कोने के घर में बरसेगी खुशहाली: जानें, 4 दिशाओं के कॉर्नर प्लॉट के अचूक वास्तु नियम और समाधान
punjabkesari.in Sunday, Aug 02, 2026 - 01:48 AM (IST)
Vastu for Corner Plot: अक्सर प्रॉपर्टी खरीदते समय लोग कोने के प्लॉट (Corner Plot) को लेकर दुविधा में रहते हैं। आम धारणा है कि कॉर्नर प्लॉट पर बना घर जीवन में मुश्किलें पैदा करता है, लेकिन वास्तु शास्त्र के विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल एक मिथक है। हकीकत में, यदि सही दिशा और वास्तु नियमों का पालन किया जाए, तो कोने का घर न केवल सुख-समृद्धि लाता है, बल्कि सकारात्मक ऊर्जा का मुख्य स्रोत भी बन सकता है। आइए विस्तार से जानते हैं कि विभिन्न दिशाओं वाली सड़कों के आधार पर आपके प्लॉट का वास्तु कैसा होना चाहिए और मुख्य द्वार की सही दिशा क्या हो।
आमतौर पर यह कहा जाता है कि कॉर्नर प्लॉट (कोने के भूखंड) नहीं खरीदना चाहिए, क्योंकि वहां जीवन सुखद और सरल नहीं रहता। लेकिन यह पूरी तरह से गलत धारणा है। कॉर्नर प्लॉट पर बने घरों में भी सुखी, समृद्ध और संपन्न जीवन व्यतीत किया जा सकता है। इसके लिए कुछ महत्वपूर्ण वास्तु नियमों का पालन करना आवश्यक है, जो इस प्रकार हैं-

उत्तर-पूर्व कॉर्नर प्लॉट: यदि प्लॉट इस काॅर्नर पर है अर्थात जिसके उत्तर और पूर्व दोनों दिशाओं में सड़कें हैं, तो ऐसा प्लाॅट वास्तुअनुकूल होता है। यहां उत्तर या पूर्व दिशा में से किसी एक दिशा में या दोनों ही दिशा में मुख्य द्वार रख सकते हैं। यहां एक बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि इस प्लाॅट पर सड़क के कारण ईशान कोण में गोलाई नहीं आना चाहिए। ऐसे प्लाॅट पर चूंकि उत्तर और पूर्व दिशाएं खुली रहती हैं, इसलिए घर में सकारात्मक ऊर्जा और प्राकृतिक रोशनी का प्रवाह बहुत अच्छा रहता है।
दक्षिण-पूर्व कॉर्नर प्लॉट: यदि प्लॉट पूर्व और दक्षिण दिशा के काॅर्नर पर है अर्थात जिसके पूर्व और दक्षिण दोनों दिशाओं में सड़कें हैं तो यहां घर का मुख्य द्वार पूर्व दिशा की तरफ देना ज्यादा वास्तुअनुकूल होता है। दक्षिण दिशा की तरफ मुख्य द्वार देने से बचना चाहिए। पूर्व दिशा में गेट देने और वहां ओपन स्पेस छोड़ने से वह हिस्सा नीचा और हल्का हो जाता है, जबकि दक्षिण का हिस्सा ऊंचा और भारी बनता है। यह स्थिति पूरी तरह से वास्तु-अनुकूल होती है।

दक्षिण-पश्चिम कॉर्नर प्लॉट: यह एक बहुत बड़ा भ्रम है कि दक्षिण-पश्चिम का कॉर्नर प्लॉट हमेशा नुकसान ही देता है। लेकिन ऐसा नहीं है, दक्षिण-पश्चिम दिशा के काॅर्नर प्लाॅट लेने से पहले इन बातों का ध्यान रखना चाहिए-
छोटा प्लॉट- यदि दक्षिण-पश्चिम कॉर्नर का प्लॉट साइज में छोटा है, तो सरकारी नियमों के अनुसार कई बार प्लाॅट में आगे की तरफ ओपन स्पेस छोड़ने के नॉर्म्स होते हैं। ऐसे में छोटा प्लाॅट होने के कारण उत्तर-पूर्व दिशा में ओपन स्पेस नहीं छोड़ पाते और कोने तक निर्माण करते हैं। इसी के साथ सामान्यतः घर की प्लिंथ हाइट सड़क से डेढ़-दो फिट ऊंची रखी जाती है, इस कारण दक्षिण-पश्चिम हिस्सा (सड़क की तरफ) स्वाभाविक रूप से नीचा होता है और घर का मुख्य ढांचा उत्तर-पूर्व की तरफ शिफ्ट होने से वह हिस्सा ऊंचा हो जाता है। यह वास्तु के नियमों के विपरीत स्थिति है। इसके कारण घर के सदस्यों (विशेषकर महिलाओं और पुरुषों) को गंभीर हेल्थ इश्यूज (स्वास्थ्य समस्याएं) और आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
बड़ा प्लॉट- यदि दक्षिण-पश्चिम कॉर्नर प्लॉट का साइज बड़ा हो, तो वहां घर बनाया जा सकता है। ऐसे प्लॉट पर निर्माण करते समय बस इस बात का ध्यान रखना होता है कि दक्षिण या पश्चिम दिशा में आप जितनी भी खुली जगह छोड़ रहे हैं, उससे ज्यादा खुली जगह उत्तर या पूर्व दिशा में छोड़ी जाए। इस तरह दक्षिण-पश्चिम का हिस्सा भारी व ऊंचा हो जाता है और उत्तर-पूर्व हिस्सा हल्का व नीचा रहता है, जिससे घर पूरी तरह वास्तु-अनुकूल हो जाता है। इसी के साथ यह भी ध्यान रखना होगा घर का मुख्य द्वार दोनों दिशाओं में न रखते हुए केवल दक्षिण आग्नेय या पश्चिम वायव्य में से किसी एक दिशा में रखा जाये।
उत्तर-पश्चिम कॉर्नर प्लॉट: यदि प्लॉट उत्तर और पश्चिम दिशा के काॅर्नर पर है, अर्थात उत्तर और पश्चिम दोनों दिशा में सड़क है तो घर की प्लानिंग करते समय मुख्य द्वार हमेशा उत्तर दिशा की तरफ देना चाहिए। पश्चिम दिशा की तरफ मुख्य द्वार देने से बचना चाहिए, ताकि घर में आने वाली ऊर्जा का संतुलन बना रहे। सभी दिशाओं के काॅर्नर प्लाॅट पर घर बनाते समय वास्तु नियमों को ध्यान में रखकर घर बनाया जाये तो वहां सुखद और सरल जीवन व्यतीत किया जा सकता है।
वास्तु गुरु कुलदीप सलूजा
thenebula2001@gmail.com

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