Maa Saraswati Ki Murti Vastu: मां सरस्वती की मूर्ति किस दिशा में रखें? पढ़ाई और करियर में सफलता के लिए जानें जरूरी वास्तु नियम

punjabkesari.in Wednesday, Mar 11, 2026 - 11:49 AM (IST)

Maa Saraswati Ki Murti Vastu: मां सरस्वती को हिंदू धर्म में ज्ञान, विद्या, बुद्धि, संगीत और कला की देवी माना जाता है। प्राचीन हिंदू शास्त्रों और वास्तु शास्त्र के अनुसार यदि घर में मां सरस्वती की मूर्ति सही दिशा और सही स्वरूप में स्थापित की जाए तो यह पढ़ाई, करियर और बौद्धिक विकास में सकारात्मक प्रभाव डाल सकती है। खासतौर पर छात्रों, शिक्षकों, कलाकारों और शोध से जुड़े लोगों के लिए मां सरस्वती की पूजा अत्यंत शुभ मानी जाती है। नीचे जानिए वास्तु शास्त्र के अनुसार मां सरस्वती की मूर्ति रखने के सही नियम।

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मां सरस्वती की मूर्ति रखने की सही दिशा
वास्तु शास्त्र के अनुसार पूर्व दिशा मां सरस्वती की मूर्ति स्थापित करने के लिए सबसे शुभ मानी जाती है। पूर्व दिशा को उगते सूर्य की दिशा माना जाता है, जो ज्ञान, नई शुरुआत और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है। इस दिशा में मां सरस्वती की मूर्ति रखने से घर का वातावरण सकारात्मक बनता है और पढ़ाई में एकाग्रता बढ़ने की मान्यता है।

जो छात्र पढ़ाई में ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते, उनके स्टडी रूम में पूर्व दिशा में मां सरस्वती की तस्वीर या मूर्ति रखना लाभकारी माना जाता है।

ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में मूर्ति रखना क्यों शुभ है
वास्तु शास्त्र में उत्तर-पूर्व दिशा यानी ईशान कोण को सबसे पवित्र स्थान माना गया है। यह दिशा आध्यात्मिक ऊर्जा और देवताओं से जुड़ी मानी जाती है।

इस दिशा में मां सरस्वती की मूर्ति रखने से घर में ज्ञान, शांति और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ने की मान्यता है। साथ ही यह दिशा छात्रों के लिए विशेष रूप से शुभ मानी जाती है क्योंकि इससे पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता के अवसर बढ़ सकते हैं।

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उत्तर दिशा में मूर्ति रखने के फायदे
वास्तु के अनुसार उत्तर दिशा को धन और अवसरों की दिशा माना जाता है। इस दिशा में मां सरस्वती की मूर्ति स्थापित करने से घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मक वातावरण बना रहता है।

कई वास्तु विशेषज्ञ मानते हैं कि उत्तर दिशा में मां सरस्वती की मूर्ति रखने से करियर में नए अवसर मिल सकते हैं और व्यक्ति की बौद्धिक क्षमता भी बढ़ती है।

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मां सरस्वती की मूर्ति की सही मुद्रा
वास्तु और शास्त्रों के अनुसार मां सरस्वती की मूर्ति कमल के फूल पर बैठी हुई होनी चाहिए। कमल पवित्रता, ज्ञान और आध्यात्मिकता का प्रतीक माना जाता है। मूर्ति के चेहरे पर शांत और प्रसन्न भाव होना भी बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसी मूर्ति घर में सकारात्मक ऊर्जा और शांति का वातावरण बनाती है।

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मूर्ति के स्वरूप का भी रखें ध्यान
मां सरस्वती की मूर्ति में उनके हाथों में वीणा और पुस्तक का होना शुभ माना जाता है।
वीणा संगीत, कला और रचनात्मकता का प्रतीक है।
पुस्तक या वेद ज्ञान और शिक्षा का प्रतीक मानी जाती है।
ऐसी मूर्ति घर में स्थापित करने से बच्चों की पढ़ाई, कला और बौद्धिक गतिविधियों में प्रगति होने की मान्यता बताई जाती है।

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वास्तु से जुड़ी जरूरी सावधानियां
मां सरस्वती की मूर्ति को रसोई, बेडरूम या जमीन पर नहीं रखना चाहिए।
मूर्ति हमेशा साफ और पवित्र स्थान पर रखें।
स्टडी रूम या पूजा घर में मूर्ति स्थापित करना सबसे अच्छा माना जाता है।
टूटी या खंडित मूर्ति घर में नहीं रखनी चाहिए।

हिंदू शास्त्र और वास्तु मान्यताओं के अनुसार मां सरस्वती की मूर्ति सही दिशा में स्थापित करने से घर में ज्ञान, सकारात्मक ऊर्जा और मानसिक शांति बढ़ सकती है। खासतौर पर छात्रों और करियर बनाने वाले लोगों के लिए यह अत्यंत शुभ माना जाता है। यदि मूर्ति को पूर्व या ईशान कोण में सही स्वरूप के साथ रखा जाए, तो पढ़ाई और बौद्धिक विकास में अच्छे परिणाम देखने को मिल सकते हैं।

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Content Writer

Niyati Bhandari

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