वास्तु गुरु कुलदीप सलूजा- घर के बाहर सीढ़ी बनाने से पहले जरूर पढ़ें ये वास्तु गाइड, गलत दिशा कहीं छीन न ले आपकी सुख-शांति
punjabkesari.in Tuesday, Jul 28, 2026 - 02:39 PM (IST)
Rules for external staircases according to Vastu: कई घरों में देखा जाता है फर्स्ट फ्लोर पर जाने के लिए सीढ़ियां घर के बाहर से बनाई जाती है। यह सीढ़ियां कंक्रीट, स्लैब वाली, स्टील, लकड़ी इत्यादि की बनाई जाती है और कई बार स्पाइरल (घुमावदार) सीढ़ियां भी बनाई जाती हैं। लेकिन घर के बाहर सीढ़ी बनाना वास्तु की दृष्टि से एक बहुत ही महत्वपूर्ण विषय है, क्योंकि इस कारण घर का वह भाग आगे बढ़ जाता है जिससे घर का वास्तु प्रभावित होता है।

वास्तु नियमों के अनुसार, बाहर की सीढ़ी बनाते समय आपको निम्नलिखित बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए-
उत्तर दिशा, ईशान कोण या पूर्व दिशा में बाहर सीढ़ी बनाते समय वास्तु नियमों को ध्यान में रखना पड़ता है, क्योंकि यहां सीढ़ी बनाने से कई बार घर का ईशान कोण कट जाता है जिस कारण आर्थिक और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां आ सकती हैं। पूर्व आग्नेय और उत्तर वायव्य में बाहर सीढ़ी बनाने से बचना चाहिए।

दक्षिण आग्नेय या पश्चिम वायव्य में घर के बाहर सीढ़ी बनाई जा सकती है। यह सीढ़ियां क्लाॅकवाइज, एंटीक्लाॅक वाइज या स्पाइरल किसी भी प्रकार से बनाई जा सकती है। दक्षिण नैऋत्य या पश्चिम नैऋत्य में भी घर के बाहर सीढ़ी नहीं बना सकते हैं क्योंकि इस कारण घर का नैऋत्य कोण बढ़ता है जोकि वास्तु की दृष्टि से शुभ नहीं होता है।

घर के मुख्य द्वार के सामने न हो बाहर की सीढ़ी। वह इस तरह नहीं होनी चाहिए कि वह घर के मुख्य दरवाजे के ठीक सामने आकर उसे ब्लॉक करें। मुख्य द्वार से सीढ़ी थोड़ी हटकर होनी चाहिए।

खुली या कवर्ड सीढ़ी चूंकि सीढ़ी बाहर की तरफ है, इसलिए सुरक्षा और मौसम (बारिश-धूप) से बचाव के लिए इसके ऊपर एक हल्की शेड या कवर्ड स्लैब डाली जा सकती है।
वास्तु गुरु कुलदीप सलूजा
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