Jagannath Mandir : 48 साल बाद खुलेगा रहस्यमयी खजाना ! जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार की 25 मार्च से शुरू होगी गिनती

punjabkesari.in Friday, Mar 06, 2026 - 09:21 AM (IST)

शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ

Jagannath Mandir : ओडिशा सरकार ने पुरी स्थित Jagannath Temple के प्रसिद्ध ‘रत्न भंडार’ की गिनती और सूची तैयार करने की प्रक्रिया 25 मार्च से शुरू करने का फैसला किया है। इस ऐतिहासिक कार्य की शुरुआत दोपहर 12:12 बजे से 1:45 बजे के शुभ मुहूर्त में की जाएगी। खास बात यह है कि करीब 48 साल बाद मंदिर के खजाने की आधिकारिक गिनती की जा रही है। पूरी प्रक्रिया की निगरानी Reserve Bank of India के दो वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा की जाएगी। इसके साथ ही राष्ट्रीयकृत बैंकों से पंजीकृत सुनार और राज्य सरकार द्वारा नियुक्त दो रत्न विशेषज्ञ भी टीम का हिस्सा होंगे।

1978 में हुई थी पिछली गिनती
जगन्नाथ मंदिर का रत्न भंडार भगवान Jagannath, Balabhadra और Subhadra के बहुमूल्य आभूषणों का सुरक्षित भंडार माना जाता है। वर्ष 1978 में जब आखिरी बार इसकी गिनती हुई थी, तब लगभग 128.38 किलो सोने और 221.53 किलो चांदी के आभूषण दर्ज किए गए थे। उस समय यह पूरी प्रक्रिया करीब 72 दिनों तक चली थी। इस बार गिनती में कितना समय लगेगा, इसे लेकर प्रशासन ने अभी कोई निश्चित समय सीमा घोषित नहीं की है।

पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सख्त व्यवस्था

गिनती की प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के लिए राज्य सरकार ने विस्तृत एसओपी जारी की है। तीन सदस्यीय समिति पूरे काम की निगरानी करेगी। सोना, चांदी और अन्य कीमती वस्तुओं को अलग-अलग बक्सों में सुरक्षित रखा जाएगा। करीब 10 सदस्यों की टीम इन आभूषणों को पैक करने की जिम्मेदारी निभाएगी। सुरक्षा के लिहाज से यह भी तय किया गया है कि मजिस्ट्रेट हर दिन खजाने की चाबी लेकर आएंगे और काम खत्म होने के बाद उसी दिन वापस जमा कर देंगे। इसके अलावा पूरी प्रक्रिया की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी भी की जाएगी।

2018 में चाबी को लेकर हुआ था विवाद
इससे पहले वर्ष 2018 में ओडिशा हाईकोर्ट के निर्देश पर रत्न भंडार खोलने की कोशिश की गई थी। 4 अप्रैल 2018 को जब टीम वहां पहुंची, तो चाबी उपलब्ध न होने का दावा किया गया और खजाना नहीं खोला जा सका। इस घटना के बाद उस समय के मुख्यमंत्री Naveen Patnaik ने न्यायिक जांच के आदेश दिए थे। जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट सरकार को सौंप दी गई, लेकिन उसे सार्वजनिक नहीं किया गया।

2024 में खजाने को बाहर लाने की हुई थी कोशिश
जुलाई 2024 में गठित एक उच्च स्तरीय समिति के 11 सदस्य भीतरी रत्न भंडार में पहुंचे थे। वहां कांच और लोहे की अलमारियां, लकड़ी तथा लोहे के बड़े-बड़े संदूक पाए गए थे। हालांकि उनका वजन काफी ज्यादा होने के कारण उन्हें बाहर निकालना संभव नहीं था। बाद में इन बक्सों से आभूषण निकालकर उन्हें महाप्रभु के शयन कक्ष में स्थानांतरित किया गया। यह पूरी प्रक्रिया करीब सात घंटे तक चली थी।

25 मार्च पर टिकी हैं सबकी निगाहें
करीब पांच दशक बाद होने जा रही इस गिनती को धार्मिक और प्रशासनिक दोनों ही दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे न केवल मंदिर की धरोहर का सही रिकॉर्ड सामने आएगा, बल्कि पारदर्शिता भी सुनिश्चित होगी। यही वजह है कि देशभर के श्रद्धालुओं और आम लोगों की नजरें अब 25 मार्च से शुरू होने वाली इस ऐतिहासिक प्रक्रिया पर टिकी हुई हैं।


सबसे ज्यादा पढ़े गए

Content Editor

Prachi Sharma

Related News