Guru Pradosh Vrat 2026: 3 साल बाद आया शिव-गुरु कृपा का महासंयोग, एक व्रत से चमक जाएगी विद्यार्थियों और कारोबारियों की किस्मत!
punjabkesari.in Wednesday, May 27, 2026 - 12:01 PM (IST)
Guru Pradosh Vrat 2026: सनातन धर्म में महादेव की भक्ति के लिए प्रदोष व्रत को सबसे उत्तम और फलदायी माना गया है लेकिन साल 2026 का प्रदोष व्रत कुछ खास होने वाला है। जब चंद्र मास के दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथि का मिलन सूर्यास्त के बाद होने वाले 'प्रदोष काल' से होता है, तो शिव साधना का सबसे बड़ा मार्ग खुल जाता है। वर्ष 2026 में जब यह पावन तिथि गुरुवार के दिन पड़ रही है, तो इसे 'गुरु प्रदोष' या 'बृहस्पति प्रदोष' के नाम से पुकारा जाता है।
शिव और गुरु का अद्भुत मिलन
शास्त्रों के अनुसार, गुरु प्रदोष के दिन केवल भगवान भोलेनाथ ही नहीं, बल्कि देवताओं के गुरु बृहस्पति की भी असीम कृपा बरसती है। यह दिन उन साधकों के लिए वरदान की तरह है जो अपनी आध्यात्मिक उन्नति और मानसिक शांति की खोज में हैं। मान्यता है कि 3 साल बाद बन रहे इस विशेष संयोग में व्रत रखने से भक्तों को धर्मज्ञान की प्राप्ति होती है।
देवगुरु बृहस्पति को ज्योतिष में सबसे बड़ा और शुभ ग्रह माना जाता है। इन्हें धन, समृद्धि, ज्ञान, धर्म और संतान का कारक माना जाता है।
प्रदोष व्रत की संध्या वेला में भगवान शिव कैलाश पर्वत पर नृत्य करते हैं। जिस दौरान सभी देवी-देवता उनकी स्तुति करते हैं। इस समय शिव जी की पूजा करने से हर तरह की मनोकामना पूरी हो जाती हैं। शिव को समर्पित त्रयोदशी सर्व दोषों का नाश करती है, अतः इसे प्रदोष कहा जाता है। शास्त्रानुसार इस दिन समस्त दिव्य शक्तियां शिवलिंग में समा जाती हैं। प्रदोषकाल में सिर्फ शिवलिंग के दर्शन से सर्व जन्मों के पाप मिट जाते हैं व बेलपत्र चढ़ाकर दीप जलाने से अनेक पुण्य प्राप्त होते है।
हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार ज्ञान, बुद्धि, भाग्य और सुखी दांपत्य के लिए गुरु पूजा उत्तम उपाय है। गुरु प्रदोष के दिन देव गुरु बृहस्पति की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं शीघ्र पूर्ण होती हैं, आपकी जिंदगी की दिशा और दशा बदल सकती है। गुरुवार के दिन गुरु बृहस्पति के मंत्रों का जाप करके पूजा करने से ज्ञान, बुद्धि और विवाह संबंधी समस्याओं को दूर कर सकते हैं। इनकी कृपा से कमाई और खर्च संतुलित रहता है। जिससे व्यक्ति सफलता के शिखर पर पंहुचता है। विष्णु मंदिर में शहद चढ़ाएं।

इन क्षेत्रों में मिलेंगे उम्मीद से अधिक मंगलमय परिणाम
शिक्षा और तीक्ष्ण बुद्धि: देवगुरु ज्ञान और बुद्धि के कारक हैं। पढ़ने वाले बच्चों को गुरु प्रदोष व्रत अवश्य रखना चाहिए। इससे शिक्षा में चल रही सभी समस्याएं समाप्त होती हैं। खुद से फैसले लेने की शक्ति बढ़ती है। इस व्रत के प्रभाव से वीक स्टूडेंट्स को टॉप में पहुंचते देखा गया है।
दौलत-शोहरत: सुख, समृद्धि, ज्ञान और भाग्य का उदय होता है। जिससे अमीर व्यक्तियों की सूची में जल्द ही आपका नाम भी शामिल हो जाएगा। बिजनेसमैन को अपने कारोबार में हैरान करने वाले लाभ मिलने आरंभ हो जाते हैं।
विवाह और संतान सुख: कुंवारों को मनचाहा जीवनसाथी मिलता है। अधूरा प्रेम पूरा होता है। निःसंतान दंपत्तियों के जीवन में संतान की किलकारी गूंजती है।
रिश्तों में मधुरता: जिसकी कुंडली में गुरु ग्रह शुभ स्थिति में होते हैं, उनके पिता, गुरुजनों और बड़े भाइयों के साथ संबंध प्रगाढ़ होते हैं।

