Padmini Ekadashi Vrat Katha: पद्मिनी एकादशी व्रत कथा, जिसने रावण को हराने वाले महाबली को जन्म दिया

punjabkesari.in Tuesday, May 26, 2026 - 10:23 AM (IST)

Padmini Ekadashi Vrat Katha: पद्मपुराण के अनुसार, जिस प्रकार पक्षियों में गरुड़ और नदियों में गंगा श्रेष्ठ है, उसी प्रकार तिथियों में पद्मिनी एकादशी का व्रत अत्यंत पुण्यफलदायक माना गया है। यह विशेष एकादशी पुरुषोत्तम मास (जिसे अधिक मास या मल मास भी कहा जाता है) के शुक्ल पक्ष में आती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत को करने से भक्त को बिना मांगे ही सभी सुखों की प्राप्ति होती है और समस्त पापों का नाश हो जाता है। इस कथा में हम जानेंगे कि कैसे रानी पद्मिनी ने इस कठिन व्रत के प्रभाव से एक ऐसे प्रतापी पुत्र को प्राप्त किया, जिसने तीनों लोकों में अपनी शक्ति का लोहा मनवाया।

PunjabKesari Padmini Ekadashi Vrat Katha

पुरुषोत्तम महीने में जिसे लोग अधिक मास अथवा मल मास के नाम से भी पुकारते हैं में पद्मिनी एकादशी आती है। यह एकादशी समस्त पापों का नाश कर देती है। त्रेता युग में हैहय वंश में कृतवीर्य नाम के राजा महिष्मतिपुरी में राज्य करते थे। इनकी एक हजार पत्नियां थीं किन्तु सन्तान कोई नहीं थी, जो राज्य संभाल सके। देवताओं, पितरों व साधुओं के निर्देशानुसार विभिन्न व्रतों के अनुष्ठान करने से भी उन्हें पुत्र की प्राप्ति नहीं हुई। 
 
तब राजा ने तपस्या करने का निश्चय किया। वे अपने मंत्री को सम्पूर्ण राज्य-भार देकर, राजसी वेष त्याग कर तपस्या करने चले गए। महाराज के साथ उनकी बड़ी रानी, जो की इक्ष्वाकुवंश में उत्पन्न महाराज हरिश्चन्द्र की कन्या पद्मिनी थी ने भी उनका अनुसरण किया। उन दोनों ने मन्दराचल पर्वत पर जाकर दस हज़ार वर्ष तक घनघोर तपस्या की। 
 
तपस्या करने से महाराज का शरीर एकदम कमज़ोर हो गया। इधर महारानी पद्मिनी ने महासाध्वी अनुसूयाजी से विनीत होकर पूछा कि हे साध्वी! मेरे पति ने दस हज़ार वर्ष तक तपस्या की परन्तु फिर भी सर्व-दुःख विनाशकारी भगवान केशवदेव अब तक प्रसन्न नहीं हुए। आप कृपा करके मुझे किसी ऐसे व्रत का उपदेश दीजिए कि जिसके पालन करने से भगवान श्रीहरि प्रसन्न हो जाएं एवं हमें राजचक्रवर्ती की तरह कीर्तिमान श्रेष्ठ पुत्र की प्राप्ति हो सके।

PunjabKesari Padmini Ekadashi Vrat Katha
 
पतिपरायणा साध्वी अनुसूया, रानी पद्मिनी की प्रार्थना सुनकर बड़ी प्रसन्न हुईं एवं रानी से बोलीं - 32 महीने बाद एक बार अधिक मास आता है। इस महीने में पद्मिनी एवं परमा नाम की दो एकादशियां आती हैं, इन एकादशियों के व्रत का पालन करने पर पुत्रदाता भगवान बहुत शीघ्र प्रसन्न होते हैं।
 
अनुसूया देवी जी के कथनानुसार रानी पद्मिनी ने विधिपूर्वक एकादशी व्रत का पालन किया। तब भगवान केशवदेव गरुड़ पर स्वार होकर रानी के समीप आए और उन्होंने रानी से वरदान मांगने के लिए कहा। रानी ने बड़ी श्रद्धा से भगवान की स्तुति-वन्दना की तथा पतिदेव की अभिलाषा पूर्ण करने के लिए निवेदन किया। 
 
भगवान ने कहा- हे भद्रे! मैं तुम पर अति प्रसन्न हूं। अधिक मास को मेरे नाम पर ही पुरुषोत्त्म मास कहते हैं। इस पवित्र महीने के समान अन्य कोई महीना मेरा प्रिय नहीं है। इस महीने की एकादशी भी मुझे अत्यन्त प्रिय है। आप लोगों ने इस व्रत का सही विधि-विधान से पालन किया है। अतः आपके पतिदेव को उनका अभिलषित वरदान अवश्य दूंगा।
 
राजा को इच्छानुसार वरदान देकर भगवान अन्तर्हित हो गए। कालान्तर में उसी रानी के गर्भ से महाराज कृतवीर्य का पुत्र कार्तवीर्यार्जुन का जन्म हुआ। तीनों लोकों में कार्तवीर्यार्जुन के समान कोई बलवान नहीं था। इसी कार्तवीर्यार्जुन ने रावण को युद्ध में पराजित कर बन्दी बना लिया था।

PunjabKesari Padmini Ekadashi Vrat Katha

शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ

 

 


सबसे ज्यादा पढ़े गए

Content Writer

Niyati Bhandari

Related News