ढोल ग्यारस पर उज्जैन में गूंजे काल भैरव के जयकारे, शाही अंदाज में नगर भ्रमण पर निकले बाबा

punjabkesari.in Wednesday, Sep 23, 2026 - 04:50 PM (IST)

Dhol Gyaras Ujjain Celebrations : ढोल ग्यारस महोत्सव के तहत उज्जैन में भगवान काल भेरव की सवारी निकली गई। यहां भैरव बाबा राजसी ठाट बाट के साथ निकले। पुलिस जवान द्वारा सवारी को गार्ड ऑफ़ ऑनर दिया गया। जिलाधीश और पुलिस अधीक्षक ने काल भेरव का पूजन अर्चन किया और फिर शुरू हुई बाबा की सवारी । परंपरा अनुसार सवारी केन्द्रीय जेल भी गई जहां कैदीयों ने बाबा के दर्शन किए। धार्मिक, पोराणिक और सांस्कृतिक नगरी उज्जैन की यूं तो कई पहचान हे, ये भूतभावन बाबा महांकाल की नगरी तो हे ही ,यहां हर बारह वर्ष में आयोजित होने वाले सिंहस्थ मेले, सम्राट विक्रमादित्य, महाकवि कालिदास और भगवान श्री कृष्ण की शिक्षा स्थली से भी उज्जैन का नाम जुड़ा हे। इतनी पहचान के अलावा उज्जैन शिप्रा नदी के तट पर बसे कालभेरव मंदिर के लिए भी विश्व प्रसिद्ध हे। काल भेरव मन्दिर में भगवान की चमत्कारिक प्रतिमा है। भेरव भगवान की प्रतिमा को प्रतिदिन मदिरा का भोग लगाया जाता हे और आश्चर्य की बात तो यह हे की यह भेरव भगवान  की प्रतिमा साक्षात् मदिरा का सेवन भी करती हे।

धर्म शास्त्रों के अनुसार भेरव भगवान शंकर के कोतवाल हे। भगवान महांकाल को उज्जैन का राजा माना जाता हे तो यहां भगवान भेरव को क्षेत्रपाल के रूप में पूजा जाता हे। क्षेत्रपाल अर्थात सेनापति। मान्यता हे की जिस प्रकार भगवान महांकाल अपनी प्रजा का हाल जानने के लिए सवारी के रूप में नगर भ्रमण पर निकलते हे उसी प्रकार भेरव भगवान भी क्षेत्रपाल की भूमिका निभाते हुवे प्रजा की रक्षा के लिए वर्ष में दो बार नगर भ्रमण पर निकलते हे। यहाँ भेरव बाबा की वर्ष में दो सवारी निकलती हे एक भाद्रपद की ढोल ग्यारस पर और दूसरी अगहन माह की भेरव अष्टमी के दुसरे दिन । एकादशी पर यहां मन्दिर में विशेष पूजन किया जाता है। यहां पूजन के पहले भेरव बाबा का विशेष श्रंगार किया जाता हे। यहां बाबा को सिंधिया राजघराने की पगड़ी पहनाई जाती हे जो की विशेष तोर पर ग्वालियर से मंगवाई जाती हे। यह पगड़ी मराठी शेली में होती हे। चूंकि यह मंदिर शासन के अधीन हे इसलिए यहां भगवान को चड़ने वाले जेवर शासन की और से आते हे और पूजन के बाद पुनः शासन के विभाग ट्रेजरी में जमा हो जाते हे।

शाम 4 बजे बाबा की राजसी ठाट बाट से शासकीय पूजा होती हे जो की जिलाधीश और पुलिस अधीक्षक द्वारा की जाती हे। पूजा के बाद सवारी निकाली जाती हे। यहां निकलने वाली सवारी देखते ही बनती हे। सवारी के आगे पुलिस के घुड़सवार रहते हे और उसके बाद हाथो में बन्दुक लिए पुलिस की बटालियन चलती हे। सवारी राजकीय ठाट बाट के साथ गाजे बाजे से निकलते हे। सवारी केन्द्रीय जेल भी पहुंचती है जहां सभी कैदी कालभेरव के दर्शन करते है। ऐसी मान्यता है की कैदी कालभेरव बाबा से अपने गुनाहों को माफ़ करने और जल्द कारागार से मुक्ति की प्रार्थना करते है। यह सवारी दो किलो मीटर तक भ्रमण करने के बाद शिप्रा नदी के किनारे स्थित सिद्धवट मंदिर जिसे बैकुंठ धाम कहते हे  पर जाती हे जहां पूजन अर्चन के बाद पुनः  मंदिर लोट आती हे। सवारी को देखने दूर दूर से श्रद्धालु आते है साथ ही सवारी में शामिल भक्तगण झूमते गाते नजर आते है। कलेक्टर रोशन कुमार सिंह और एसपी प्रदीप शर्मा ने काल भैरव मंदिर के गर्भगृह में भगवान भैरव का पूजन अर्चन किया उसके बाद पालकी को कंधा दिया और कुछ दूर सवारी में शामिल हुए। इसके बाद सवारी परंपरा अनुसार निकली।

-विशाल ठाकुर, उज्जैन

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Content Editor

Sarita Thapa

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