Kitchen Vastu Tips : क्या आप भी किचन में पहनकर जाते हैं जूते-चप्पल? वास्तु के अनुसार हो सकता है बड़ा नुकसान

punjabkesari.in Sunday, Mar 08, 2026 - 10:40 AM (IST)

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Kitchen Vastu Tips : भारतीय संस्कृति और वास्तु शास्त्र में रसोई घर को घर का सबसे पवित्र स्थान माना गया है। इसे केवल खाना पकाने की जगह नहीं, बल्कि अन्नपूर्णा का वास माना जाता है। वास्तु के अनुसार, रसोई की सकारात्मक ऊर्जा पूरे परिवार के स्वास्थ्य, सौभाग्य और समृद्धि को प्रभावित करती है। अक्सर हम अनजाने में कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जिनका खामियाजा पूरे परिवार को भुगतना पड़ता है। ऐसी ही एक बड़ी गलती है किचन में जूते-चप्पल पहनकर जाना। आइए जानते हैं वास्तु शास्त्र के अनुसार किचन में जूते-चप्पल पहनकर जाने से क्या नुकसान हो सकते हैं और रसोई से जुड़े महत्वपूर्ण वास्तु टिप्स।

 रसोई में जूते-चप्पल क्यों हैं वर्जित ?
वास्तु शास्त्र के अनुसार, रसोई घर में अग्नि देव और माता अन्नपूर्णा का वास होता है। जूते-चप्पल बाहर की गंदगी, कीटाणु और नकारात्मक ऊर्जा अपने साथ लाते हैं। जूते-चप्पल पहनकर हम गलियों, सड़कों और कई अशुद्ध स्थानों पर जाते हैं। जब वही चप्पलें किचन में आती हैं, तो वे बाहर की नकारात्मकता को उस स्थान पर ले आती हैं जहां हमारा भोजन बनता है। भोजन को ब्रह्म माना गया है। जिस स्थान पर सात्विक भोजन बनता है, वहां जूते ले जाना देवी अन्नपूर्णा का अनादर माना जाता है, जिससे घर में बरकत कम होने लगती है।  वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी, जूतों के तलवों में चिपके बैक्टीरिया रसोई की स्वच्छता को नष्ट करते हैं, जिससे बीमारियां फैलने का डर रहता है।

वास्तु दोष के गंभीर परिणाम
यदि आप लगातार रसोई में जूते-चप्पल का प्रयोग करते हैं, तो वास्तु के अनुसार आपको निम्नलिखित समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। किचन में अशुद्धता रखने से धन की देवी लक्ष्मी रुष्ट हो जाती हैं। इससे बेवजह के खर्चे बढ़ते हैं और जमा पूंजी धीरे-धीरे खत्म होने लगती है। दूषित ऊर्जा के कारण परिवार के सदस्यों के बीच चिड़चिड़ापन बढ़ता है और छोटी-छोटी बातों पर झगड़े होने लगते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जूते-चप्पल का संबंध शनि और राहु से माना जाता है। रसोई में इनका प्रवेश ग्रह दोष पैदा करता है, जिससे मानसिक तनाव बढ़ता है।

रसोई के लिए अन्य महत्वपूर्ण वास्तु टिप्स

सही दिशा का चुनाव
वास्तु के अनुसार, रसोई हमेशा घर के आग्नेय कोण  में होनी चाहिए। यह दिशा अग्नि देव की है। यदि ऐसा संभव न हो, तो उत्तर-पश्चिम (वायव्य कोण) दूसरा सबसे अच्छा विकल्प है। कभी भी ईशान कोण में किचन न बनाएं, यह मानसिक तनाव और धन हानि का कारण बन सकता है।

चूल्हे की स्थिति
गैस का चूल्हा इस तरह रखें कि खाना बनाते समय आपका मुख पूर्व दिशा की ओर हो। इससे स्वास्थ्य बेहतर रहता है और सकारात्मकता आती है। दक्षिण दिशा की ओर मुख करके खाना बनाने से घर की महिलाओं को कंधे या पीठ दर्द की समस्या हो सकती है।

पानी और आग की दूरी
सिंक और चूल्हा कभी भी एक-दूसरे के बिल्कुल पास नहीं होने चाहिए। पानी और आग परस्पर विरोधी तत्व हैं। इनके बीच की दूरी कम होने से परिवार में वैचारिक मतभेद बढ़ते हैं।

बर्तनों का रख-रखाव
रात को कभी भी सिंक में जूठे बर्तन न छोड़ें। यह सबसे बड़ा वास्तु दोष है जो दरिद्रता को आमंत्रण देता है। टूटे-फूटे बर्तनों का उपयोग तुरंत बंद कर दें।

जूते-चप्पल के लिए क्या करें ?

अलग चप्पलें रखें: यदि किचन में चप्पल पहनना अनिवार्य है तो रसोई के लिए एक अलग जोड़ी चप्पल या सैंडल रखें, जिसे आप घर के बाहर या बाकी कमरों में न पहनें।

लकड़ी की चप्पल: वास्तु में लकड़ी को शुद्ध माना गया है। किचन के लिए लकड़ी की बनी चप्पलें एक बेहतर विकल्प हो सकती हैं।

साफ-सफाई: सुनिश्चित करें कि किचन की चप्पलें हमेशा साफ रहें और उन्हें रसोई के किसी कोने में ही व्यवस्थित रखा जाए।

रसोई में समृद्धि लाने के सरल उपाय

प्रतिदिन बनने वाली पहली रोटी गाय के लिए निकालें। इससे पितृ दोष दूर होता है और घर में सुख आता है। सप्ताह में एक बार किचन के फर्श पर समुद्री नमक डालकर पोंछा लगाएं, इससे नकारात्मक ऊर्जा नष्ट होती है। अनाज के डिब्बे कभी भी पूरी तरह खाली न होने दें। थोड़ा अनाज रहने पर ही उसे दोबारा भर दें।


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Content Editor

Prachi Sharma

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