपड़े को तेल में अच्छी तरह के भिगोकर एक नारियल पर बांध दें फिर उसे जीमूतवाहन को अर्पित कर दें। इसके बाद इसी नारियल को बच्चे के सिर से सात बार घूमाकर किसी नदी में प्रवाहित कर दें। मान्यता है कि इस उपाय को करने से बच्चे को लगी नज़र भी उतर जाती है साथ बुरी नज़र से भी रक्षा होती है।

दूसरे उपाय की बात करें तो अगर आपको लगता है कि आपकी संतान की तरक्की में बार-बार रुकावट आ रही है या अच्छे मौके सामने आने के बावजूद सफलता नहीं मिल पा रही है, तो जितिया व्रत के दिन एक धार्मिक उपाय कर सकते हैं। मान्यता के अनुसार, इस दिन बच्चे की कलाई पर लाल या पीले रंग का पवित्र धागा बांधना शुभ माना जाता है। इसके साथ ही आटे की 11 छोटी-छोटी लोइयां बनाएं और उनमें थोड़ी मात्रा में तिल और लौंग मिला दें। धार्मिक विश्वास है कि इस उपाय से संतान के जीवन में आ रही बाधाओं को दूर करने और उसके लिए उन्नति के नए रास्ते खुलने की कामना की जाती है।

Jitiya Vrat Ke Upay

तीसरे उपाय की बात करें तो जितिया व्रत के दिन प्रातःकाल स्नान आदि से निवृत्त होकर सूर्यदेव को जल अर्पित करें और श्रद्धापूर्वक सूर्य मंत्र का जाप करें। इसके बाद भगवान जीमूतवाहन की विधि-विधान से पूजा करें। पूजा पूरी होने के बाद लाल रंग का एक कपड़ा लें और उसमें नारियल, इलायची, पान का पत्ता, सुपारी और थोड़े से अक्षत रख दें। अब इस पोटली को कलावे से 16 गांठ लगाकर बांधें और केले के पेड़ या बरगद के वृक्ष को श्रद्धापूर्वक अर्पित करें। इस दौरान अपनी संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी जीवन की प्रार्थना करें। मान्यताओं के अनुसार इस उपाय को करने से संतान की दीर्घायु की कामना की जाती है।

संतान की सुरक्षा और सुखी जीवन की कामना से भगवान जीमूतवाहन की पूजा करने की परंपरा बताई जाती है। जितिया व्रत के दिन पूजा के दौरान लाल कपड़े में थोड़े से तिल और लौंग रखकर भगवान जीमूतवाहन के चरणों में अर्पित करें। इसके बाद दिन के अंत में एक बार फिर भगवान की श्रद्धापूर्वक आराधना करें। पूजा पूरी होने के बाद उसी कपड़े को बच्चे की बाईं कलाई पर पवित्र धागे के रूप में बांध दें। मान्यता है कि इस उपाय के जरिए भगवान जीमूतवाहन से संतान की रक्षा, अच्छे स्वास्थ्य और नकारात्मक प्रभावों से बचाव की प्रार्थना की जाती है।

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Content Editor

Sarita Thapa

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