वास्तु गुरु कुलदीप सलूजा: रसोई में चूल्हा और सिंक पास होना वास्तुदोष या महज भ्रम? जानिए क्या कहता है असली वास्तुशास्त्र और फेंगशुई
punjabkesari.in Monday, Sep 21, 2026 - 10:01 AM (IST)
Kitchen Vastu: रसोई घर का वह पवित्र कोना है जहां परिवार के स्वास्थ्य, ऊर्जा और समृद्धि का आधार तैयार होता है। इंटीरियर डिजाइन करते समय जगह की कमी या सुविधा के कारण लोग अक्सर चूल्हा (गैस स्टोव) और सिंक (बेसिन) को पास-पास बना देते हैं। जनमानस में यह आम धारणा बन चुकी है कि आग और पानी को एक साथ नहीं रखना चाहिए क्योंकि इससे वास्तुदोष उत्पन्न होता है। लेकिन क्या यह धारणा प्राचीन भारतीय वास्तुशास्त्र पर आधारित है या फिर फेंगशुई के अधूरे ज्ञान से उपजा डर? जानिए चूल्हे और सिंक के पास होने का असली सच, इसके पीछे का चीनी व भारतीय दर्शन और वे व्यावहारिक सुरक्षा कारण जिन्हें ध्यान में रखना आपके परिवार के लिए बेहद जरूरी है।

रसोई किसी भी घर का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होता है, जहां परिवार के स्वास्थ्य और समृद्धि का आधार तैयार होता है। इंटीरियर डिजाइन करते समय अक्सर जगह की कमी या सुविधा के कारण लोग चूल्हा (गैस स्टोव) और सिंक (बेसिन) को पास-पास बना देते हैं। लेकिन क्या ऐसा करना सही है? आइए जानते हैं इसके पीछे का वास्तुशास्त्र और व्यावहारिक कारण-
भारतीय जनमानस में यह आम धारणा है कि गैस के पास सिंक नहीं होना चाहिए अर्थात आग और पानी साथ-साथ नहीं होना चाहिए। इसको समझने के लिए हमें भारतीय वास्तुशास्त्र और चीन के फेंगशुई (वास्तुशास्त्र) के मूलभूत आधार को जानना होगा। भारतीय वास्तुशास्त्र का मूल आधार विश्वव्यापी पंचतत्त्व पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश हैं। सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड और हमारा शरीर भी इन्हीं पांच तत्त्वों से बना है। इन महातत्त्वों के अनुरूप घर को बनाना, सजाना, संवारना ही वास्तु कहलाता है।
फेंगशुई और चीनी दर्शन में पांच तत्वों के आपसी संबंधों को समझाने के लिए मुख्य रूप से चक्रों का उपयोग किया जाता है। इनमें से एक चक्र को डिस्ट्रक्टिव साइकिल कहा जाता है। इसे हिंदी में ‘विनाशकारी या नियंत्रण चक्र’ कहा जा सकता है। फेंगशुई में इसका अर्थ यह नहीं है कि कोई तत्व किसी को पूरी तरह नष्ट या खत्म कर देता है, बल्कि इसका मतलब यह है कि एक तत्व दूसरे तत्व की ऊर्जा को नियंत्रित, कमजोर या संतुलित करता है।

यह चक्र इस प्रकार काम करता है-पानी अग्नि को नियंत्रित करता है, पानी आग को बुझाता है, इसलिए पानी की ऊर्जा अग्नि ऊर्जा पर भारी पड़ती है। अग्नि धातु को नियंत्रित करती है, आग धातु को पिघला देती है या उसका रूप बदल देती है। धातु, लकड़ी को नियंत्रित करती है, धातु की कुल्हाड़ी या औजार लकड़ी (पेड़) को काटते हैं। लकड़ी, मिट्टी पृथ्वी को नियंत्रित करती है, पेड़-पौधे और उनकी जड़ें मिट्टी से पोषण खींचती हैं और उसे बांधकर रखती हैं। मिट्टी, पृथ्वी, पानी को नियंत्रित करती है, मिट्टी या बांध पानी के बहाव को रोकते या नियंत्रित करते हैं।
फेंगशुई में घर के किसी हिस्से में यदि कोई तत्व बहुत ज्यादा मात्रा में हो और नकारात्मक ऊर्जा पैदा कर रहा हो, तो उसे संतुलित (कंट्रोल) करने के लिए इस डिस्ट्रक्टिव साइकिल के नियमों का उपयोग करते हैं। इसी प्रकार फेंगशुई और चीनी दर्शन में कंस्ट्रक्टिव साइकिल को ‘उत्पादक या सृजन चक्र’ कहा जाता है।

