वास्तु गुरु कुलदीप सलूजा: सूर्य देव का सम्मान और काबा की दिशा, टॉयलेट सीट लगाने में धर्म और आधुनिक आर्किटेक्चर का ये तालमेल कर देगा हैरान!
punjabkesari.in Tuesday, Sep 08, 2026 - 01:50 PM (IST)
Best direction for toilet seat: घर छोटा हो या बड़ा, सुख-शांति, स्वच्छता और सुविधा के लिए टॉयलेट यानी शौचालय की बनावट बेहद मायने रखती है। लेकिन आज के समय में सबसे बड़ा सिरदर्द यह है कि आखिर टॉयलेट सीट (कमोड) किस दिशा में लगाई जाए? कोई प्राचीन ग्रंथों के उत्तर-दक्षिण नियमों की दुहाई देता है, तो कोई सूर्य देव और पवित्र काबा की दिशा का सम्मान करने की बात करता है। लेकिन क्या आज के फ्लैट सिस्टम और आधुनिक घरों में इन सभी पारंपरिक नियमों का पालन करना व्यावहारिक रूप से संभव है? आइए, आस्था के पुराने पन्नों से लेकर आज की आधुनिक जीवनशैली के व्यावहारिक और वैज्ञानिक समाधानों तक, टॉयलेट सीट की सही दिशा का पूरा सच जानते हैं, जो आपके दैनिक जीवन को बेहद आसान बना देगा।

टॉयलेट सीट/कमोड किस दिशा में लगाना चाहिए, इस बारे में अलग-अलग मान्यताएं और विचार हैं। मेरे अनुभव के अनुसार, व्यक्ति किसी भी दिशा में बैठकर कमोड का उपयोग कर सकता है। जरूरी यह है कि रोजमर्रा की जिंदगी में यह पूरी तरह से व्यावहारिक और सुविधाजनक हो।
भारतीय प्राचीन धार्मिक ग्रंथों में यह उल्लेख मिलता है कि मल-मूत्र त्याग करते समय व्यक्ति को उत्तर या दक्षिण दिशा की ओर मुख करके बैठना चाहिए। कुछ मान्यताओं के अनुसार, सुबह के समय उत्तर दिशा की ओर तथा रात में दक्षिण दिशा की ओर बैठना उचित माना गया है। इसके पीछे धार्मिक और आध्यात्मिक कारण बताए गए हैं।

पूर्व दिशा की ओर कमोड लगाने से कुछ लोग इसलिए बचते हैं क्योंकि उस स्थिति में व्यक्ति की पीठ पूर्व दिशा (जहां से सूर्य उदय होता है) की ओर हो जाती है। सूर्य को देवता माना जाता है, इसलिए उनकी दिशा की ओर पीठ करना उचित नहीं माना जाता। हालांकि, यह पूरी तरह आस्था का विषय है। यह भी ध्यान देने योग्य है कि ये नियम उस समय के हैं जब लोग खुले में शौच के लिए जाते थे।
आज के समय में, घरों में फिक्स्ड कमोड लगाये जाते हैं और आधुनिक जीवनशैली में घरों की बनावट को देखते हुए इन नियमों का पालन हर जगह संभव नहीं होता इसलिए व्यावहारिकता, सफाई और सुविधा को प्राथमिकता देना ज्यादा महत्वपूर्ण है।

इसी तरह, मुस्लिम समुदाय में भी आस्था से जुड़ा एक नियम है कि शौच करते समय काबा (काबा) की दिशा की ओर मुख या पीठ करके नहीं बैठना चाहिए। भारत में काबा पश्चिम दिशा में स्थित है, इसलिए यहां आमतौर पर पश्चिम दिशा से बचा जाता है, जबकि अमेरिका, कनाडा, मैक्सिको इत्यादि देशों में काबा की दिशा अलग-अलग होती है।
अंत में, यह कहा जा सकता है कि दिशा से जुड़ी ये सभी बातें व्यक्तिगत आस्था और विश्वास पर आधारित हैं। वर्तमान समय में सबसे महत्वपूर्ण है टॉयलेट का फ्लोर लेवल। टॉयलेट यदि उत्तर या पूर्व दिशा में हो तो इसका फ्लोर लेवल थोड़ा नीचा रख सकते हैं लेकिन दक्षिण या पश्चिम दिशा में टॉयलेट का फ्लोर लेवल बिल्कुल नीचा नहीं रख सकते। इस बात को ध्यान में रखते हुए पश्चिम और दक्षिण दिशा में वॉल माउंटेड कमोड लगाना उचित रहता है।
वास्तु गुरु कुलदीप सलूजा
thenebula2001@gmail.com

