जानिए, कैसे गोल्डस्मिथ बने एक महान कवि

11/21/2019 12:49:57 PM

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इंगलैंड के प्रसिद्ध कवि ओलिवर गोल्डस्मिथ को यूं तो अपने जीवन काल में ही काफी लोकप्रियता हासिल हो गई थी, लेकिन प्रसिद्धि पाने से पहले उन्हें भी कठिन संघर्ष के दौर से गुजरना पड़ा था। लंबे समय तक ऐसे हालात रहे कि उनके पास खाने तक के पैसे नहीं होते थे। उन्हें मकान मालकिन को किराया दिए भी काफी समय गुजर जाता था।

एक बार जब गोल्डस्मिथ कई महीनों तक किराया नहीं दे सके तो मकान मालकिन का धैर्य जवाब दे गया। गुस्से में उसने गोल्डस्मिथ की एक पांडुलिपि उठा ली और बोली, ''यह पांडुलिपि मैं तुम्हें तभी दूंगी जब तुम मेरा किराया चुका दोगे और यदि तुम किराया नहीं चुका पाए तो यह पांडुलिपि आग की भेंट चढ़ जाएगी। गोल्डस्मिथ घबरा गए। उन्होंने उस पांडुलिपि को बड़ी मेहनत से तैयार किया था। स्थिति की गम्भीरता को देखते हुए उन्होंने अपने मित्र डा. जॉनसन को बुलवाया। डा. जॉनसन आए तो उन्होंने देखा कि मकान मालकिन गोल्डस्मिथ के सिर पर सवार है और बेचारे गोल्डस्मिथ नीचे सिर झुकाए खड़े हैं। उन्हें पूरा माजरा समझते देर नहीं लगी। उन्होंने तत्काल मकान मालकिन से क्षमा मांगी और गोल्डस्मिथ की तरफ से बकाया चुकाकर पांडुलिपि वापस ली। गोल्डस्मिथ पांडुलिपि वापस पाकर खिल उठे और डा. जॉनसन को गले लगाते हुए बोले, ''तुम जैसा दोस्त सबको मिले।
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इसके बाद डा. जॉनसन अनेक प्रकाशकों के पास घूमे। वह चाहते थे कि यह पांडुलिपि जल्द से जल्द पुस्तक रूप में आ जाए। आखिर एक प्रकाशक ने उस पांडुलिपि को 60 पौंड में खरीद लिया। जब वह पांडुलिपि पुस्तक के रूप में प्रकाशित होकर आई तो जल्द ही बाजार में छा गई। वह पुस्तक थी 'विकर ऑफ वेकफील्ड। आज यह उपन्यास न केवल गोल्डस्मिथ की महान कृतियों में गिना जाता है बल्कि विश्व साहित्य में काफी ऊंचा स्थान रखता है।


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