यह चक्र इस बात को दर्शाता है कि फेंगशुई के पांचों मूल तत्व (लकड़ी, अग्नि, पृथ्वी, धातु और जल) एक-दूसरे को कैसे ऊर्जा देते हैं, (पैदा करते हैं) और मजबूत बनाते हैं। इस चक्र में हर तत्व अपने आगे वाले तत्व का पोषण या सृजन करता है-
लकड़ी से अग्नि बनती है, लकड़ी को जलाने से आग पैदा होती है। अग्नि से पृथ्वी, मिट्टी बनती है, आग किसी भी चीज को जलाकर राख (मिट्टी) में बदल देती है। पृथ्वी से धातु निकलती है, धरती की खानों और पत्थरों के भीतर धातुओं का निर्माण होता है।

धातु से जल का संबंध- जब धातु ठंडी होती है, तो उस पर ओस की बूंदें (जल) जमा होती हैं या धातु के पाइप्स द्वारा पानी को होल्ड करते हैं। जल से लकड़ी बढ़ती है, पानी पेड़ों और पौधों को सींचता है, जिससे उनका विकास होता है। ‘‘पानी अग्नि को नियंत्रित करता है, पानी आग को बुझाता है, इसलिए पानी की ऊर्जा अग्नि ऊर्जा पर भारी पड़ती है।’’
भारत में 1995 से जब से लोगों ने मीडिया, मैगजीन, किताबें, अखबार इत्यादि के माध्यम से फेंगशुई के बारे में लोगों ने जाना, तभी से यह धारणा विकसति हुई और इसके नाम पर वास्तुविद लोगों को डराने लगे तथा इसके लिए अलग-अलग उपाय भी बताने लगे। जबकि प्राचीन भारतीय वास्तुशास्त्र में ऐसी कोई जानकारी नहीं मिलती है।
आप सोचिए, जब चुल्हे पर खाना बनाते हैं, नहाने के लिए पानी गरम करते हैं तो पानी तो अग्नि के ऊपर अर्थात गैस स्टोव के ऊपर ही रखा जाता है। जबकि सिंक में जितनी देर नल खोलकर उसका उपयोग करते हैं, केवल उतने समय के लिए ही नल के पानी की केवल एक धारा आती है, जोकि कंटिन्यू वहां रहती भी नहीं है बल्कि बहती जाती है। इसलिए यह बात पूर्णतः गलत है कि चुल्हा और सिंक पास-पास होने से वास्तुदोष आता है।

आप चुल्हा और सिंक पास-पास रख सकते हैं। केवल कुछ व्यावहारिक सुरक्षा की दृष्टि से (वास्तु की दृष्टि से नहीं) इन दोनों के बीच थोड़ी गेप रखी जाये तो बेहतर है। जैसे हादसे का खतराः खाना बनाते समय गरम तेल में पानी की बूंदें गिरने से तेल के छींटे उड़ सकते हैं, जिससे जलने का डर रहता है। आग बुझने की संभावनाः बर्तन धोते समय पानी की छीटें गैस के चूल्हे पर पड़ सकती हैं, जिससे बर्नर बंद हो सकता है।
साफ-सफाई की समस्याः सिंक में बर्तन धोते समय साबुन का पानी या गंदगी का छींटा पक रहे भोजन में जा सकता है, जो हाइजीन की दृष्टि से सही नहीं है। इसलिए चूल्हे और सिंक के बीच उपरोक्त बातों को ध्यान रखते हुए पर्याप्त दूरी रखी जाये तो बेहतर है।
वास्तु गुरु कुलदीप सलूजा
thenebula2001@gmail.com

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