June 2026 Hindu Festivals List: जून 2026 में बरसेगी देवों की विशेष कृपा जानें, इस महीने के 6 बड़े व्रत-त्योहार और उनका महत्व
punjabkesari.in Friday, May 29, 2026 - 11:46 AM (IST)
June 2026 Fasts and Festivals: हिंदू पंचांग के अनुसार, साल 2026 का जून महीना आध्यात्मिक ऊर्जा और भक्ति का अनूठा संगम लेकर आ रहा है। इस महीने ज्येष्ठ अधिकमास और आषाढ़ मास का दुर्लभ संयोग बन रहा है, जो इसे पूजा-पाठ और दान-पुण्य के लिए विशेष बनाता है। जून के इस महीने में कुल 6 बड़े महापर्व पड़ रहे हैं, जो श्रद्धालुओं के लिए भगवान विष्णु, महादेव और सूर्य देव की कृपा पाने का सुनहरा अवसर हैं। आइए विस्तार से जानते हैं जून 2026 के उन प्रमुख व्रतों के बारे में, जो आपके जीवन में सुख-समृद्धि ला सकते हैं।
धार्मिक विशेषज्ञों के अनुसार, जून 2026 में ग्रहों की स्थिति और व्रतों का यह क्रम आध्यात्मिक साधना के लिए अत्यंत शुभ है। इन दिनों में किए गए जप, तप और दान से न केवल मानसिक शांति मिलती है।

परम एकादशी 11 जून, गुरुवार
अधिक मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी कमला, परमा एवं हरिवल्लभा एकादशी के नाम से प्रसिद्ध है। वर्ष 2026 में 11 जून, गुरुवार को यह व्रत है। इस दिन भक्तिपूर्वक सच्चे भाव से व्रत करने वालों के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और प्रभु की अपार कृपा जहां भक्तों पर बनी रहती है, वहीं उन्हें सभी प्रकार की निधियां और दुर्लभ सिद्धियां भी प्राप्त होती हैं।

मिथुन संक्रांति एवं अधिक अमावस्या 15 जून, सोमवार
सूर्य जब वृषभ राशि को छोड़ कर मिथुन राशि में प्रवेश करते हैं तो उस दिन को मिथुन सक्रांति के रूप में मनाया जाता है। इस वर्ष यह त्यौहार 15 जून को मनाया जा रहा है। यह पर्व चार दिन तक मनाया जाता है।
15 जून को अधिकमास का अंतिम दिन और अमावस्या तिथि है। पुरूषोत्तम मास समाप्त होगा। ये पावन माह 3 साल में एक बार आता है। जितना ये महीना खास था उतनी ही अधिक इसकी अमावस्या भी खास है।

निर्जला एकादशी 25 जून, गुरुवार
हिन्दू पंचांग के अनुसार तीसरा माह ज्येष्ठ का होता है | इस माह के शुक्ल पक्ष के दिन निर्जला एकादशी मनाई जाती है। निर्जला एकादशी हिन्दू धर्म के लिए एक विशेष दिन है| साल में सामन्यतः 24 एकादशी आती हैं, अधिक मास होने पर उनकी संख्या 26 तक हो जाती है। निर्जला एकादशी साल भर में आने वाली सभी एकादशियों में से सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस वर्ष निर्जला एकादशी 25 जून को मनाई जायेगी। अगर व्यक्ति इस दिन निर्जल हो कर पूरे दिन भगवान विष्णु का स्मरण करता है तो उसे पूरे वर्ष में आने वाली सभी एकादशियों का फल मिलता है।
शनि प्रदोष व्रत 27 जून, शनिवार
हिंदू शास्त्रों के अनुसार प्रदोष तिथि का बहुत महत्व है विशेषकर शनि प्रदोष के दिन शिव आराधना से हर मनोकामना पूरी की जा सकती है। भोले बाबा के साथ शनि की कृपा चाहते हैं तो प्रदोष व्रत करें। इस दिन प्रदोष काल में शिव पूजा करने से शनि दोष से मुक्ति मिलती है।

वट पूर्णिमा व्रत 29 जून, सोमवार
जून महीने का समापन वट पूर्णिमा के पर्व से होगा। ज्येष्ठ माह की अमावस्या को वट सावित्री के पूजन का विधान है। बहुत सारे स्थानों पर वट पूर्णिमा के दिन भी ये पर्व मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं दीर्घ सुखद वैवाहिक जीवन हेतु बरगद पूजन करती हैं। मान्यतानुसार सावित्री ने वट वृक्ष के नीचे पड़े अपने मृत पति सत्यवान को यमराज से जीता था। महिलाएं विधिविधान से वट पूजन करने के बाद ही जल ग्रहण करती हैं। शास्त्रानुसार बरगद को शिव स्वरूप माना गया है। प्राचीन ग्रंथ वृक्षायुर्वेद के अनुसार जो बरगद का वृक्ष लगाता है, वह शिव धाम को प्राप्त होता है। पाराशर मुनि के अनुसार- 'वट मूले तोपवासा' ऐसा कहा गया है।

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