Mahakal Mandir Ujjain : गर्भगृह में कौन जाएगा ? सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर प्रशासन को दी जिम्मेदारी
punjabkesari.in Wednesday, Jan 28, 2026 - 08:57 AM (IST)
शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ
Mahakal Mandir Ujjain : सुप्रीम कोर्ट ने उज्जैन के प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में वीआईपी दर्शन और गर्भगृह में प्रवेश को लेकर चल रहे विवाद पर अपनी स्थिति साफ कर दी है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि महादेव के दरबार में ऊंच-नीच का कोई स्थान नहीं है और वहां सभी भक्त एक समान हैं।
न्यायालय का दृष्टिकोण:
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए कहा कि मंदिर के भीतर की व्यवस्थाएं और नियम तय करना पूरी तरह से मंदिर प्रबंधन समिति और जिला प्रशासन का अधिकार क्षेत्र है। कोर्ट ने यह भी दोहराया कि धार्मिक संस्थानों के आंतरिक संचालन में न्यायपालिका आमतौर पर दखल नहीं देती।
याचिकाकर्ता की मुख्य आपत्तियां
याचिकाकर्ता ने समानता के अधिकार का हवाला देते हुए कुछ गंभीर सवाल उठाए थे:
ढाई साल से पाबंदी: आम जनता के लिए पिछले 30 महीनों से गर्भगृह में प्रवेश वर्जित है।
नियमों में भेदभाव: आरोप लगाया गया कि प्रभावशाली और रसूखदार लोगों को नियमों को ताक पर रखकर भीतर जाने की अनुमति दी जा रही है।
हाईकोर्ट का रुख: इससे पहले अगस्त 2025 में इंदौर हाईकोर्ट ने भी इसी तरह की दलीलें खारिज करते हुए प्रशासन को फैसला लेने के लिए स्वतंत्र बताया था।
मंदिर की वर्तमान व्यवस्था
कोरोना काल के बाद से ही महाकाल मंदिर में सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के नाम पर आम भक्तों को केवल बाहर से दर्शन की अनुमति मिल रही है। हालांकि, विशेष अनुमति के जरिए होने वाले वीआईपी प्रवेश ने श्रद्धालुओं के बीच असंतोष पैदा किया है।
सुप्रीम कोर्ट के इस रुख के बाद अब गेंद मंदिर प्रशासन के पाले में है। अदालत ने याचिकाकर्ता को मंदिर प्रबंधन से ही सीधा संवाद करने का सुझाव दिया है। इस फैसले ने स्पष्ट कर दिया है कि पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखने की पूरी जिम्मेदारी अब स्थानीय प्रशासन की होगी ताकि आम भक्तों में भेदभाव की भावना पैदा न हो।
