वैशाख का पहला बुध प्रदोष व्रत: 15 अप्रैल को महादेव बरसाएंगे विशेष कृपा, जानें पूजा का सबसे सटीक मुहूर्त और विधि
punjabkesari.in Tuesday, Apr 14, 2026 - 01:35 PM (IST)
Budh Pradosh Vrat 15 April 2026 Puja Muhurat: हिंदू धर्म में महादेव की भक्ति के लिए प्रदोष व्रत का विशेष महत्व बताया गया है। साल 2026 में वैशाख मास के कृष्ण पक्ष का पहला प्रदोष व्रत 15 अप्रैल, बुधवार को रखा जाएगा। जब त्रयोदशी तिथि बुधवार के दिन पड़ती है, तो इसे 'बुध प्रदोष व्रत' कहा जाता है। ज्योतिषीय दृष्टिकोण से यह दिन भगवान शिव के साथ-साथ बुध ग्रह की शुभता पाने के लिए भी अत्यंत फलदायी माना जाता है।
बुध प्रदोष व्रत का शुभ समय और तिथि (Muhurat 2026)
पंचांग गणना के अनुसार, त्रयोदशी तिथि का आरंभ 15 अप्रैल 2026 को मध्यरात्रि 12:12 बजे से होगा और इसका समापन उसी रात 10:31 बजे पर होगा। चूंकि प्रदोष व्रत में शाम की पूजा का विधान है, इसलिए उदयातिथि के अनुसार यह व्रत 15 अप्रैल को ही मान्य होगा।

पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त (प्रदोष काल): शाम 06:01 बजे से रात 09:13 बजे तक।
विशेष लाभ: इस समयावधि में की गई शिव आराधना जीवन के बड़े से बड़े संकटों को टालने की शक्ति रखती है।
क्यों खास है इस बार का बुध प्रदोष?
बुधवार का दिन भगवान श्री गणेश और बुद्धि के कारक बुध देव को समर्पित है, जबकि प्रदोष काल महादेव का प्रिय समय है। इन दोनों का संयोग व्यक्ति को मानसिक शांति, कुशाग्र बुद्धि और पारिवारिक कलह से मुक्ति दिलाता है। जो लोग संतान प्राप्ति या करियर में बाधाओं का सामना कर रहे हैं, उनके लिए यह व्रत रामबाण माना जाता है।

ऐसे करें महादेव का अभिषेक (Puja Vidhi)
संकल्प: प्रातः काल स्नान के बाद व्रत का संकल्प लें और पूरा दिन निराहार या फलाहार रहकर शिव का स्मरण करें।
संध्या पूजा: प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद) में शिवलिंग का शुद्ध जल, गाय के दूध, शहद और गंगाजल से अभिषेक करें।
सामग्री: महादेव को प्रिय बेलपत्र, धतूरा, मदार के फूल और अक्षत अर्पित करें।
मंत्र जाप: पूजा के दौरान 'ओम नमः शिवाय' मंत्र का निरंतर जाप करना मानसिक शांति के लिए फलदायी है।
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