वास्तु गुरु कुलदीप सलूजा: इंडियन Vs वेस्टर्न कमोड, आधुनिक टॉयलेट तकनीक बदल रही है उत्तर-पूर्व दिशा के वास्तु समीकरण?
punjabkesari.in Saturday, Sep 12, 2026 - 08:38 AM (IST)
Vastu rules for Western style commodes: वास्तु शास्त्र में ईशान कोण को पवित्र और ऊर्जा का मुख्य स्रोत माना गया है। ईशान कोण में टाॅयलेट न बनाने की सलाह दी जाती है। यह बात किसी हद तक सही है कि ईशान कोण में टाॅयलेट नहीं होना चाहिए, लेकिन ईशान कोण में ऑलरेडी टाॅयलेट बना हुआ हो या मजबूरन बनाना पड़ रहा हो तो वास्तु नियमों को ध्यान में रखकर ही ईशान कोण में टाॅयलेट बना सकते हैं, अन्यथा नहीं।

ईशान कोण में टाॅयलेट बनाने से ज्यादा महत्वपूर्ण वास्तुदोष है टाॅयलेट के कारण ईशान कोण का ऊंचा होना। प्राचीन समय की बनावट जिसमें टाॅयलेट में इंडियन कमोड लगाते थे। उनमें फर्श के लेवल को ऊंचा करके कमोड लगाई जाती है, यह महत्वपूर्ण वास्तुदोष होता है। आजकल वेस्टर्न कमोड का चलन है, इसलिए इन टाॅयलेट में फर्श को ऊंचा करने की जरूरत ही नहीं रहती। यदि विवशता में ईशान कोण में टॉयलेट बनाना पड़े, तो उसका फ्लोर लेवल घर के मुख्य फ्लोर के बराबर हो या उससे नीचे हो सकता है।

इसी प्रकार, पारंपरिक समय में टॉयलेट की सफाई व्यवस्था सीमित थी, दिन में एक बार ही उस कमोड की सफाई होती थी, ह्यूमन वेस्ट दिनभर वहां पड़ा रहता था लेकिन आज की आधुनिक फ्लश प्रणाली और सैनिटेशन तकनीक यह सुनिश्चित करती है कि ह्यूमन वेस्ट का संपर्क लंबे समय तक टाॅयलेट में न रहे। फ्लोर लेवल का विशेष रूप से ध्यान रखना होगा कि ईशान कोण में फ्लोर लेवल बिल्कुल भी ऊंचा न हो।

वास्तु गुरु कुलदीप सलूजा
thenebula2001@gmail.com
