Pooja Room Vastu: घर के मंदिर में दक्षिण मुखी मूर्ति रखना शुभ या अशुभ? उज्जैन के महाकाल और सिद्धपीठों से जानें दिशाओं का असली दिव्य विज्ञान
punjabkesari.in Wednesday, Jun 10, 2026 - 12:23 PM (IST)
Home Mandir Vastu: सामान्यतः जनमानस में यह असमंजस रहता है कि घर के मंदिर में देवी-देवताओं की मूर्तियां किस दिशा की ओर मुख करके रखी जानी चाहिए। कुछ मान्यताओं के अनुसार हनुमान जी, गणेश जी और मां दुर्गा की मूर्ति दक्षिण मुखी होनी चाहिए, तो श्री राम व श्री कृष्ण की मूर्ति उत्तर या पूर्व मुखी। कई विद्वान घर के मंदिर में भगवान का मुख दक्षिण दिशा में होना पूरी तरह वर्जित बताते हैं। परंतु, क्या यह नियम हर जगह लागू होता है? आइए इसे व्यावहारिक और प्रामाणिक दृष्टिकोण से समझते हैं-

यदि हम प्राचीन और सिद्ध मंदिरों का अध्ययन करें, तो दिशाओं को लेकर कोई एक तय नियम नहीं दिखता। मेरे गृह नगर उज्जैन के ये अत्यंत प्रसिद्ध और प्राचीन मंदिर इसके प्रत्यक्ष प्रमाण हैं, जहां हमेशा भक्तों का तांता लगा रहता है-
उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में भगवान महाकाल का मुख दक्षिण दिशा की ओर है। हनुमान जी का प्राचीन मंदिर उत्तर मुखी है। चिंतामण गणेश जी का मंदिर, यहां गणेश जी की मूर्ति पूर्व मुखी है। गढ़कालिका माता मंदिर, इस सिद्धपीठ में मां पश्चिम मुखी विराजमान हैं। मां हरसिद्धि, राजा विक्रमादित्य की आराध्य देवी मां हरसिद्धि यहां पूर्व मुखी विराजित हैं।

कई धार्मिक स्थलों के वास्तु विश्लेषण में मैंने पाया है कि मंदिर की प्रसिद्धि और समृद्धि के लिए केवल मूर्ति की दिशा नहीं, बल्कि मंदिर की बनावट का वास्तु अनुकूल निर्माण होना सबसे महत्वपूर्ण होता है।
वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर में पूजा के लिए सबसे श्रेष्ठ स्थान ईशान कोण या उत्तर और पूर्व दिशा है, जो सकारात्मक ऊर्जा का मुख्य केंद्र है। जब हम ईशान कोण या उत्तर और पूर्व दिशा में मंदिर स्थापित करते हैं, तो सामान्यतः दो स्थितियां बनती हैं-
उत्तर की दीवार पर मंदिर: यदि मंदिर उत्तर की दीवार पर होगा, तो मूर्ति का मुख स्वाभाविक रूप से दक्षिण की ओर होगा। इस स्थिति में पूजा करते समय आपका मुख उत्तर की ओर रहेगा।

पूर्व की दीवार पर मंदिर: यदि मंदिर पूर्व की दीवार पर होगा, तो मूर्ति का मुख पश्चिम की ओर होगा और पूजा करते समय आपका मुख पूर्व की ओर रहेगा।
घर के मंदिर में भगवान का मुख पश्चिम या दक्षिण की ओर इसलिए रखा जाता है, ताकि पूजा करने वाले का मुख क्रमशः पूर्व या उत्तर की ओर रहे, जो ध्यान और प्रार्थना के लिए सर्वश्रेष्ठ दिशाएं मानी गई हैं।
दिशा केवल एक माध्यम (साधन) है, अंतिम सत्य (साध्य) नहीं। जिस तरह मुस्लिम समुदाय के लिए मक्का स्थित काबा ऊर्जा का केंद्र है और वे उसकी तरफ मुख करके इबादत करते हैं, जैसे काबा भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश के लिए पश्चिम की ओर पड़ता है इसलिए यहां के मुस्लिम लोग पश्चिम की ओर मुख करके इबादत करते हैं और अमेरिका, कनाडा में यह पूर्व दिशा की तरफ आता है इसलिए वहां के लोग पूर्व की तरफ मुख करके इबादत करते हैं। ठीक उसी तरह हमारे घरों में ईशान कोण ऊर्जा का मुख्य केंद्र है।
वास्तु गुरु कुलदीप सलूजा
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