Welcome 2020: भारत में इन दिलचस्प परम्पराओं के साथ मनाते हैं नया साल

punjabkesari.in Wednesday, Jan 01, 2020 - 07:33 AM (IST)

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आज लगभग सारी दुनिया 1 जनवरी को ही नव वर्ष मनाती है परंतु करीब 4000 वर्ष पहले बेबीलोन में नया वर्ष 21 मार्च को मनाया जाता था जो वसंत के आगमन की तिथि भी मानी जाती थी। तब रोम के तानाशाह जूलियस सीजर ने ईसा पूर्व 45वें वर्ष में जूलियन कैलेंडर की स्थापना की, उस समय विश्व में पहली बार 1 जनवरी को नए वर्ष का उत्सव मनाया गया। तब से आज तक ईसाई धर्म के लोग इसी दिन नया साल मनाते हैं जो अब दुनिया भर में सबसे ज्यादा प्रचलित नव वर्ष बन चुका है।

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देश में जिस प्रकार विभिन्न त्यौहार बड़ी धूमधाम, उत्साह और हर्षोल्लास के साथ मनाए जाते हैं, वैसा ही उत्साह लोगों में नववर्ष के अवसर पर भी देखा जाता है। नव वर्ष के प्रथम दिन लोग एक-दूसरे को नव वर्ष की बधाई देते हैं और स्वयं के लिए भी कामना करते हैं कि नया साल शुभ एवं फलदायक हो, नए साल में सफलता उनके कदम चूमे तथा नव वर्ष उनके जीवन को खुशियों से महका दे। 

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भारत में विभिन्न नव वर्ष 
दुनिया भर में विभिन्न धर्मों के लोग अलग-अलग दिन नव वर्ष भी मनाते हैं। भारत की बात करें तो हिन्दू नववर्ष का प्रारंभ चैत्र मास की शुक्ल प्रतिपदा से माना जाता है जिसे हिन्दू नव सम्वत्सर या नव संवत कहते हैं। इसी दिन से विक्रमी सम्वत के नए साल का आरंभ भी होता है। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार यह तिथि अप्रैल में आती है। इसे गुड़ी पड़वा, उगादी आदि नामों से भारत के अनेक क्षेत्रों में मनाया जाता है।

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भारत में ही जैन नव वर्ष दीपावली से अगले दिन शुरू होता है। मान्यता के अनुसार भगवान महावीर स्वामी को दीपावली के दिन ही मोक्ष प्राप्ति हुई थी। इसके अगले दिन ही जैन धर्म के अनुयायी नया साल मनाते हैं। इसे वीर निर्वाण संवत कहते हैं। 

गुजरात में भी नए साल का आरंभ दीपावली के दूसरे दिन से ही माना जाता है। व्यापारी भी इसी दिन से नए साल की शुरूआत मानते हैं।

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इस्लामी कैलेंडर के अनुसार मोहर्रम महीने की पहली तारीख को मुस्लिम समाज का नया साल हिजरी शुरू होता है। इस्लामी या हिजरी कैलेंडर चंद्र आधारित है। 

सिंधी नववर्ष चेटीचंड उत्सव से शुरू होता है जो चैत्र शुक्ल द्वितीया को मनाया जाता है। सिंधी मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान झूलेलाल का जन्म हुआ था जो वरुण देव के अवतार थे।

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पंजाब में नया साल बैसाखी पर्व के रूप में मनाया जाता है जो अप्रैल में आता है। सिख नानकशाही कैलेंडर के अनुसार, होला मोहल्ला (होली के दूसरे दिन) नया साल होता है।

पारसी धर्म का नया साल नवरोज के रूप में मनाया जाता है। आमतौर पर 19 अगस्त को नवरोज का उत्सव पारसी लोग मनाते हैं। लगभग 3000 वर्ष पूर्व शाह जमशेदजी ने पारसी धर्म में नवरोज मनाने की शुरूआत की। नव अर्थात नया और रोज यानी दिन। 


 


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Niyati Bhandari

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